'देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड की कोई जरूरत नहीं', मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली का बयान
Maulana Firangi Mahali on UCC: विधि आयोग ने हाल ही में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड पर देश के लोगों से उनके सुझाव आमंत्रित किए हैं, जिसके बाद से ही पूरे देश में इसे लेकर बहस का बाजार गर्म है।
इस बीच गुरुवार (7 जुलाई) को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB)ने एक लिंक जारी कर सबसे राय देने की अपील की है, जिस पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली का बयान आया है।

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि यूसीसी के मामले AIMPLB ने एक लिंक जारी कर सबसे राय देने की अपील की है, जिससे लॉ कमीशन तक आवाज पहुंचे कि कितनी बड़ी तादाद में लोग इसके खिलाफ हैं।
उन्होंने कहा कि अगर UCC लागू होता है तो मुस्लिम पर्सनल कानून पर अमल करने से रोका जा सकता है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ मुस्लिम ही इसके खिलाफ़ हैं, बड़ी तादाद में कई अन्य लोग भी इसके खिलाफ हैं।
अपने बयान में मौलानाफिरंगी महली ने कहा कि विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर आम जनता और संगठनों का दृष्टिकोण पूछा है। विधि आयोग को यह जानना चाहिए और न केवल कुछ मुसलमान बल्कि पूरा मुस्लिम समुदाय और अन्य समुदाय नहीं चाहते कि यूसीसी लागू किया जाए।
उन्होंने आगे कहा कि प्रतिक्रिया यह है कि मुस्लिम समुदाय ने चेतावनी दी है कि इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए और हमारी धार्मिक स्वतंत्रता बरकरार रखी जानी चाहिए और हमें अपने दैनिक जीवन में मुस्लिम व्यक्तिगत कानूनों का पालन करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
मौलाना ने कहा कि चूंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ हमारे शरिया का हिस्सा हैं और शरिया कुरान हदीस पर आधारित है, इसलिए हम चाहते हैं कि प्रत्येक मुस्लिम को हमारे दैनिक जीवन में उनके पर्सनल लॉ का पालन करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि विधि आयोग को भेजे गए मसौदे में, हमने एक बात साबित करने की कोशिश की है कि संविधान ने इस देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने और प्रचार करने के सभी अधिकार दिए हैं। हमें इसका पालन करने की अनुमति दी जानी चाहिए और मुस्लिम पर्सनल लॉ पर कोई सवालिया निशान नहीं होना चाहिए।












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