डॉक्टरों ने 60 मिनट तक रोकी मरीज की धड़कन, फिर किया 'जिंदा'
पूर्वांचल का एम्स कहे जाने वाले काशी हिन्दू विश्व विद्यालय के सर सुन्दर लाल अस्पताल में एक ऐसा आपरेशन किया गया हैं जिसके बारे में जान कर आप भी हैरान हो जाएंगे।
वाराणसी। पूर्वांचल का एम्स कहे जाने वाले काशी हिन्दू विश्व विद्यालय के सर सुन्दर लाल अस्पताल में एक ऐसा आपरेशन किया गया हैं जिसके बारे में जान कर आप भी हैरान हो जाएंगे। चार घंटे तकत चले इस ऑपरेशन में डॉक्टरों ने मरीज की धड़कन को 60 मिनट यानि 1 घंटे तक बंद कर दिया था। यह ऑपरेशन सफल होने के साथ साथ चिकित्सा जगत में एख मिसाल भी बन गया है।

मरीज को ये बीमारी थी
दरसअल बीएचयू के सर सुन्दर लाल चिकित्सालय में चार दिन पहले 18 साल के एक युवक को बपचन से सांस फूलने और ह्रदय गति में तेजी के कमी और दर्द जैसी पीड़ा से ग्रसित होने पर एडमिट किया गया था। उसका इलाज करने वाले डाकटर ने जब जांच कराया तो पता चला कि युवक को साइनस वालसालवा एंड पल्मोनिक वेन्ट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट नाम की बीमारी है। इस बीमारी के कारण मरीज का हार्ट से पूरे शरीर में खून की सप्लाई करने वाली नली में छेद हो गया था। इतना ही नहीं युवक के दिल में पहले से भी एक छेद था।

अब तक का सबसे क्रिटिकल आपरेशन हुआ ये
कार्डियक सर्जन डॉ. सिद्धार्थ लखोटिया और उनकी टीम ने आईएमएस के इतिहास में अब तक के दिल की सबसे रेयर और क्रिटिकल ऑपरेशन को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। करीब 20 लोगो की टीम के साथ डाक्टर लखोटिया ने चार घंटे तक आपरेशन किया जिसमें युवक की दो मुख्य छिद्रों यानि मुख्य धमनी एरोटा के छिद्र और वेंट्रीकल के बीच के छिद्रो को आधुनिक डॉक्रों पैच लगा कर बंद किया गया।

इस बीमारी का पहली ऑपरेशन
यही नहीं इस आपरेशन के दौरान कार्डियोपल्मोनरी तकनीक की सहायता से हार्ट को 60 मिनट तक धड़कने से बंद रखा गया। बीएचयू में अबी तक 500 से ज्यादा ओपन हार्ट सर्जरी हुए हैं लेकिन इस बीमारी का यह पहला केस था। डॉ. लखोटिया ने बताया की ये उनके जीवन का अब तक का सबसे क्रिटिकल आपरेशन था।












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