मिशन 2024 की तैयारी: विकासपरक योजनाओं के सहारे आजमगढ़ की इमेज बदलने में जुटी BJP

लखनऊ, 05 अगस्त: उत्तर प्रदेश में चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) को करारी शिकस्त दी थी। विधानसभा चुनाव के लगभग तीन महीने बाद आजमगढ़ (Azamgarh) और रामपुर (Rampur) लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुआ जिसमें बीजेपी ने सपा को फिर मात दे दी। हालांकि विधानसभा चुनाव (Vidhansabha Election) के दौरान आजमगढ़ में सपा ने जो प्रदर्शन किया था वह उपचुनाव में नहीं दोहरा पाई। इसको लेकर अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की रणनीति पर कई तरह के सवाल खड़ा किये गए। हालांकि बीजेपी अब आजमगढ़ को दोबारा हाथ से जाने नहीं देना चाहती है इसलिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने आजमगढ़ की इमेज बदलने के लिए अब यहां योजनाओं की झड़ी लगा दी है।

सरकारी योजनाओं के सहारे आजमगढ़ की इमेज बदलने की कवायद

सरकारी योजनाओं के सहारे आजमगढ़ की इमेज बदलने की कवायद

लोकसभा उपचुनाव में आजमगढ़ फतह करने के बाद अब योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने समाजवादियों के इस किले को नए सिरे से तराशने का काम शुरू कर दिया है। योगी ने गुरुवार को आजमगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान करोड़ों रुपये की योजनाओं की शुरूआत की। इस मौके पर बीजेपी सांसद दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ भी मौजूद रहे। योगी ने इस मौके पर कहा कि पहले आजमगढ़ का नाम आतंक से जुड़ता था लेकिन अब सरकार ने यहां की इमेज को बदलने का फैसला किया है। सरकार यहां विकास का खाका खींचने का काम करेगी। बीजेपी की सरकार ने आजमगढ़ में सुहेलदेव विश्वविद्यालय बनाने का भी ऐलान किया है।

विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ में सभी सीटें हार गई थी बीजेपी

विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ में सभी सीटें हार गई थी बीजेपी

दरअसल चार महीने पहले यूपी में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की स्थिति काफी अलग थी। आजमगढ़ की सभी दस विधानसभा सीटों पर सपा ने जीत हासिल की थी। लेकिन तीन महीने के अंदर ही यहां की बाजी पूरी तरह से पलट गई। जिन सीटों पर बीजेपी हारी थी वहां भी भाजपा को काफी वोट मिले और वो इस सीट जीतने में सफल रही। बीजेपी के रणानीतिकारों को खुद इस बात की उम्मीद नहीं थी कि भाजपा को जीत मिलेगा लेकिन बसपा (Bahujan Samaj Party) के उम्मीदवार गुड्डू जमाली ने बीजेपी की राह आसान कर दी थी।

आजमगढ़ की इमेज बदलकर सियासी फायदा लेने की कोशिश

आजमगढ़ की इमेज बदलकर सियासी फायदा लेने की कोशिश

राजनीतिक विश्लेषक राजीव रजंन सिंह की माने तो अखिलेश कई मोर्चे पर चूक गए। उपचुनाव लड़ने को लेकर सपा में वो आत्मविश्वास और उत्साह नजर नहीं आया जो विधानसभा चुनाव के दौरान देखने को मिला था। आप देखिए कि एक तरफ नगर निगम का चुनाव भी होता है तो बीजेपी में अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे कद़दावर नेता जाकर प्रचार करते हैं। फिर लोकसभा उपचुनाव को अखिलेश ने कैसे हल्के में ले लिया ये बड़ा सवाल है। हालांकि अब बीजेपी ने आजमगढ़ में जीत हासिल करने के बाद उसने अपनी नजरें 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर टिका दी है। आजमगढ़ की इमेज बदलकर वह अगले चुनाव में इसका सियासी फायदा लेने की भरपूर कोशिश करेगी।

विधानसभा में हारने के बाद लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हुई जीत

विधानसभा में हारने के बाद लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हुई जीत

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी को पुर्ण बहुमत मिला था। विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने आजमगढ़ लोकसभा सीट की सभी पांचों सीटों पर कब्जा जमाया था लेकिन तीन महीने बाद ही सपा के सबसे बड़े गढ़ में बीजेपी ने सेंध लगा दी। अखिलेश यादव का प्रचार के लिए न निकलना उनके उपर भारी पड़ गया। आजमगढ़ में बीजेपी की जीत की गूंज लंबे समय तक अखिलेश यादव के कानों में गूंजती रहेगी। लेकिन बीजेपी अब इस जीत का फायदा उठाना चाहती है। इसलिए सीएम योगी चुनाव जीतने के बाद पहली बार आजमगढ़ पहुंचे और कई योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

लोकसभा उपचुनाव हारने के बाद अखिलेश का कुनबा बिखरा

लोकसभा उपचुनाव हारने के बाद अखिलेश का कुनबा बिखरा

हालांकि अभी भी अखिलेश यादव को नहीं समझ में आ रहा है कि उनसे चूक कहां हुई लेकिन बीजेपी ने सधी हुई रणनीति और प्रचारतंत्र के सहारे आजमगढ़ में जीत हासिल कर ली थी। अखिलेश अपने चचेरे भाई के लिए प्रचार करने क्यों नहीं निकले आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में सपा को मिली हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिरकार अखिलेश यादव उपचुनाव में प्रचार के लिए क्यों नहीं निकले। लोकसभा उपचुनाव के बाद अखिलेश का कुनबा भी बिखर गया और केशव देव मौर्य, ओम प्रकाश राजभर और शिवपाल सरीखे राजनीति के खिलाड़ियो ने अखिलेश के गठबंधन से अपने आपको अलग कर लिया है।

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