Mulayam Singh Yadav की 'जननायक' वाली इमेज भुनाने में अखिलेश यादव से हुई चूक ?

Uttar Pradesh के पूर्व सीएम और Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) अब इस दुनिया में नहीं रहे। दस अक्टूबर को गुरुग्राम के मेदांता में उनका निधन हो गया था। उनके निधन के बाद बेटे अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) उनका पार्थिव शरीर लेकर लखनऊ आने की बजाए सीधे अपने पैतृक गांव सैफई चले गए थे। वहां उनका अंतिम संस्कार किया गया जिसमें देश की जानी मानी राजनीतिक हस्तियां जुटी थीं। अखिलेश की इन सारी कवायदों के बीच राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश यादव अपने पिता मुलामय के एक जननेता की इमेज को कार्यकर्ताओं के बीच ले जाने में नाकाम रहे। इसको लेकर उनसे कईं भूलें हुईं जिसकी आलोचना उनकी पार्टी के नेता भी कर रहे हैं।

मुलायम के जननेता की इमेज को नहीं भुना पाए

मुलायम के जननेता की इमेज को नहीं भुना पाए

मुलायम सिंह यादव यूपी ही नहीं देश के एक ऐसे नेता थे जो पक्ष हो या विपक्ष सबके साथ तालमेल बनाकर चले। मुलायम एक जननायक तो थी ही उनके भीतर लोगों को जोड़़ने की अद्भभुत कला थी। सपा के कुछ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव अपने पिता के पार्थिव शरीर को लखनऊ क्यों नहीं लाए ये बड़ा सवाल है। लखनऊ लाते तो यहां पूर्वांचल के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके अंतिम दर्शन का मौका मिल सकता था जो सैफई नहीं जा सकते थे। हालांकि यह उनके परिवार का मामला था और इसको लेकर अंतिम फैसला भी उन्हें ही करना था।

निधन के बाद सीधे सैफई जाना अखिलेश की पहली चूक

निधन के बाद सीधे सैफई जाना अखिलेश की पहली चूक

अखिलेश यादव पिता मुलायम के पार्थिव शरीर को लेकर सीधे सैफई चले गए थे। राजनीतिक जानकारों की माने तो यह अखिलेश की बड़ी चूक थी। अखिलेश को अपने पिता को लखनऊ लाना चाहिए था। मुलायम एक राजनेता के साथ ही जननेता थे और जनता के बीच उनके लाखों चाहने वाले हैं। सैफई चूंकि मुलायम का घर था तो उन्हें जाना ही था लेकिन यदि अखिलेश उनके पार्थिव शरीर को लखनऊ लाते तो वो हजारों कार्यकर्ताओं को वह नेताजी के निधन के बाद पैदा हुई सहानुभूति से जोड़ सकते थे।

मुलायम के पाथिर्व शरीर को पार्टी कार्यालय न लाना भूल

मुलायम के पाथिर्व शरीर को पार्टी कार्यालय न लाना भूल

समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव के पार्थिव शरीर को पार्टी कार्यालय पर लाया जाना चाहिए था। चूंकि मुलायम सिंह यादव ने सपा की स्थापना की थी इसको देखते हुए पार्टी कार्यालय में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाना चाहिए था। यदि उनके शव को पार्टी कार्यालय पर रखा गया होता तो यहां विधानसभा में भी उनके शव को ले जाया जाता। जिस तरह से बीजेपी ने कल्याण सिंह के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को विधानसभा में अंतिम दर्शनों के लिए रखा था उसी तरह अखिलेश भी पिता को वो सम्मान दे सकते थे जिसके वो पूर्व सीएम होने के नाते हकदार थे। अखिलेश की इस चूक के बारे में वरिष्ठ पत्रकार रतिभान त्रिपाठी ने कहा कि अखिलेश यादव से निसंदेह चूक हुई है। मुलायम सिंह एक जननेता थे। जिस तरह से अखिलेश उनकी अस्थियों को चार्टड विमान से लेकर घूम रहे हैं इसकी बजाए उन्हें सड़क मार्ग का चयन करना चाहिए था। उनके पार्थिव शरीर को पार्टी कार्यालय न लाना और विधानसभा में अंतिम दर्शन के लिए न रखवाना भी एक बड़ी राजनीतिक चूक है।

मुलायम की अस्थियों को चार्टड से हरिद्वार और प्रयाग ले गए

मुलायम की अस्थियों को चार्टड से हरिद्वार और प्रयाग ले गए

पूर्व सीएम अखिलेश यादव की दूसरी सबसे बड़ी चूक तब हुई जब वो अंतिम संस्कार के बाद मुलायम की अस्थियों को लेकर परिवार के साथ हरिद्वार और फिर प्रयागराज गए। इसके पीछे राजनतीक विशेषज्ञों का कहना है कि अखिलेश को सैफई से हरिद्वार तक का सफर सड़क मार्ग से तय करना चाहिए था। इससे अखिलेश को अपने कार्यकर्ताओं को मुलायम सिंह के निधन के बाद पैदा हुई सहनुभूति से जोड़ने का मौका मिलता। हरिद्वार जाते समय उन्हें कई जिलों से होकर गुजरना पड़ता वहां के आम कार्यकर्ता भी अपने नेता को आसानी से श्रद्धालंजि दे सकते थे। इसी तरह प्रयागराज भी वो सड़क मार्ग से जाते तो पूर्वांचल के कार्यकर्ताओं को भी जोड़ने का मौका मिलता।

पूरे प्रदेश में सपा करेगी श्रद्धाजलि सभा का आयोजन

पूरे प्रदेश में सपा करेगी श्रद्धाजलि सभा का आयोजन

हालांकि समाजवादी पार्टी (सपा) पूरे उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने वाली है। इस संबंध में एसपी ने पूरे प्रदेश के पदाधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। 21 अक्टूबर को पूरे यूपी में श्रद्धांजलि सभा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। सपा संरक्षक और पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देने के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का लंबी बीमारी के बाद 82 वर्ष की आयु में गुरुग्राम के एक अस्पताल में निधन हो गया था।

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