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Banke Bihari Mandir News: UP के बांके बिहारी मंदिर में भक्तों ने पिया AC का गंदा पानी! कैसे समझा 'चरणामृत'?

Uttar Pradesh Banke Bihari Mandir News: उत्तर प्रदेश के वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें श्रद्धालु गलती से एसी के पानी को कथित तौर पर 'चरणामृत' समझकर पीते हुए दिखाई दे रहे हैं।

यह घटना उस समय हुई, जब मंदिर की दीवार पर लगे हाथी के आकार की टोंटी से पानी बहता दिखा, जिसे भक्त पवित्र मानकर पीने लगे। इस वीडियो में कुछ श्रद्धालु पानी को प्याले में भरते हुए तो कुछ अपने हाथों में लेकर पीते हुए नजर आ रहे हैं। कुछ लोगों ने इस पानी को आस्था के प्रतीक के रूप में अपने सिर पर भी लगाया।

Uttar Pradesh Banke Bihari Mandir

AC का पानी समझा भगवान का 'चरणामृत'!

रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर की वास्तुकला में लगे हाथी के आकार की इस टोंटी से बहने वाला पानी वास्तव में चरणामृत नहीं था, बल्कि मंदिर के एसी (Air Conditioner) से निकलता कंडेन्सेशन का पानी था। एक दर्शनार्थी ने वीडियो में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि यह भगवान का चरणामृत नहीं बल्कि एसी का पानी है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है, "दीदी ये एसी का पानी है, ठाकुर जी के चरणों का नहीं।"

श्रद्धालुओं ने नहीं मानी चेतावनी

हालांकि, इस चेतावनी के बावजूद कई श्रद्धालुओं ने पानी को पवित्र मानकर पीना जारी रखा। मंदिर के बाहर कतार में खड़े अन्य भक्तों को भी यह दृश्य देख आश्चर्य हुआ, और उन्होंने पानी पीने से मना किया। उनका कहना था कि यह पानी सुरक्षित नहीं हो सकता और इससे संक्रमण का खतरा हो सकता है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक व्यक्ति ने मजाक में कहा, "कौन जानता था कि एसी का पानी भी दिव्य अनुभव बन सकता है!" वहीं, दूसरे व्यक्ति ने लिखा, "ऐसी चीजें सिर्फ भारत में ही हो सकती हैं।" कई यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि मंदिर ट्रस्ट को इस तरह के भ्रम से बचने के लिए एक चेतावनी बोर्ड लगाना चाहिए था, ताकि भक्तों को असली और नकली पानी में फर्क समझ में आ सके।

अन्य घटनाओं की याद दिलाती है यह घटना
यह घटना 2012 की एक और घटना की याद दिलाती है, जब मुंबई में ईसा मसीह की मूर्ति के पास से भी पानी टपकता देखा गया था। तब लोगों ने इसे चमत्कार समझा था, लेकिन भारतीय तर्कवादी सनल एडमारुकु की जांच में यह पता चला कि पानी दरअसल एक बंद पाइप से रिस रहा था, और इसका धार्मिक महत्व नहीं था।

इस तरह की घटनाएं आस्था और जागरूकता के बीच एक संतुलन बनाने की जरूरत को दर्शाती हैं। धार्मिक स्थानों पर भ्रमित करने वाले तत्वों की मौजूदगी से श्रद्धालु अक्सर सही-गलत का अंतर नहीं समझ पाते। इस घटना के बाद उम्मीद है कि मंदिर प्रबंधन ऐसे स्थानों पर उचित चेतावनी जारी करेगा ताकि भक्तों को असुविधा न हो और वे सुरक्षित रहें।

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