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यूपी में उपचुनाव से पहले BJP का बड़ा दाव! क्या हैं मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव पर मेहेरबानी के मायने?

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू, अपर्णा यादव को भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश महिला आयोग में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। योगी सरकार ने यूपी में 10 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले बड़ा खेल खेला है। अखिलेश यादव के सौतेले भाई की पत्नी, अपर्णा यादव को यूपी महिला आयोग का उपाध्यक्ष बनाना उसमें शामिल है।

पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और अखलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की पत्नी, अपर्णा यादव ने परिवार की पार्टी से नाता तोड़ कर बीजेपी का हाथ थाम लिया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में, यादव परिवार की छोटी बहू अपर्णा यादव चुनाव से सिर्फ एक महीने पहले समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई थीं।

Aparna Yadav

हालांकि, विधानसभा चुनाव में तो अपर्णा यादव को बीजेपी ने टिकट नहीं दिया और लोकसभा चुनाव में भी अपर्णा यादव टिकट से दूर ही रहीं। ये पहली बार है जब यादव परिवार की छोटी बहू को भाजपा ने कोई बड़ी जिम्मेदारी दी है।

क्या बीजेपी ने अपर्णा यादव को थमाया 'झुनझुना'?

अपर्णा यादव को यूपी महिला आयोग में उपाध्यक्ष बनाने के बाद ये भी कहा जा रहा है कि अपने परिवार की पार्टी से मुंह मोड़ कर बीजेपी का दामन थामने वाली अपर्णा को उपाध्यक्ष पद के रूप में झुनझुना मिला है। हालांकि, इस सिक्के के दूसरे पहलू पर नजर डालें तो बहुत हद तक संभव है कि बीजेपी इसके माध्यम से अपर्णा के नेतृत्व क्षमता को मापने का काम कर रही हो और उम्मीद पर खरा उतरने पर अगले विधानसभा चुनाव में मौका भी मिल जाए।

अपर्णा के उपाध्यक्ष बनने से सपा को कितना नुकसान?

करहल सीट पर भी उपचुनाव होने है। इसे देखते हुए अपर्णा यादव की नियुक्ति अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की परेशानी बढ़ा सकती है। अखिलेश यादव 2022 के विधानसभा चुनाव में करहल सीट से विधायक चुने गए थे। जबकि कन्नौज से 2024 के लोकसभा चुनाव में सांसद चुने जाने के बाद अखिलेश यादव ने यह सीट खाली कर दी है। ऐसे में इस सीट पर उपचुनाव होना है।

अपर्णा महिला अधिकारों और अन्य मुद्दों पर पूरी मुखरता से बोलती हैं। उपचुनावों से पहले अपर्णा यादव को मिली जिम्मेदारी का अर्थ साफ है कि बीजेपी उन्हें समाजवादी पार्टी के खिलाफ सियासी जंग में लास्ट लाइन में रखने वाली है। मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू होने के नाते अपर्णा यादव की आवाज जनता के बीच असर रखती है। ऐसे में अपर्णा का मुखर होना समाजवादी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

अखिलेश यादव ने सपा की टिकट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में अपर्णा यादव को लखनऊ कैंट से चुनावी मैदान में उतारा था। हालांकि, अपर्णा यादव भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी से हार गई थीं।

कांग्रेस-सपा दोनों पर बीजेपी का एक साथ वार!

मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू को महिला आयोग का उपाध्यक्ष बना कर जहां एक ओर बीजेपी ने सपा पर वार किया है वहीं दूसरी ओर दूसरे तीर से कांग्रेस को भी निशाने पर लिया है। बीजेपी ने प्रियंका मौर्या को यूपी महिला आयोग के अध्यक्ष का पद सौंपा है। प्रियंका मौर्या कभी प्रियंका गांधी की करीबी हुआ करती थीं। प्रियंका मौर्या वही हैं जो 2022 के विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के कैंपेन 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' की पोस्टर गर्ल थीं। बाद में प्रियंका मौर्या बीजेपी में शामिल हो गईं। बता दें, यूपी महिला आयोग में कुल 24 सदस्य हैं।

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