विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा- सदन में हुल्लड़बाजी की जगह सार्थक बहस होनी चाहिए

लखनऊ, 16 नवंबर: उत्तर प्रदेश में अगले महीने की शुरुआत में चुनाव होने है। चुनाव की तैयारियों में अब सारे लोग जुटे हुए हैं। वहीं उन्नाव जिले के भगवंतनगर सीट से विधायक हृदय नारायण दीक्षित को योगी सरकार में विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया था। अब सरकार को कुछ ही महीने बचे हैं ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर उनका कार्यकाल कैसा रहा और एक विधायक के तौर पर वह भगवंतनगर की जनता की उम्मीदों पर कितने खरे उतरे इसको लेकर उन्होंने वन इंडिया डॉट काम से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि विधानसभा हुल्लड़बाजी के लिए नहीं होती है। यहां एक सार्थक बहस होनी चाहिए और पक्ष या विपक्ष के सभी सदस्यों को हमेशा इसका खयाल रखना चाहिए।

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    विधानसभा अध्यक्ष


    विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने बातचीत के वन इंडिया के प्रमुख संवाददाता के साथ बातचीत के दौरान अब तक के कार्यकाल पर विस्तार से बातचीत की। दीक्षित ने कहा कि कार्यकाल के दौरान विधानसभा में बहुत अभूतपूर्व काम हुए। कई ऐतिहासिक कार्यक्रम भी चलाए गए। देश में यूपी एक ऐसा राज्य है जहां 36 घंटे का विशेष सत्र आयोजित किया गया। यह काम अब तक किसी विधानसभा में नहीं हुआ है।

    सवाल: सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में है। पिछले लगभग साढ़े चार सालों में सदन को चलाने का मौका मिला। कैसा अनुभव रहा।

    जवाब: उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल तमाम तरह से संतोषजनक और प्रशंसनीय भी है। हम लोगों ने कामनवेल्थ सम्मेलन किया जो अनोखा था और पहली बार हुआ। विधानसभा में सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के सभी नेता समेत सभी लोगों का सहयेाग मिला और कार्यवाही को क्वालिटेटिव बनाने में सहयोग किया। विधानसभा में अच्छी चीजों का श्रेय लेना उचित नहीं है। हम जहां सफल हुए हैं वह सामूहिक प्रयास है और जहां असफल हुए हैं वहां सुधार की गुंजाइश है। हमने रिकार्ड कायम किया है। हमने लगातार 36 घंटे का सत्र चलाया। हमने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन किया। सदस्यों के लिए नई कमेटी का गठन किया जिसे संसदीय अनुश्रवण समिति के नाम से जाना जाता है। यह समिति पहले यहां नहीं थी।

    विधानसभा

    सवाल: सदन को बेहतर तरीके से चलाने के लिए आपने हमेशा प्रयास किया। अगर आप से पूछा जाए कि आपके कार्यकाल की पांच उपलब्धियां क्या रहीं, तो क्या कहेंगे ?

    जवाब: प्रश्न तो मजेदार है लेकिन केवल पांच ही क्यों। हमने पहले ही कहा कि हमने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को लेकर एक समिति का गठन किया है। यह अपने आप में एक अनूठी समिति है। हमने लगातार 36 घंटे का सत्र चलाया और इसमें सभी सदस्यों ने जमकर अपनी बात रखी। तीसरी सरकार के लक्ष्यों को लेकर काम हुआ। हमने जो प्रश्नोत्तर की क्वालिटी बढ़ाने का काम किया। प्राय तीन या चार में ही प्रश्नकाल समाप्त हो जाता था लेकिन इसे हमने बढ़ाने का काम किया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में वैचारिक असहमति तो दिखाई पड़ी लेकिन किसी ने हमारे उपर सवाल नहीं उठाया।

    सवाल: सरकार का कार्यकाल आखिरी दौर में है लेकिन ऐसे समय में विधानसभा का डिप्टी स्पीकर चुनने की नौबत क्यों आई ?

    जवाब: ये फैसला सरकार का था। जब सरकार को उचित लगा कि सदन में डिप्टी स्पीकर होना चाहिए तो उन्होंने चुनाव का प्रस्ताव रखा। पक्ष से भी एक उम्मीदवार ने चुनाव लड़ा और विपक्ष के उम्मीदवार ने भी हिस्सा लिया। इसमें एक की जीत हुई। लिहाजा इस विषय पर इससे ज्यादा कुछ बोलना सही नहीं होगा।

    यूपी विधानसभा अध्यक्ष

    सवाल: आप उन्नाव जिले की भगवंत नगर सीट से विधायक हैं। पिछले पांच सालों में आपने ऐसे कौन से कार्य किए जिससे जनता आपको दोबारा चुने?

    जवाब: दोबरा चुने जाने लायक काम मैने किया है या नहीं यह तो आपको जनता बताएगी लेकिन हां मैं जिस विधानसभा से आता हूं वहां पहले से ज्यादा सुविधाएं लोगों को मिली है। बिजली, पानी और सड़क के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाएं भी बेहतर हुई हैं। जिले में 100 बेड का अस्पताल बना है जो पहले नहीं था। इसको लेकर काफी प्रयास किया गया। यह अस्पताल ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए काफी सहायक होगा और लोगों को इससे मदद मिलेगी वहां ऐसी नहरें थीं जहां सिंचाई के लिए 27 वर्षों से पानी नहीं आता था लेकिन योगी सरकार ने लोगों की जरुरतों को पूरा करने का काम किया है। हमारी विधानसभा में सरकार की तरफ से लोगों को आरओ का पानी उपलब्ध कराने का प्रयास किया है। प्रत्येक गांव में सड़क नहीं थी। अध्यक्ष बनने के 15वें दिन ही हर जरूरी जगहों से बसें शुरू कराई गईं।

    इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे थे

    26 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक देश में इमरजेंसी लगा दी गई थी। इस दौरान कई नेताओं को जेल में डाल दिया गया था. तब हृदय नारायण दीक्षित भी जेल गए थे। उन्हें 19 महीने जेल में रखा गया। हृदय नारायण दीक्षित का इमरजेंसी पर कहते हैं कि 1975 में इमरजेंसी लगा कर कांग्रेस ने संविधान का गलत इस्तेमाल किया था। न्यायपालिका की ताकत कमजोर की गई थी और पूरे देश को तहखाना बना दिया गया था। सारे लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक थी और जिसने संघर्ष किया, उसे जेल में डाला गया और प्रताड़ित किया गया।

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