Ujjain News: महाकाल भक्तों के लिए खुशखबरी, इस तरह कर सकेंगे भगवान का जलाभिषेक
उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर के कार्तिकय मण्डप की ओर से आने वाले भक्त श्री महाकालेश्वर भगवान को जल अर्पित कर सकेंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान को जल अर्पित करने हेतु श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप व कार्तिकेय मंडप में व्यवस्था की गई है।
जिसमें श्रद्धालु उक्त स्थान पर लगे जल पात्र में जल अर्पित करेगे। श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किया जल पाइप के माध्यम से मंदिर के गर्भगृह में लगे अभिषेक पात्र के माध्यम से भगवान श्री महाकालेश्वर को समर्पित होगा।

वैशाख व ज्येष्ठ मास में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए मिट्टी के कलश (गलन्तिका) से ठंडे पानी की जलधारा प्रवाहित की जाती है। अब श्री महाकालेश्वर भगवान के भक्तों द्वारा भी उनका जलाभिषेक हो पायेगा।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार को परंपरानुसार वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से 22 जून (ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा) तक श्री महाकालेश्वर भगवान जी पर 11 मिट्टी के कलशों से सतत जलधारा हेतु गलंतिका बांधी गई।
अल सुबह भस्म आरती के बाद कलशों में जल भरकर प्रतीकात्मक रूप से नदियों के नाम गंगा, सिंधु, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, शरयु, क्षिप्रा, गण्डकी आदि नामो को अंकित कर बांधा गया। भगवान श्री महाकालेश्वर पर सतत शीतल जलधारा प्रतिदिन प्रात: भस्मार्ती के पश्चात से शाम पूजन तक रहेगी।
ठंड के दिनों में भी भगवान को गर्म जल से स्नान कराए जाने की परंपरा निभाई जाती है। उसी तरह भीषण गर्मी से राहत के लिए विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल को ठंडे जल से शीतलता प्रदान की जाती है। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग पर नियमित चांदी के कलश की जलधारा के अलावा 11 अतिरिक्त मिट्टी की मटकियों से जलधाराएं प्रवाहित की जाएंगी, जो ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तक करीब दो माह बंधी रहेगी।
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