सहारनपुर हिंसा : 17 दिन बाद जिंदगी की जंग हार गया प्रदीप
शब्बीरपुर प्रकरण को लेकर हिंसा से उपजे बवाल को ठंडा करने के प्रशासन के प्रयासों को बार-बार पलिता लग रहा है। 17 दिन पूर्व अज्ञात हमलावरों की गोली का शिकार बने एक युवक प्रदीप ने आज दम तोड़ दिया।
सहारनपुर। शब्बीरपुर प्रकरण को लेकर हिंसा से उपजे बवाल को ठंडा करने के प्रशासन के प्रयासों को बार-बार पलीता लग रहा है। जनता रोड पर 17 दिन पूर्व अज्ञात हमलावरों की गोली का शिकार बने एक युवक प्रदीप ने पीजीआई चंडीगढ़ में आज दम तोड़ दिया। युवक की मौत के बाद एक बार फिर जनपद का माहौल गर्म हो गया है और अधिकारियों को पसीने आने शुरू हो गये है।

शब्बीरपुर गांव से शुरू हुआ था बवाल
बता दें कि 5 मई को शब्बीरपुर गांव में महाराणा प्रताप जयंती पर झांकी निकालते समय राजपूत बिरादरी के लोग विरोध करने पर दलितों से भिड़ गये थे इसमें राजपूत बिरादरी के एक युवक की जान चली गई थी। खूनी हिंसा का शुरू हुआ यह खेल 9 मई और उसके बाद 23 मई को भी खेला गया जब बसपा सुप्रीमो मायावती ने गांव शब्बीरपुर का दौरा किया था। मायावती की रैली से लौटते समय देर शाम दलितों पर हमले हुए थे और उन्हें खून से सराबोर कर दिया था। इसका आरोप राजपूत बिरादरी के हमलावरों पर लगा था। इसमें पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था।

बाइक पर राणा लिखा देख किया था हमला
ठीक इसके अगले दिन 24 मई की सुबह थाना बडगांव क्षेत्र में ही प्रजापति बिरादरी के गांव मोरा निवासी यशपाल और उनके यहां फतेहपुर गंदेवड़ा से आये रिश्तेदार नितिन को अज्ञात हमलावरों ने हमला कर लहूलुहान कर दिया था। इसमें यशपाल को धारदार हथियारों से काटा गया था जबकि नितिन को गोली मारी गई थी। दोनों को जिला अस्पताल से हॉयर सेंटर रैफर किया गया था। यही से जनपद में गोरिल्ला युद्ध की आशंका बन गई थी और इसी की परिणति रही थी कि थाना जनकपुरी क्षेत्र में कुछ देर बाद ही जनता रोड़ पर गांव आसवाली निवासी प्रदीप (35) पुत्र जसबीर को गोली मार दी गई थी। उसकी बाइक पर राणा लिखा देख हमलावरों ने उसे निशाना बनाया था। जिससे हमलावरों के दलित बिरादरी के होने के कयास भी लगाये गए थे।

चंड़ीगढ़ में चल रहा था इलाज
अज्ञात हमलावरों के खिलाफ घायल के पिता ने जानलेवा हमले की रिपोर्ट थाना जनकपुरी में दर्ज कराई थी और प्रदीप को भी जिला अस्पताल से हॉयर सेंटर रैफर किए जाने पर परिजन पीजीआई चंडीगढ लेते गये थे। जहां उसी रात ऑपरेशन कर उसके शरीर से गोली तो निकाल दी गई थी, मगर तब से ही प्रदीप वैन्टीलेटर पर था और जिंदगी एवं मौत के बीच जूझ रहा था। शनिवार तड़के प्रदीप जिंदगी की जंग हार गया। उसकी मौत होते ही प्रशासन के जनपद में शांति कायम करने के प्रयासो को एक बार फिर पलीता लगने के आसार बनते नजर आ रहे है।

