RajysabhaElection: मायावती को उनके ही विधायक ने दिया बड़ा झटका, ओपी राजभर ने खोली पोल
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लखनऊ। राज्यसभा चुनाव में लगातार सियासी उठापटक जारी है, एक तरफ जहां सपा अपने तमाम विधायकों को रात्रिभोज के कार्यक्रम के जरिए एकजुट करने की कोशिश कर रही है और मायावती अपने एकमात्र उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं, तो दूसरी तरफ बसपा के ही विधायक ने मायावती के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने बताया कि भाजपा द्वारा आयोजित बैठक में उनकी निषाद पार्टी के विधायक विजय मिश्रा के अलावा बसपा विधायक अनिल सिंह भी मौजूद थे।

बागी हुए बसपा विधायक
ओपी राजभर ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों ही विधायक इस बैठक में मौजूद थे और उन्होंने भाजपा के पक्ष में वोट डालने का आश्वासन दिया है। इन दोनों विधायकों के भाजपा के पक्ष में जाने से मायावती के उम्मीदवार के राज्यसभा पहुंचने का खेल बिगड़ता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां सपा के भीतर पहले ही इस बात को लेकर रस्साकस्सी चल रही है कि उनके सभी विधायक पार्टी समर्थित उम्मीदवार को अपना वोट देंगे या नहीं। ऐसे में बसपा विधायक और निषाद पार्टी के विधायक का भाजपा के समर्थन में जाना अब नए सियासी समीकरण को दिखा रहा है।

योगी सरकार पर लगाया था आरोप
आपको बता दें कि इससे पहले ओपी राजभर ने भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि अगर वह अमित शाह से मुलाकात नहीं करते हैं तो वह वह भाजपा को राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं देंगे। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस सरकार ने जमीन पर कुछ काम नहीं किया है और वह 325 सीटों के नशे में चूर है। ओपी राजभर के बगावती सुर के बाद पार्टी के शीर्ष नेताओं व अमित शाह ने उनसे मुलाकात की थी, जिसके बाद आखिरकार उन्होंने भाजपा के समर्थन में वोट देने का फैसला लिया है।

क्या है राज्यसभा का गणित
राज्यसभा के नामांकन की तारीख खत्म होने से पहले 10 सीटों के लिए कुल 11 नामांकन किए गए हैं जिसमे से 9 पर भाजपा, एक पर सपा और एक पर बसपा के उम्मीदवार ने नामांकन भरा है। तीनों ही पार्टी अपने उम्मीदवार की जीत को लेकर आश्वस्त हैं। आपको बता दें कि राज्यसभा में पहुंचने के लिए उम्मीदवार को 37 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। लेकिन भाजपा के पास 300 से अधिक विधायक हैं, ऐसे में भाजपा आसानी से अपने 8 सदस्यों को राज्यसभा में भेज सकती है। सपा के पास 47 विधायक हैं, लिहाजा उसके पास एक सदस्य को राज्यसभा भेजने के बाद भी 10 अतिरिक्त वोट हैं। वहीं मायावती के पास कुल 19 विधायक हैं, ऐसे में उन्हें 18 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी ताकि वह अपने उम्मीदवार को राज्यसभा भेज सकें।
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