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Shiva Chouhan Family : पिता की मौत के बाद मां करतीं सिलाई, शिवा चौहान पढ़ातीं ट्यूशन, अब सियाचिन में तैनात

Shiva Chauhan Udaipur Rajasthan : दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र Siachen में तैनात India Army की कैप्टन शिवा चौहान की Struggle और Success Story हर किसी के लिए प्रेरणादायी है।

Captain Shiva Chauhan complete story

Captain Shiva Chauhan Siachen : राजस्‍थान के उदयपुर जिला मुख्‍यालय पर हिरणमगरी पुलिस थाना इलाके के सेक्‍टर सात में चौहान परिवार हर किसी के लिए गरीबी, संघर्ष, मेहनत और कामयाबी की मिसाल है। इसी परिवार की बेटी शिवा चौहान को भारत में दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन में तैनात होने वाली पहली महिला अफसर बनने का गौरव हासिल हुआ है। शिवा चौहान भारतीय सेना में कैप्‍टन हैं। दो जनवरी 2023 को शिवा चौहान की पोस्टिंग लेह से सियाचिन ग्‍लेश्यिर में पोस्टिंग हुई है।

Captain Shiva Chauhan के परिवार का इंटरव्‍यू

Captain Shiva Chauhan के परिवार का इंटरव्‍यू

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में उदयपुर की शुभम चौहान व उनकी मौसी के बेटे विश्‍वविजय सिंह ने छोटी बहन शिवा चौहान के जीवन संघर्ष और भारतीय सेना में कैप्‍टन बनने तक की पूरी कहानी बयां की, जो परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति विपरीत हालात को तरक्‍की की राह में रोड़ा मानकर मेहनत करना छोड़ देने वालों के ल‍िए म‍िसाल है।

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     शिवा चौहान के पिता रेडियम नंबर की दुकान चलाते थे

    शिवा चौहान के पिता रेडियम नंबर की दुकान चलाते थे

    न्‍यायिक सेवा की तैयारी कर रहीं शुभम चौहान कहती हैं कि दो साल छोटी बहन Captain Shiva Chouhan का 18 जुलाई 1997 को जन्‍म हुआ था। पापा राजेंद्र सिंह चौहान उदयपुर में रेडियम नंबर प्‍लेट की दुकान चलाते थे। मां अंजलि चौहान घर का काम काज संभालती थीं। साल 2007 तक सब कुछ ठीक चल रहा था। दोनों बहनें स्‍कूल जाने लगी थीं। फिर साल 2008 में अचानक बीमारी की वजह से पिता राजेंद्र सिंह चौहान की मौत हो गई और उनके परिवार की पूरी जिंदगी बदल गई।

     दोनों बहनें बच्‍चों को पढ़ाती थीं ट्यूशन

    दोनों बहनें बच्‍चों को पढ़ाती थीं ट्यूशन

    पति की मौत के बाद परिवार चलाने की जिम्‍मेदारी अंजलि चौहान के कंधों पर आ गई थी। घर के काम के साथ सिलाई करना शुरू किया। दोनों बहनें शुभम व शिवा चौहान भी पढ़ाई में होशियार व घर की जिम्‍मेदारी को लेकर समझदार निकलीं। दोनों जब नौवीं कक्षा में पहुंची तब से छोटी कक्षाओं के बच्‍चों को ट्यूशन पढ़ाने लगीं ताकि मां के कंधों से आर्थिक बोझ कम किया जा सके। यह सिलसिला दोनों बहनों के स्‍नातक करने तक जारी रहा।

     कैप्‍टन शिवा चौहान की शिक्षा

    कैप्‍टन शिवा चौहान की शिक्षा

    पिछले साल शिवा चौहान का परिवार निजी कारणों से उदयपुर से जयपुर शिफ्ट हो गया। दोनों बहनों की स्‍कूलिंग व कॉलेज उदयपुर से ही हुई है। शिवा ने सेंट एंथोनी सीनियर सेकंडरी स्‍कूल सेक्‍टर 4 ब्रांच से की। टेक्नो इंडिया एनजेआर प्रौद्योगिकी संस्थान उदयपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्‍त की।

     भारतीय सेना, नौसेना व तटरक्षक की परीक्षा पास की

    भारतीय सेना, नौसेना व तटरक्षक की परीक्षा पास की

    इसके बाद शिवा चौहान ने भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक में अफसर बनने की दिशा में आगे बढ़ी। छह माह के अंतराल में तीनों का रिजल्‍ट आया। शिवा की काबिलियत देखिए कि उसका तीनों में चयन हो गया। शिवा चौहान भारतीय थल सेना में कैप्‍टन बनना तय किया। साल 2020 में चेन्‍नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकडेमी ज्‍वाइन की। शिवा इंडियन आर्मी की 14वीं फायर एंड फ्यूरी कोर में कैप्‍टन है। यह वहीं कोर है, जिसने गलवान घाटी में चीनी सैनिकों को धूल चटाई थी।

     शिवा चौहान को जन्‍मदिन को मिली पहली पोस्टिंग

    शिवा चौहान को जन्‍मदिन को मिली पहली पोस्टिंग

    शुभम चौहान बताती हैं कि बहन शिवा चौहान को भारतीय सेना में लेह इलाके में पहली पोस्टिंग उसकी बर्थडे वाले दिन 18 जुलाई 2021 को मिली। अब उसे सियाचिन ग्‍लेशियर पर तैनात किया गया है। दो जनवरी 2023 को शिवा ने वहां रिपोर्टिंग दी है। यहां पर सक्रिय तौर पर कुमार पोस्‍ट पर तैनानी पानी वाली कैप्टन शिवा चौहान पहली महिला ऑफिसर बन गई हैं।

     चुनौतियों से भी है सियाचिन में पोस्टिंग

    चुनौतियों से भी है सियाचिन में पोस्टिंग

    उल्‍लेखनीय है कि भारत-पाकिस्‍तान व चीन की सीमा से लगता सियाचिन गलेशियर दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र (Warzone) है। इस युद्धक्षेत्र में भारतीय सेना के जवान 16 से 20 हजार फीट की ऊंचाई तक सीमा की सुरक्षा में तैनात हैं। कैप्‍टन शिवा चौहान की तैनाती ही 15600 फीट की ऊंचाई वाली कुमार पोस्‍ट पर हुई है। यहां युद्ध से ज्‍यादा फौजी तो मौसम की चपेट में आकर जान गंवा देते हैं। यहां ज्यादातर समय शून्य से भी 50 डिग्री नीचे तापमान रहता है। ऑक्‍सीजन की कमी व हिमस्‍खलन और बर्फीले तूफान का भी सामना करना पड़ता है।

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