रेप पीड़िता को जिम्मेदार बताने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज संजय कुमार सिंह कौन हैं? आरोपी को दी जमानत
Sanjay Kumar Singh: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज संजय कुमार सिंह (Sanjay Kumar Singh) इन दिनों अपने एक अजीबोगरीब फैसले के सुर्खियों में आ गए है। दरअसल, उन्होंने हाल ही में एक रेप के आरोपी की जमानत मंजूर करते हुए कहा, 'भले ही पीड़िता का आरोप सही मान लिया जाए, तो भी इस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है कि उसने शराब के नशे में खुद ही मुसीबत मोल ली है। वह रेप के लिए खुद ही जिम्मेदार है।'
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज संजय कुमार सिंह (Sanjay Kumar Singh) दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी निश्चल चंदक को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। आइए जानते है पीड़िता को रेप के लिए जिम्मेदार बताने वाले जज संजय कुमार सिंह कौन हैं?

कौन हैं जस्टिस संजय कुमार सिंह?
इलाहाबाद हाई कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, जस्टिस संजय कुमार सिंह का जन्म 21 जनवरी, 1969 को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में हुआ था। उन्होंने 1988 में इविंग क्रिश्चियन कॉलेज, इलाहाबाद से विज्ञान में स्नातक और 1992 में दयानंद कॉलेज ऑफ लॉ, कानपुर से कानून की डिग्री प्राप्त की।
उन्होंने 1993 में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया और इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत की। अपने पिता वरिष्ठ आपराधिक वकील और पूर्व सरकारी वकील, स्वर्गीय शीतला प्रसाद सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने वकालत की शुरुआत की। उन्हें 22 नवंबर, 2018 को इलाहाबाद हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और 20 नवंबर, 2020 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता गौतमबुद्ध नगर की एक यूनिवर्सिटी में MA की छात्रा है। उसने 1 सितंबर 2024 को थाना सेक्टर 126 में रेप का केस दर्ज कराया था। छात्रा ने अपनी शिकायत में बताया था कि वह नोएडा के सेक्टर 126 स्थित एक पीजी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। 21 सितंबर 2024 को वह अपनी दोस्तों के साथ दिल्ली घूमने गई थी।
हौज खास में सभी ने पार्टी की, जहां उसकी तीन दोस्तों के साथ तीन लड़के भी आए थे। अपनी महिला मित्रों और उनके पुरुष मित्रों के साथ शराब पी। इस दौरान पीड़ित छात्रा को काफी नशा हो गया। इस दौरान आरोपी निश्चल ने उसे अपने साथ चलने को कहा। उसके बार-बार कहने पर छात्रा साथ चलने के लिए तैयार हो गई।
गुरुग्राम के एक फ्लैट में किया रेप
पीड़ित छात्रा आरोप लगाया कि उसे नोएडा के एक घर में चलने को कहा था, लेकिन आरोपी उसे हरियाणा के गुरुग्राम स्थित अपने किसी रिश्तेदार के फ्लैट पर ले गया, जहां उसके साथ दो बार रेप किया। वहीं, आरोपी के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि यह पूरी तरह से सहमति पर आधारित मामला था और महिला के बयान से यह बलात्कार का मामला नहीं बनता।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज संजय कुमार सिंह ने कहा, 'यदि पीड़िता के आरोप को सही भी मान लिया जाए, तो भी यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि उसने खुद मुसीबत को आमंत्रित किया।' मेडिकल रिपोर्ट में उसका शील भंग पाया गया था, लेकिन डॉक्टर ने यौन उत्पीड़न के बारे में कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी। इस फैसले की चौतरफा आलोचना हो रही है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, 'इलाहाबाद हाई कोर्ट को वाकई बेहतर जजों की जरूरत है। जस्टिस मिश्रा के दयनीय फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक तो लगा दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब हमारे सामने यह नया मामला है।'
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