यूपी: बागपत में मिली महाभारत कालीन कब्रगाह और पुराने रथ-मुकुट
बागपत। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एवं पुरातत्व सर्वेक्षण लाल किला के संयुक्त तत्वावधान में सिनौली में चल रहे उत्खनन से अत्यंत मानवीय सभ्यता के दुर्लभ पुरावशेष प्राप्त हुए हैं। विधिवत रूप से सिनौली उत्खनन का समापन उत्खनन निदेशक डॉ. संजय मंजुल, डॉ. अरविन मंजुल के द्वारा किया गया। विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को आधार बनाकर शोध एवं अनुसंधान कर रहे शहजाद राय शोध संस्थान के शोध निदेशकों की टीम जिसमें वरिष्ठ इतिहासकार अमित राय जैन, डॉ. केके शर्मा, डॉ. अमित पाठक भी शामिल थे।

दरअसल, 2005 में सिनौली उत्खनन ने संपूर्ण विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। विश्व के सबसे बड़ा शवाधान केंद्र के रूप में सिनौली स्थल को माना गया क्योंकि वहां से ताम्रनिधि, स्वर्णनिधि के साथ अत्यंत दुर्लभ प्रकार के पुरावशेष प्राप्त हुए थे। अब पुन: 15 फरवरी 2018 से इतिहासकारों के प्रस्ताव पर बरनावा उत्खनन की टीम ने यहां ट्रायल ट्रेंच लगाया तो उन्हें ताम्रयुगीन सभ्यता की तलवारें आदि प्राप्त हुए।
उत्खनन का कार्य आगे बढ़ा तो वहां से करीब 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता के शवाधान केंद्र प्राप्त हुआ। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि सिनौली उत्खनन से प्राप्त आठ मानव कंकाल एवं उन्हीं के साथ दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्री से भरे मृदभांड, उनके अस्त्र-शस्त्र, औजार एवं बहुमूल्य मनकें यह सिद्ध करते हैं कि यहां 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता विद्यमान थी।
एएसआई के निदेशक को संस्थान द्वारा प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है कि अगले सत्र की खुदाई में यहां के काफी बड़े हिस्से को दीर्घ उत्खनन के माध्यम से सामने लाया जाए ताकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश संपूर्ण विश्व की मानव सभ्यता का सिरमौर साबित हो सके।












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