इलाहाबाद: HC के आदेश पर अब ग्राम पंचायत में घोटालों की जांच शुरू
जनहित याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने की और याचिका निस्तारित करते हुए डीएम को आदेश दिया गया कि वो जांच की प्रक्रिया शुरू करें।
इलाहाबाद। सपा शासन में ग्राम प्रधानों ने विकास के नाम पर खूब बंदरबांट किए और आरोप भी लगे। लेकिन सत्ता की हनक के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बाबत हाईकोर्ट में भी याचिका पहुंची तो इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत में घोटालों की जांच के लिए डीएम को आदेश दिया। ताजातरीन मामला इलाहाबाद के हड़िया बढोली ग्राम पंचायत का है। यहां ग्राम पंचायत के हर कार्य में घोटाले का आरोप है। अब कोर्ट के आदेश के बाद विकास खंड के अधिकारियों कर्मचारियों की संलिप्तता को भी जांचा जाएगा।

नहीं हो रही थी सुनवाई तो पहुंचा कोर्ट
इलाहाबाद की हड़िया तहसील के बढोली ग्राम सभा के प्रधान रहे इंद्र बहादुर पाल पर घोटाले का आरोप ग्राम पंचायत के सदस्य रामसंजीवन मिश्र ने लगाया और एसडीएम से लेकर डीएम तक से गुहार लगाई। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। होती भी कैसे इंद्र बहादुर सपा के बड़े नेताओं की शरण में रहते हैं और सत्ताधारी दल के मौजूद होने पर कोई भला उनके विरुद्ध जांच कैसे करता! थक हारकर रामसंजीवन ने पिछली साल अक्टूबर में ही न्यायालय की शरण ली। जिस पर अब हाईकोर्ट ने डीएम को जांच के आदेश दिए है।
नाली से लेकर आवास तक भ्रष्टाचार
शिकायत में ग्राम विकास अधिकारी विवेक मिश्र व ग्राम प्रधान इंद्र बहादुर पर गांव के विकास के लिए मिले करोड़ों के सरकारी धन की बंदरबाट करने का आरोप है। नई सड़क, नाली, पुलिया, स्ट्रीट लाइट, कूप मरम्मत, खड़ंजा व शौचालय निर्माण में घोटाले किए गए हैं। शौचालय के लिए 900 से दो हजार रुपए और इंदिरा आवास योजना में 2 से 15 हजार रुपए घूस लेकर निर्माण कराया गया है। जबकि बिना काम कराए ही लाखों रुपए की डकार लगाई गई है।
मुख्य न्यायाधीश ने की सुनवाई
रामसंजीवन मिश्र की जनहित याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने की और याचिका निस्तारित करते हुए डीएम को आदेश दिया गया। लेकिन सवाल ये है कि ऐसे भ्रष्टाचार के लिए आखिर कोर्ट तक जाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। ये कोई नई बात भले ही न हो कि भ्रष्टाचार की शुरुआत न्यूनतम स्तर पर शुरू होती है। लेकिन आश्चर्य ये है कि इस पर नियंत्रण के लिए कभी कोई कदम नहीं उठते। लगभग हर ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर जमकर धांधली होती है। कभी-कभी शिकायत भी होती है, कभी एकाद मामले में कार्रवाई का भी जिक्र होता है। लेकिन अधिकांश मामलों में नीचे से ऊपर तक सब जुड़े होते हैं और भ्रष्टाचार की ये चेन फलती-फूलती है।












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