कोरोना के बढ़ते मामलों पर इलाहाबाद HC ने जताई चिंता, कहा- '15 दिन के लॉकडाउन से भूखा नहीं मरेगा कोई'
नई दिल्ली: देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश भी कोरोना से बुरी तरह प्रभावित है, जहां अब तक 1.97 लाख मामले सामने आ चुके हैं। राज्य में बढ़ते मामलों को लेकर मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर की। साथ ही कोर्ट ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को कोरोना से निपटने का एक्शन प्लान पेश करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही पूछा कि लापरवाह अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई सरकार ने क्यों नहीं की?
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हाईकोर्ट ने सात जिलों- लखनऊ, कानपुर नगर, प्रयागराज, वाराणसी, बरेली, गोरखपुर और झांसी में कोरोना के हालत का विस्तार से जायजा लिया। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि खाना जीवन से ज्यादा जरूरी नहीं है। अगर एक पखवाड़े (15 दिन) प्रदेश में लॉकडाउन किया गया तो भूख से किसी की मौत नहीं होगी। प्रशासन पूरी तरह से लोगों की भीड़ को रोकने में नाकाम साबित हुआ है। पुलिस वाले लगातार मास्क नहीं पहनने वालों का चालान तो काट रहे हैं, लेकिन बहुत से लोगों को अपनी जिंदगी की परवाह नहीं है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा कि आपने लापरवाह अधिकारियों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? अब कोर्ट ने मुख्य सचिव को कोरोना को रोकने का रोडमैप और कार्रवाई की रिपोर्ट 28 अगस्त को दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं एसआरएन अस्पताल में एक कोरोना संक्रमित महिला टॉयलेट के पास मृत पड़ी मिली थी। जिसकी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई। इसके अलावा अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल से खराब मास्क की बिक्री रिपोर्ट भी मांगी गई है। इलाहाबाद स्थित मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर एस.पी सिंह और सीएमओ ने अपनी रिपोर्ट पेश की है। कोर्ट ने सभी को जल्द से जल्द कोरोना को लेकर कारगर कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।












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