सरकार और चुनाव आयोग नहीं भांप सके कोरोना के बीच पंचायत चुनाव कराने का खतरा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज, 12 मई: उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए पंचायत चुनावों में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों की मौत से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कोरोना के बीच पंचायत चुनाव कराने के कितने खतरनाक नतीजे होंगे, इसको ना तो चुनाव आयोग और सरकार भांप सकी और ना ही उच्चतम न्यायालय। अदालत ने कहा कि कोरोना की पहली लहर में गांव बचे रहे थे लेकिन आज गांवों में कोविड संक्रमण पहुंच गया है। जिसमें काफी योगदान पंचायत चुनाव का है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, सरकार पंचायत चुनाव के बाद होने वाले कोरोना के परिणामों को समझ पाने में नाकाम रही। चुनाव आयोग भी इससे बेखर रहा और उसने राज्यों में चुनावी प्रक्रिया को पूरा कराने की अनुमति दे दी। इन सब के ही चलते पहली लहर में जो गांव कोरोना से बचे रहे थे, वो अब बुरी तरह से संक्रमण की चपेट में हैं।
पंचायत चुनाव में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवार को मिले 1 करोड़ मुआवजा
यूपी में पंचायत चुनावों के दौरान ड्यूटी दे रहे कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण से मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को निर्देश दिए हैं कि इन परिवारों के लिए कम से कम एक करोड़ रुपए मुआवजा होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि चुनाव अधिकारियों की कोविड से मौत के बदले यूपी सरकार परिवारों को जो मुआवजा दे रही है वो काफी कम है और इसे कम से कम 1 करोड़ रुपए किया जाना चाहिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य के सभी अस्पतालों को ये भी निर्देश दिया है कि जो कोविड संदिग्ध मौत होती है तो उसे भी कोरोना से हुई मौत माना जाए। कोई भी अस्पताल संदिग्ध मरीजों को गैर कोविड मरीज ना समझे। अगर कोई कोरोना के कुछ लक्षण होने पर भर्ती होता है और रिपोर्ट आने से पहले उसकी मौत हो जाती है तो ऐसी मौत को कोरोना मौत माना जाए। ऐसी मौत पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत दाह संस्कार किया जाए।












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