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फूलपुर: बाहुबली अतीक का गणित फेल, अब शायद ही लौट सकें राजनीति में वापस

इलाहाबाद। फूलपुर लोकसभा सीट पर जेल से चुनाव लड़ने वाले बाहुबली नेता अतीक अहमद को अपेक्षा के अनुरूप भले ही वोट ना मिले हो और जनता ने उनको नकार दिया हो, लेकिन समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता बरकरार है। कम से कम बाहुबली को मिले वोटों की संख्या तो यही बताती है। पहले राउंड में मात्रा 88 वोट पाने वाले अतीक अहमद चौथा राउंड आते-आते बड़ी तेजी के साथ 5000 वोटों पर पहुंच गए और कांग्रेस को चौथे स्थान पर धकेल दिया। अतीक अहमद हर राउंड में वोटों की संख्या बढ़ाते रहें और जब 17 राउंड की गिनती पूरी हुई तो उनके वोटों की संख्या 25000 के लगभग पहुंच गई। लेकिन फिर भी अतीक का वर्चस्व काम नहीं आ सका।

उतने मिले वोट जितने था सपा-भाजपा का डिफरेंस

उतने मिले वोट जितने था सपा-भाजपा का डिफरेंस

यहां एक दिलचस्प बात यह रही कि अतीक अहमद को लगभग 17 राउंड तक उतने वोट मिले हैं जितने कि भाजपा, सपा से पीछे रही। यानी बीजेपी जितने वोटो से सपा से पिछड़ रही थी उतने वोट अतीक को मिले थे। अगर अतीक अहमद के वोटों को बीजेपी की वोटों से जोड़ा जाए तो लड़ाई लगभग बराबर की हो जाती, लेकिन अतीक अहमद लगातार अपने वोटों की संख्या बढ़ा रहे हैं। यह पूरी संभावना और गणित ही है कि अतीक अहमद को मिलने वाले सारे वोट लगभग सपा के हैं। यानी बीजेपी को और तगड़ा नुकसान होता और वह वोटों की संख्या में और पीछे चली जाती अगर अतीक अहमद फाइट न करते।

लड़ाई से बाहर हुए अतीक

लड़ाई से बाहर हुए अतीक

मौजूदा समय में अतीक अहमद लगातार वोटों की संख्या बढ़ाते चले जा रहे हैं, जिससे BJP अभी एक तरफा लड़ाई से बाहर नहीं हो सकी है। यह तो पहले से ही तय था कि अतीक अहमद सपा को नुकसान पहुंचाएंगे और कहीं न कहीं उनके फाइट करने से बीजेपी को फायदा होगा, लेकिन मौजूदा स्थिति में तो सपा सबसे टॉप पर चल रही है और उसे किसी तरह का नुकसान होता नहीं दिख रहा है। सारा नुकसान बीजेपी को है और अतीक अहमद भी उसी नुकसान का एक हिस्सा मात्र बन गए हैं।

अब वापसी मुश्किल

अब वापसी मुश्किल

फिलहाल बाहुबली अतीक अहमद के राजनीतिक कैरियर में यह चुनाव अब एक ऐसा चुनाव साबित होगा जहां से इनका राजनीतिक पटल पर लौट कर आना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल जेल में बंद अतीक अहमद को मिल रहे वोटों की जानकारी जब जेल में मिलेगी तो वह इस बात से जरूर खुश होंगे कि उनके समर्थकों ने उनका साथ नहीं छोड़ा है, भले ही उनकी छवि के कारण जनता उन्हें नकार चुकी है। सपा से अपने रिश्ते टूटने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं अतीक अहमद को पिछले विधानसभा चुनाव में ही उसी वक्त झटका लग गया था जब इन्हें कानपुर कैंट से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद अखिलेश यादव ने इनका टिकट काट दिया था। माना जा रहा था कि तभी से अतीक व सपा के बीच दूरियां बढ़ी थी और अतीक के जेल चले जाने के बाद सपा की ओर से कोई मदद न मिलने पर यह तल्खी और बढ़ गई। जिसका नतीजा रहा कि आखरी समय में सपा से मुकाबले के लिए खुद अतीक अहमद निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर फूलपुर उपचुनाव में उतर आए थे।

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