14 साल की बेटी का रोकर हुआ बुरा हाल
जैसे ही प्रदीप की मौत की खबर उसके घर पहुंची तो परिजनों में हाहाकार मच गया। रिश्तेदार एवं ग्रामीण भी उसके घर पर जुटने शुरू हो गये और पीड़ित परिवार को सांत्वना दिए जाने का क्रम शुरू हो गया। उसके वृद्ध पिता व अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। उसकी पत्नी सविता पति की मौत की खबर सुनते ही अपनी सुध-बुध खो बैठी थी वहीं मृतक की 14 वर्षीय आयुषि एवं 10 वर्षीय पुत्र आर्यन समझ नहीं पा रहे थे कि उनके सर से उनके पिता का साया क्यों छींन लिया गया। माँ व परिवार के लोगों की हालत देखकर दोनों बच्चों के आंसु भी थम नहीं पा रहे थे।

डीएम, एसएसपी भी गांव पहुंचे
शुक्रवार की देर रात प्रदीप की पीजीआई में मौत हो जाने की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन सजग हो गया, रात में ही गांव में पैरामिलिट्री फोर्स भेज दी गई, साथ ही हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में भी रात्रि पुलिस गश्त बढ़ा दी गई। शनिवार की सुबह डीएम प्रमोद पांडे, एसएसपी बबलू कुमार, तहसीलदार सुधीर सिंह भी गांव में पहुंचे और पीड़ित परिजनों से मिलकर कार्रवाई का अश्वासन दिया। मृतक के पिता जसबीर ने भरे गले से अधिकारियों से मांग की उनके बेटे के हत्यारों को जरूर सजा दिलाये और सही हत्यारें ही पकड़े जाये। पूर्व विधायक महावीर सिंह राणा पहले से ही मृतक के घर पर मौजूद थे, उन्होंने भी पीड़ित परिजनों को भी ढ़ांढस बंधाया। कई थानो की फोर्स भी तैनात कर दी गई थी। अधिकारियों ने ये भी आश्वासन दिया कि नियमानुसार मुआवजा के लिए शासन से भी वार्ता की जायेगी।

संगीनों की साये में हुआ अंतिम संस्कार
देर शाम जैसे ही प्रदीप का शव गांव में पहुंचा तो वहां पहले से ही रिश्तेदारों और ग्रामीणों का तांता लगा हुआ था। शव के घर पर पहुंचते ही परिजनों में एक बार फिर चित्कार मच गया। वही पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट था। गमगीन माहौल में गांव में ही भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में प्रदीप के शव का अन्तिम संस्कार कर दिया गया।

दोबारा हिंसी नहीं होने दी जायेगी
एडीजी लॉ एन ऑर्डर शनिवार को सहारनपुर पहुंचे थे। उन्होंने सहारनपुर में जातीय विद्वेष फैलाने के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए है। भीम आर्मी पर तो पुलिसिया कार्रवाई लगातार चल रही है अब पुलिस का ध्यान सांसद खेमे की तरफ भी है। सूत्र बताते है कि एडीजी लॉ एन आॅर्डर का दौरा भी खासतौर पर इसे ध्यान में रखते हुए हुआ है। सूत्रों के मुताबिक आईटीसी गेस्ट हाऊस में अधिकारियों से रूबरू होते हुए एडीजी लॉ एन ऑर्डर ने साफ किया कि अब सहारनपुर में जातीय हिंसा की पुनरावृत्ति न होने पाए, इसके लिए चाहे जितनी भी सख्ती बरतनी पड़े, बरते। आवश्यक दिशा निर्देश देने के बाद कुछ समय गेस्ट हाऊस में रूक एडीजी लॉ एन ऑर्डर वापिस लौट गए। इस दौरान कमीश्नर दीपक अग्रवाल, डीएम प्रमोद पांडे, डीआईजी के.एस.ईमैनुअल, सहारनपुर के एसएसपी बबलू कुमार के अलावा मुजफ्फरनगर के एसएसपी अनंत देव व शामली एसएसपी अजयपाल भी मौजूद रहे।












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