योगी की शपथ को "ग्रैंड इवेंट" बनाने में जुटा प्रशासनिक अमला, जानिए क्यों बन रही 200 VVIP गेस्ट की लिस्ट
लखनऊ, 21 मार्च: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव में प्रचंड विजय हासिल की है। सीएम योगी के शपथ ग्रहण समारोह में 200 VVIP के बुलाने की तैयारी हो रही है। इसको लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। भारत रत्न और देश के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजेपयी के नाम से बने अटल बिहारी वाजेपयी स्टेडियम में योगी दूसरी बार शपथ लेंगे। इस शपथ ग्रहण में शामिल होने वालों की सूची तैयार की जा रही है। आधिकारिक सूत्रों की माने तो शपथ ग्रहण को ग्रेंड इवेंट बनाने के लिए लगभग 200 VVIP अतिथियों की लिस्ट तैयार की जा रही है जिसमें देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, संघ से जुड़े कुछ वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल किए गए हैं। शपथ ग्रहण में आने वाले इन 200 मेहमानों की अगवानी को खास बनाने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है।

शपथ ग्रहण में 200 VVIP को शामिल करने की तैयारी
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह सबसे अधिक संभावना इकाना स्टेडियम में होगा, जिसमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। भाजपा इस कार्यक्रम के लिए एक अतिथि सूची तैयार कर रही है, जिसमें विभिन्न सरकारी पहलों के लाभार्थी शामिल होंगे, जिन्हें 'लाभार्थी' के नाम से जाना जाता है, जिन्होंने पार्टी के पुन: चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्टेडियम में करीब 200 वीवीआईपी को भी ठहराया जाएगा। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह और अन्य, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष सहित कई महत्वपूर्ण हस्तियों को आमंत्रित किया जाएगा।

योगी की शपथ में आ सकते हैं संघ के कई बड़े नेता
केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व के अलावा, कई अन्य केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी आमंत्रित लोगों में शामिल हैं। सूत्रों की माने तो शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित लोगों की सूची में कई विपक्षी नेताओं ने भी अपनी जगह बनाई है। सूत्रों ने कहा, "कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती को विपक्षी दलों से आमंत्रित किए जाने की संभावना है।

प्रचंड जीत के बाद दूसरी बार बनेगी बीजेपी की सरकार
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके सहयोगियों ने उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल की, जिसमें सात चरणों में चुनाव हुए, पहला 10 फरवरी को और आखिरी 7 मार्च को। भाजपा, जिसने 2017 के चुनावों में अपने दम पर 312 सीटें और सहयोगियों के साथ कुल 325 सीटें जीतीं थीं। 403 सदस्यीय विधानसभा में यह आंकड़ा घटकर 255 (सहयोगियों के साथ 273) रह गई, फिर भी, पार्टी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 202 सीटों के बहुमत के स्तर से ऊपर बना हुआ है।

15 वर्षों में पहली बार कोई विधायक बनेगा CM
2017 में जब योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो वह पांच बार लोकसभा सांसद रहे। बाद में वह विधान परिषद, राज्य विधानमंडल के ऊपरी सदन के लिए चुने गए। उनके पूर्ववर्ती, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, एक एमएलसी (विधान परिषद के सदस्य) थे, जब वे मुख्यमंत्री थे। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती भी यही थीं। 15 वर्षों में यह पहली बार है कि उत्तर प्रदेश में एक विधायक (विधान सभा सदस्य) मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव ने अपना पहला राज्य आम चुनाव लड़ा। चुनावी लड़ाई सीधे तौर पर सत्तारूढ़ भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच थी। 2017 में, योगी आदित्यनाथ विधायिका के ऊपरी सदन से आने वाले केवल चौथे यूपी के मुख्यमंत्री बने। दरअसल, 1999 से पहले उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में कोई एमएलसी नहीं था। भाजपा के राम प्रकाश गुप्ता 1999 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पहले एमएलसी बने। वह एक साल भी कार्यालय में नहीं रहे।












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