200 साल पहले रोहिल्ला राजवंश का किला था सहारनपुर जेल, पुरातत्व विभाग का नोटिस
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सहारनपुर। पुरातत्व विभाग की ओर से सहारनपुर की जिला जेल को नोटिस दिया है, जिसके बाद यहां के प्रशासन और जिला जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस नोटिस में पुरातत्व विभाग ने जिला जेल को ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए इसमें किसी भी तरह का नवीन निर्माण कार्य या मरम्मत कार्य न किए जाने की बात कही है। हलांकि यह जेल पहले से ही संरक्षित स्मारक घोषित है।

सहारनपुर जिला जेल करीब 200 साल पहले रोहिल्ला राजवंश का किला हुआ करता था। सन् 1868 में इस महल को जेल बना दिया गया। उस वक्त जेल की क्षमता 232 कैदियों की थी। वर्ष 1920 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने इस जेल को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया।
हलांकि, इसे दरकिनार करते हुए तत्कालीन प्रशासन ने जेल में कुछ निर्माण कराकर इसकी क्षमता को बढ़ाते हुए 405 कैदी कर दिया गया। सैकड़ों साल पुराने इस जेल में फिलहाल 530 कैदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन जिस तरह से जनपद में अपराध हो रहे हैं, उसे देखते हुए यहां पर कैदियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। बंदियों को रखने के लिये नौ बैरक हैं। इसी जेल में महिला कैदियों को रखने की भी व्यवस्था है। इस वक्त यहां पर करीब 1500 कैदी और बंदी है।
जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि पुरातत्व विभाग की ओर से एक नोटिस मिला है, जिसमें कहा गया है कि जिला जेल में किसी भी तरह का नवीन निर्माण या मरम्मत कार्य न कराया जाए, क्योंकि यह एक संरक्षित स्मारक है। उन्होंने बताया कि यह नोटिस उनकी ओर से डीआईजी जेल मेरठ रेंज शशि शर्मा को भेज दिया। उन्होंने शासन को पत्र भेजकर जिला जेल को दूसरी जगह बनवाकर इसे नये भवन में शिफ्ट करने की इजाजत मांगी है। आदेश मिलने पर नई जेल बनाने की कवायद शुरू हो सकेगी। वर्ष 2014 में पुरातत्व विभाग ने जेल के कुछ हिस्सों में खुदाई की थी। इस खुदाई में पुरातात्विक महत्व की कई चीजें निकली थीं। जेल के गेट पर अब भी पत्थर लगा है, जिसमें रोहिल्ला वंश के बारे में जानकारी लिखी है। पुरातत्व विभाग ने जेल में कोई नया निर्माण करने पर रोक लगा रखी है।












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