यूपी: यह मुस्लिम परिवार तीन पीढ़ियों से बना रहा है रावण के पुतले, रामलीला में इनका योगदान है अहम
वाराणसी। गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल बनारस शहर कई वर्षों से पेश करता आ रहा है। बनारस में रहने वाले मोहम्मद शमशाद का परिवार जिन्हें नवासे के रूप में पीएम मोदी के पसंदीदा जगह डीरेका के रामलीला के दशहरे में बनाए जाने वाले रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले बनाने का काम मिला है। इतिहास में पहली बार पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में दशहरा के दिन 10 सिर वाले दशानन रावण के साथ कुम्भकर्ण और मेघनाथ को लीला के अनुरूप भगवान राम के अग्निबाण से जलाया जाएगा। इसे बनाने वाले शमशाद जहां बनारस के ज़्यादातर रामलीलाओं में दशहरे के रावण बनाने की बात करते है। वहीं इनका पैगाम भी है कि ऐसे काम कर इन्हें सुकून मिलता है। शमशाद बताते है कि पहली बार इनके नाना ने डीरेका का रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ बनाया था। जिसके बाद इनके पिता और अब इनका पूरा परिवार मिलकर दशहरे के रावण बनाता है।

मंहगाई की मार भी पड़ी इस बार के दशहरे पर
दरअसल इसके पहले डीएलडब्लू में हर साल विजया दशमी के दिन रावण दहन का कार्यक्रम होता है। जिस में वाराणसी सहित आसपास के जिलों से भी लोग रावण दहन का कार्यक्रम देखने आते हैं। जिससे इस दिन लाखों की संख्या में लोगों की भीड़ होती है। रावण दहन में दस मुख वाले रावण का पुतला 75 फीट ऊंचा होगा। वहीं कुम्भकर्ण की ऊंचाई 65 फिट होगी। इसके अलावा मेघनाथ का पुतला 60 फिट का बनाया जा रहा है।

शमशाद बताते हैं कि इस बार रावण की लंका भी हर साल से अलग होगी। वहीं मंहगाई की मार रावण बनाने वाले शमशाद को भी झेलने पड़ रही है। शमशाद ने बताया कि हर साल वे ही विजया दशमी के रावण का पुतला बनाते हैं। जिसके लिए टेंडर पास करना होता है। हालांकि टेंडर का अमाउंट तो आज भी वही पुराना है। लेकिन मंहगाई में इसे बनाने वाले समान भी महंगे हो गए हैं। ऊपर से इस बार एक मुख नहीं बल्कि 10 मुख वाले रावण को बनाने में लागत ज्यादा लगी है। इसे सिर्फ काशी की पहचान के लिए बनाया गया है, इससे कुछ भी आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा।












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