बेबी रानी मौर्या को आगरा ग्रामीण से उतारकर भाजपा ने जाहिर किए इरादे
नई दिल्ली, 15 जनवरी: पिछले साल उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य के इस्तीफा देने के बाद साफ हो गया था कि, भारतीय जनता पार्टी उन्हें फिर से वापस सक्रिय राजनीति में लाना चाहती है। आज बीजेपी ने यूपी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पहली लिस्ट जारी कर दी। इस लिस्ट में बीजेपी ने बेबी रानी मौर्या को टिकट दी है। भाजपा ने बेबी रानी मौर्या को आगरा ग्रामीण से उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद यह साफ हो गया है कि बीजेपी दलित चेहरा होने के चलते बेबी रानी मौर्या के सहारे दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है।

खिसकते दलित वोटरों को साधने की कोशिश
हाल ही में समाजवादी पार्टी ने बीजेपी के कई मंत्रियों और विधायकों को पार्टी में शामिल किया है। जिसके जरिए सपा ओबीसी और दलित वोट बैंक को फिर से एक जुट करने की कोशिश कर रही है। सपा की इसी रणनीति को मात देने के लिए बीजेपी बेबी रानी मौर्या को फिर से सक्रिय राजनीति में वापस लाई है। दरअसल अनुसूचित जाति की राजधानी कहे जाने वाले आगरा में पार्टी उनके चेहरे को भुना की कोशिश कर रही है। तो इस बहाने बीजेपी सपा और बसपा के वोट में सेंध भी लगाने का प्रयास कर सकती है।

आगरा में मौजूदा विधायकों के खिलाफ हैं पार्टी के कार्यकर्ता
2017 में आगरा की 9 की 9 विधानसभाओं में परचम लहराने वाली भाजपा को 2022 के विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से विरोध का सामना करना पड़ रहा है। आगरा ग्रामीण विधानसभा से वर्तमान भाजपा विधायक आंतरिक सर्वे में फेल हुई हैं। यहां से जातिगत आधार पर कुशवाह समाज के वोटरों के लिए उनका टिकट काटने पर विचार हो रहा था। जिसके बाद बीजेपी ने बेबी रानी मौर्या को टिकट दिया है।

आगरा में बेबी रानी की छवि दलित नेता की है
भाजपा अनुसूचित जाति की उच्च शिक्षित महिला नेता के तौर पर बेबी रानी मौर्या को आगरा ग्रामीण की सुरक्षित सीट से चुनाव मैदान में उतार है। कयास यह भी हैं कि उन्हें राज्य स्तर पर सांगठनिक कार्यों में जिम्मेदारी दी जा सकती है। पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि पूर्व राज्यपाल के रूप में भी वह चुनाव में स्टार प्रचारक की भूमिका निभा सकती हैं। जिसके जारिए बीजेपी दलितों के बीच फिर से अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश करेगी।

आगर और आसपास की कई सीटों पर दलित वोटरों का प्रभाव है
बेबी रानी की वापसी के बीजेपी ने साफ कर दिया कि, वह दलित वोट को किसी भी हाल में अपने हाथों से नहीं खिसकने देना चाहती है। पिछले विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को बड़ी जीत हासिल करने में ओबीसी और दलित वोटरों ने सबसे अहम भूमिका निभाई है। हालांकि पार्टी ने आगरा और आगरा ग्रामीण और उससे सटी कई विधानसभाओं के मौजूदा विधायकों के टिकटों काट दिया है।












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