अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट 'लायन सफारी' में बढ़ रहा है जानवरों की TB से मौत का सिलसिला

टीबी की बीमारी की दवाएं करीब 6 महीने तक नियमित चलाई जाती है, दवाओं में गैप हो जाने के कारण दवा का असर नहीं हो पाता है।

इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा में सपा मुखिया और प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट लायन सफारी में मौत का सिलसिला थमने सिलसिला नहीं रुक रहा है। इटावा की लाइन सफारी में अब भालुओं ने खाना-पीना छोड़ दिया है। भालुओं को खाना खिलाना प्रशासन के लिए चुनौती का सबब बना हुआ है। भालू शंकर की मौत के बाद अभी भी दो भालू टीबी की चपेट में है। सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि टीबी की बीमारी की दवा खाने के साथ घोलकर दी जाती है, जिसे कभी भालू खाते हैं तो कभी नहीं। यही वजह भालू शंकर की मौत की भी थी, शंकर खाने के साथ दी गई दवाई को नहीं खा रहा था। जिससे उसकी टीबी की बीमारी का संक्रमण लगातार बढ़ता ही चला गया। टीबी की बीमारी की दवाएं करीब 6 महीने तक नियमित चलाई जाती है, दवाओं में गैप हो जाने के कारण दवा का असर नहीं हो पाता है। हालांकि दवाई को खिलाने के लिए भालू के खाने में गुड़ मिलाकर दिया जा रहा है। लेकिन ये अभी तक कारगर साबित नहीं हो पाया।

शुरू से ही जूझ रहे हैं टीबी की बीमारी से भालू

शुरू से ही जूझ रहे हैं टीबी की बीमारी से भालू

भालुओं को जब इटावा सफारी पार्क में लाया गया था, तभी से ये टीबी की बीमारी से जूझ रहे हैं। हांलाकि बीच-बीच में सफारी के डाक्टरों के मुताबिक इनके ठीक होने की खबरें आईं थी। जिस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। वहीं अचानक शंकर भालू की मौत के बाद भालुओं के संरक्षण को लेकर अब सवाल खड़ा हो गया है। सवाल ये है कि जब लगातार भालू संक्रमण से ग्रसित है तो फिर इन पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। हालांकि सफारी प्रशासन का ये कहना है कि इनके इलाज के लिए आगरा, मथुरा और आइवीआरआइ के विशेषज्ञ लगातार निगरानी रख रहे थे।

भालुओं में टीबी ने बढ़ाई चिंता

भालुओं में टीबी ने बढ़ाई चिंता

इनके ब्लड सेंपल बराबर आइवीआरआइ बरेली को भेजे जा रहे हैं। हालांकि कुछ दिन पहले भालू शंकर और भोलू में टीबी का संक्रमण पाए जाने पर इनका कोर्स पूरा किया गया था। दिसंबर के मध्य में आइवीआरआइ बरेली से जो रिपोर्ट सफारी प्रशासन को प्राप्त हुई थी, उसमें शंकर और भोलू टीबी से मुक्त पाए गए थे। नियम ये है कि जो भी भालू टीबी से संक्रमित हो जाता है, उसको अन्य भालुओं से अलग कर दिया जाता है। सफारी में डॉक्टर गौरव श्रीवास्तव और डॉ. राजेंद्र वर्मा इन भालुओं की देखभाल कर रहे हैं।

सफारी में अब तक हो चुकी हैं एक दर्जन मौतें

सफारी में अब तक हो चुकी हैं एक दर्जन मौतें

इटावा सफारी पार्क में वर्ष 2014 से जो मौतों का सिलसिला शुरू हुआ था। उनमें अब तक एक दर्जन वन्य जीवों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन शेरनी, दो शेर, पांच शावक, एक लैपर्ड और एक भालू शामिल है। इनमें गुजरात से लाई गई शेरनी तपस्या की तो मौत 15 दिन बाद ही हो गई थी। 20 अक्टूबर 2014 को शेरनी लक्ष्मी की मौत सबसे पहले हुई थी।

सर्दी बढ़ी तो चालू किए गए हीटर

सर्दी बढ़ी तो चालू किए गए हीटर

सफारी पार्क में सर्दी का मौसम देखते हुए जानवरों के बाड़े में रूम हीटर लगा दिए गए हैं। बाड़े का तापमान सामान्य रखने के लिए क्रम से रूम हीटरों को चलाया जाता है। सफारी के निदेशक पीपी सिंह का कहना है कि कीपरों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि बाड़े की खिड़कियों को पूरी तरह बंद कर दें। रात के समय दरवाजों को एयर प्रूफ किया जाता है। जिससे शेर और भालू सर्द हवाओं की चपेट में ना आएं। जानवरों की खुराक को भी बढ़ाया गया है ताकि उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।

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