'रेप पर फांसी की सजा' के बीच बलात्कार के आरोपी की मौत, लोगों ने काटा बवाल
इलाहाबाद। इलाहाबाद की नैनी सेंट्रल जेल में एक दुष्कर्म के आरोपित बंदी की रहस्यमय मौत हो गई। युवक इलाहाबाद के खीरी खूंटा गांव का रहने वाला था और 18 अप्रैल को ही गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। आश्चर्यजनक तौर पर बंदी की मौत के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सूचना दी। परिजनों ने शव देखते ही हंगामा शुरू कर दिया और शव मिलते के बाद परिजन लापरवाही व साजिश का आरोप लगाकर जेल प्रशासन पर भड़क गए। सैकड़ों ग्रामीणों के साथ परिजन सड़क पर उतर आए। लगभग पांच घंटे तक परिजनों ने सड़क पर हंगामा काटा और चक्काजाम करते हुए यातायात ठप कर दिया। देर रात पुलिस के आलाधिकारियों ने खुद जांच करने का भरोसा दिलाकर किसी तरह सभी को सड़क से हटाया तो आवागमन सुचारू हो सका।

क्या था मामला
खीरी थाने में दर्ज मुकदमे के अनुसार बबलू (45) पुत्र गिरधारी लाल केसरवानी दुष्कर्म के आरोप में 18 अप्रैल को नैनी जेल भेजा गया था। उसे जेल के सर्किल चार में रखा गया था। बताया जाता है कि शनिवार दोपहर अचानक उल्टी दस्त के बाद उसका तबीयत बिगड़ी थी और शरीर काला पड़ गया था। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया और रविवार को शव परिजन को सौंपा गया।

बैकफुट पर रही फोर्स
रविवार की दोपहर करीब तीन बजे पोस्टमार्टम के बाद लाश परिजनों को मिली और पुलिस ने माहौल बिगड़ने की आशंका के तहत अलर्ट भी जारी किया, लेकिन आक्रोशित परिजनों ने खीरी-कोहडार मार्ग पर शव रख कर चक्काजाम कर दिया।
मौके पर खीरी पुलिस, करछना, मांडा थाने की फोर्स, अर्धसैनिक की एक गाड़ी, सीओ करछना, सीओ मेजा पहुंचे, लेकिन भारी भीड़ के आगे फोर्स बैकफुट पर रही और पांच घंटे तक आवागमन बाधित रहा। परिजन दस लाख मुआवजा के साथ ही जेल पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे ।

पुलिस पर आरोप
देर रात एसपी समेत तमाम आलाधिकारी मौके पर पहुंचे हैं तो परिजनों ने स्थानीय थाने की पुलिस पर ढेरों आरोप लगाकर जबरन जेल भेजने की कहानी बताई। मृतक की पत्नी सुषमा केसरवानी ने बताया कि खीरी थाना अध्यक्ष 12 बजे रात बिना किसी कारण के घर में घुसे थे और ₹50000 की मांग की थी । पैसा ना देने पर ही उन्होंने बबलू को रेप केस में फंसाकर गिरफ्तार किया था और नैनी जेल भेज दिया था। अब एक साजिश के तहत ही बबलू की हत्या कर दी गई और उसका शव तक परिजनों को पोस्टमार्टम के पहले नहीं देखने दिया गया। आरोपों को सुनने के बाद एसपी ने खुद जांच करने का आश्वासन परिजनों को दिया तो ग्रामीण शांत हुए और सड़क से शव हटाते हुए चक्का जाम समाप्त किया।












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