बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास की मुश्किलें बढ़ीं, हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

लखनऊ, 29 अगस्त: उतर प्रदेश में मऊ जिले की सदर सीट से विधायक और बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कोर्ट ने पहले ही उनको भगोड़ा घोषित कर दिया है। इस बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सोमवार को मऊ (सदर) विधायक अब्बास अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अब्बास अंसारी आर्म्स एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत आरोपों का सामना कर रहे हैं।

अब्बास अंसारी

मऊ (सदर) से पहली बार विधायक बने अंसारी के पिता और गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी ने इस सीट से 1996 से लगातार पांच बार प्रतिनिधित्व किया था। अब्बास अंसारी पर एक ही हथियार के लाइसेंस पर धोखाधड़ी से कई हथियार खरीदने का आरोप लगाया गया है। फर्जी तरीके से हथियारों के लाइसेंस ट्रांसफर करने का मामले में पुलिस उनको तलाश रही है। कोर्ट ने पहले ही भगोड़ा घोषित कर दिया है।

अदालत ने जारी किया है लुकआउट नोटिस

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के विधायक अब्बास अंसारी ने 2022 के उत्तर प्रदेश राज्य विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (SP) के साथ गठबंधन किया था। सरेंडर करने में विफल रहने के बाद अदालत ने गुरुवार को भगोड़ा घोषित कर दिया था। अदालत ने उनकी संपत्ति को जब्त करने का नोटिस भी जारी किया और उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस और गैर-जमानती वारंट जारी किया है।

शुक्रवार को हुई थी जमानत याचिका पर सुनवाई

न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने शुक्रवार को अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी की और आदेश सोमवार के लिए सुरक्षित रख लिया था। अदालत में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अतिरिक्त महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने अंसारी की याचिका का विरोध किया।

लाइसेंस बनवाने में धोखाधड़ी का आरोप

अदालत ने कहा, "गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए कि आरोपी-आवेदक ने अपने हथियार लाइसेंस को धोखाधड़ी से पंजीकृत किया और शूटिंग का आधार लेकर बड़ी संख्या में प्रतिबंधित बैरल, हथियार और कारतूस प्राप्त किए। उसने हथियार और कारतूस खरीदे हैं जो शूटिंग अभ्यास में प्रतिबंधित हैं और भारत सरकार की अधिसूचना के खिलाफ हैं।"

अदालत ने आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आरोपी-आवेदक उस अदालत की प्रक्रिया से बच रहा है जिसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। अदालत को आरोपी-आवेदक को अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है।

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