Rajasthan : पन्ना धाय के बलिदान की कहानी सुनाकर रातों रात स्टार बन गई ये लड़की, देखें वायरल वीडियो
Udaipur News, उदयपुर। राजस्थान में इन दिनों एक स्कूली छात्रा का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। पन्ना धाय की स्वामीभक्ति व बलिदान की गाथा सुना रही यह छात्रा राजस्थान के राजसमंद जिले के रेलमगरा तहसील के नया दरिबा गांव की रहने वाली नेहा वैष्णव है। वायरल वीडियो आदिवासी बाहुल्य जिला डूंगरपुर के सागवाड़ा की भीखाभाई भील राजकीय विद्यालय है।

दरअसल, राजस्थान के सागवाड़ा के भीखाभाई भील राजकीय विद्यालय में कुछ दिन पहले संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं हुई थीं, जिसमें कस्तुरबा गांधी आवासीय विद्यालय रेलमगरा की संस्था प्रधान लक्ष्मी रेगर के नेतृत्व में नेहा भी सागवाड़ा आई थी।

नेहा के हाव-भाव और सुरीली आवाज ने सबका दिल जीत लिया
प्रतियोगिता के दौरान आठवीं की छात्रा नेहा ने पन्ना धाय के बलिदान की गाथा को अनूठे अंदाज में गाने के जरिए पेश की। नेहा के हाव-भाव और सुरीली आवाज ने सबका दिल जीत लिया और देखते ही देखते दो मिनट 50 सैकण्ड का इस गाने का वीडियो फेसबुक, यू-ट्यूब, ट्वीटर और वाट्सअप पर वारयल हो गया।

बता मेरे यार सुदामा रे...
वर्ष 2017 में हरियाणा के रोहतक के सांघी गांव के डॉ. स्वरूप सिंह गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति स्कूल की छात्राओं द्वारा गाया गाना बता मेरे याद सुदामा रे... सोशल मीडिया पर खूब वारयल हुआ था। बता मेरे यार सुदामा रे...फेम विधि देशवाल व उनकी सहपाठी छात्राएं रातों रात स्टार बन गई थीं। अब राजस्थान में छात्रा का पन्ना धाय वाला गाना बता मेरे यार सुदामा रे की तर्ज वायरल हो रहा है।

जानिए कौन थीं पन्ना धाय (panna dhay ki kahani in hindi)
राजस्थान के इतिहास में पन्ना धाय स्वामीभक्ति और बलिदान का प्रतीक है। गुर्जर जाति से ताल्लुक रखने वाली महिला Panna Dhay उदयपुर के सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा राणा सांगा के बेटे उदयसिंह की धाय मां थीं। उदयसिंह की मां रानी कर्णावती के आत्म बलिदान के बाद उनके बेटे उदयसिंह को पालने का जिम्मा पन्ना ने संभाला था। चित्तौड़गढ़ के कुंभा महल में पन्ना उदयसिंह का पालन पोषण अपने बेटे चंदन के समान करती थी। चंदन और उदयसिंह हमउम्र थे।

चित्तौड़गढ़ का शासक बनना चाहता था बनवीर
इतिहास कहता है कि दासी का पुत्र बनवीर चित्तौड़गढ़ का शासक बनना चाहता था। उसने एक-एक करके राणा के वंशजों को मारना शुरू किया। महाराजा विक्रमादित्य की हत्या करके बनवीर उदयसिंह के महल की ओर आया। वह उदयसिंह को भी मार देना चाहता था। पन्ना धाय को इसकी भनक लगी तो उसने स्वामीभक्ति व बलिदान की ऐसी मिसाल पेश की, जो इतिहास में अब भी गर्व से याद की जाती है।
पन्ना में उदयसिंह को पत्तलों से ढककर अपने विश्वास पात्र शख्स के साथ महल से बाहर सुरक्षित स्थान पर भेजनी की योजना बनाई और उदयसिंह की जगह अपने बेटे चंदन को सुला दिया। हाथ में खून से सनी तलवार लेकर पहुंचे बनवीर ने चंदन को उदयसिंह समझकर मौत के घाट उतार दिया था। बनवीर को पता न लगे। इसलिए वह आंसू भी नहीं बहा पाई। बनवीर के जाने के बाद अपने मृत पुत्र की लाश को चूमकर राजकुमार उदयसिंह को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए निकल पड़ी। स्वामिभक्त वीरांगना पन्ना धन्य हैं, जिसने अपने कर्तव्य-पूर्ति में अपने बेटे का बलिदान देकर मेवाड़ राजवंश को बचाया।












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