Jammu Kashmir Encounter: राजौरी में 3 दिन भी मुठभेड़, गंभीर मुगलान के जंगलों में 2-3 पाकिस्तानी आतंकी घिरे

Rajouri Encounter: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के गंभीर मुगलान (गंभीर मुगला) क्षेत्र में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ तीसरे दिन भी जारी है। मोरी माल-डोरिमल-गंभीर मुगलान के घने जंगलों में 2 से 3 आतंकियों को घेर लिया गया है। सोमवार (25 मई) को इलाके में गोलीबारी और धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। सुरक्षा बलों ने घेराबंदी और तलाशी अभियान को और मजबूत कर दिया है। अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया है, ताकि कोई आतंकी घेरा तोड़कर भाग न सके।

यह अभियान 'ऑपरेशन शेरुवाली' (Operation Sherawali) के नाम से जाना जा रहा है। शनिवार 23 मई 2026 को खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू हुए इस अभियान में सुरक्षा बलों ने आतंकियों से संपर्क स्थापित किया और गोलीबारी शुरू हो गई। आइए विस्तार से जानते हैं अब तक क्या क्या हुआ?

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Gumbhir Muglan Encounter Operation: कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन

23 मई की सुबह करीब 11:30 बजे डोरिमल-गंभीर मुगलान क्षेत्र में संयुक्त टीम (भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF) ने तलाशी अभियान चलाया। खुफिया एजेंसियों को 2-3 आतंकियों की गतिविधि की सूचना मिली थी। संपर्क होते ही आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की और तुरंत पूरे इलाके को घेर लिया।

24 मई को तलाशी अभियान तेज किया गया। 25 मई को स्थिति और गंभीर हो गई। घने जंगलों, पहाड़ी इलाके और गुफाओं के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण है। हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद से निगरानी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, आतंकी भारी हथियारों से लैस हैं और जंगल का फायदा उठाकर छिपे हुए हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में 2-3 आतंकियों का जिक्र है, जिन्हें पाकिस्तानी मूल का बताया जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी किसी की मौत या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

Rajouri-Poonch Belt: आतंक का पुराना अड्डा

राजौरी जिला लोकेशन और भूगोल के कारण आतंकियों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। यह पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है। घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ और गुफाएं आतंकियों को छिपने का आसान सहारा देते हैं। 2023 में राजौरी में हुए हमलों में कई निर्दोष नागरिक शहीद हुए थे, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र में सख्ती बढ़ा दी थी।

पिछले कुछ वर्षों में इस बेल्ट में कई सफल ऑपरेशन हुए हैं, लेकिन आतंकवादी संगठन (जैसे LeT और JeM) बार-बार घुसपैठ की कोशिश करते रहते हैं। सर्दियों में बर्फ और गर्मियों में घने जंगलों का फायदा उठाकर वे लोकल सपोर्ट या सप्लाई लाइन बनाने की कोशिश करते हैं।

सुरक्षा बलों की रणनीति: सूझबूझ भरा अभियान

  • संयुक्त टीम: भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस की SO G और CRPF के जवान शामिल।
  • घेराबंदी: पूरे क्षेत्र को मजबूत घेरा बनाया गया। आसपास के गांवों में अतिरिक्त सुरक्षा।
  • टेक्नोलॉजी: ड्रोन, हेलीकॉप्टर और नाइट विजन उपकरणों का इस्तेमाल।
  • सावधानी: जंगली इलाके में आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता।

अधिकारियों ने बताया कि अभियान को तब तक जारी रखा जाएगा जब तक अंतिम आतंकी को समाप्त नहीं कर लिया जाता।

Akhnoor में अलग ऑपरेशन

इसी दौरान जम्मू जिले के अखनूर के गुढ़ा ब्राह्मणा क्षेत्र में भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। एक स्थानीय महिला ने सूचना दी कि उसके घर के पास 3-4 नकाबपोश संदिग्ध व्यक्ति देखे गए। सुरक्षा बलों ने तुरंत इलाके को घेर लिया और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।

मानवाधिकार और स्थानीय प्रभाव

ऐसे ऑपरेशनों में स्थानीय लोगों की जिंदगी प्रभावित होती है। कई बार आवागमन पर पाबंदी लग जाती है। सुरक्षा बल आमतौर पर स्थानीय लोगों से सहयोग मांगते हैं और उन्हें जागरूक करते हैं। राजौरी के कई गांवों में पिछले वर्षों में आतंक विरोधी अभियानों के बाद शांति लौटी है, लेकिन घुसपैठ की कोशिशें जारी हैं।

Jammu Kashmir Terrorism: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की मौजूदा स्थिति

2024-2026 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद में काफी कमी आई है। घाटी में पर्यटन बढ़ा है और विकास कार्य तेज हुए हैं। लेकिन राजौरी-पुंछ जैसे क्षेत्रों में पाकिस्तान समर्थित आतंकी तत्व अभी भी सक्रिय हैं। वे जंगलों के रास्ते घुसपैठ और हमलों की कोशिश करते हैं।

भारतीय सुरक्षा बलों की जीरो टॉलरेंस नीति के कारण ज्यादातर प्रयास नाकाम हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा पर बाड़, टेक्नोलॉजी और इंटेलीजेंस नेटवर्क को मजबूत करने से घुसपैठ में कमी आई है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?

  • 1. सीमा सुरक्षा: पाकिस्तान से आने वाले आतंकियों को रोकना।
  • 2. स्थानीय शांति: राजौरी के लोगों को आतंक के साए से मुक्ति दिलाना।
  • 3. राष्ट्रीय सुरक्षा: छोटे-छोटे मॉड्यूल को खत्म करना।
  • 4. संदेश: भारत में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है।

अभियान अभी जारी है। जैसे-जैसे नई जानकारी आएगी, सुरक्षा बल अपडेट देंगे। फिलहाल इलाके में सख्ती बरती जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। राजौरी का यह एनकाउंटर एक बार फिर याद दिलाता है कि हमारी सेना, पुलिस और CRPF दिन-रात सीमा और अंदरूनी सुरक्षा के लिए मुस्तैद हैं। घने जंगलों में छिपे आतंकियों को ढूंढ निकालना आसान नहीं, लेकिन भारतीय बलों की ट्रेनिंग, साहस और तकनीक इस चुनौती को भी पार कर लेती है। देश पूरे अभियान पर नजर रखे हुए है।

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