Captain Shiva Chauhan: विश्व के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र में पहली महिला ऑफिसर तैनात, पूरी डिटेल
फायर एंड फ्यूरी कोर की कैप्टन शिवा चौहान की तैनाती दुनिया की सबसे ऊंची रण भूमि सियाचिन ग्लेशियर के कुमार पोस्ट पर हुई है। यहां तैनात होने वाली वह पहली महिला अधिकारी हैं।

विश्व की सबसे ऊंची युद्ध भूमि पर अब एक महिला ऑफिसर भी पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे करेगी। कैप्टन शिवा चौहान भारतीय सेना की ऐसी पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जो 15,632 फीट की ऊंचाई पर स्थित कुमार पोस्ट पर तैनात की गई हैं। देश की रक्षा के लिए उनका हौसला जितना ही बुलंद है, वह जिस 14वीं कोर से जुड़ी हैं, उसके नाम से भी दुश्मन उसी तरह से खौफ खाते हैं। फायर एंड फ्यूरी कोर के नाम से मशहूर सेना का यह कोर गलवान घाटी की घटना के दौरान भी खूब चर्चा में आया था, जिसके कहर से आज भी चीनी सैनिक सिहर उठते हैं।

सबसे ऊंची युद्ध भूमि पर तैनात होने वाली पहली महिला ऑफिसर
भारतीय सेना के फायर एंड फ्यूरी कोर की पहली महिला ऑफिसर कैप्टन शिवा चौहान को सक्रिय तौर पर कुमार पोस्ट पर तैनात किया गया है, जो कि दुनिया की सबसे ऊंची युद्ध भूमि सियाचिन ग्लेशियर में स्थित है। भारतीय सेना के फायर एंड फ्यूरी कोर ने एक ट्वीट करके कैप्टन शिवा चौहान की तस्वीरों के साथ एक ट्वीट किया है। यह सिर्फ कैप्टन शिवा चौहान के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और यहां की नारी शक्ति के लिए गौरव का पल है। इंडियन आर्मी के फायर एंड फ्यूरी कोर ने अपने ट्वीट में लिखा है, 'फायर एंड फ्यूरी सैपर्स की कैप्टन शिवा चौहान, कठिन ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, सबसे ऊंची युद्ध भूमि सियाचिन ग्लेशियर के कुमार पोस्ट पर ऑपरेशनली तैनात की जाने वाली पहली महिला ऑफिसर बन गई हैं।'

'ब्रेकिंग द ग्लास सीलिंग'
ट्विटर पोस्ट की शुरुआत 'ब्रेकिंग द ग्लास सीलिंग' वाक्य से हुई है। जाहिर है कि इस चुनौती वाली पोस्टिंग से पहले कैप्टन शिवा को बहुत ही कठोर प्रशिक्षण के दौर से गुजरना पड़ा है। बता दें कि सियाचिन ग्लेशियर दुनिया की सबसे ऊंची युद्ध भूमि है, जहां 1984 से भारत और पाकिस्तान की फौज आमने-सामने हैं और लगातार संघर्ष की स्थिति बनी रहती है। सियाचिन ग्लेशियर के जिस कुमार पोस्ट पर तैनात रहकर कैप्टन शिवा चौहान मातृभूमि की रक्षा करेंगी, 15,632 फीट की ऊंचाई पर है। सितंबर, 2021 में 8 दिव्यांगों की एक टीम ने इस स्थान पर पहुंचकर एक वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया था।

फायर एंड फ्यूरी कोर क्या है ?
कैप्टन शिवा चौहान की कामयाबी ने भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर को एक बार फिर से चर्चा में ला दिया है। बता दें कि लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की रक्षा की जिम्मेदारी लेह स्थित सेना की 14वीं कोर पर है, भारतीय सेना की इसी कोर को फायर एंड फ्यूरी के नाम से भी जानते हैं। करीब ढाई साल पहले पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 20 जवानों की शहादत देकर भी चीनी सैनिकों के छक्के छुड़ाने वाले वीर जवान इसी फायर एंड फ्यूरी कोर से ताल्लुक रखते हैं। जैसा की इस कोर के नाम से ही इनकी वीरता और शौर्य की झलक मिलती है- फायर का अर्थ है आग और फ्यूरी का अर्थ है प्रचंड।

नॉर्दन कमांड का हिस्सा है 14वीं कोर
भारतीय सेना की 14वीं कोर नॉर्दन कमांड का हिस्सा है, जिसका मुख्यालय उधमपुर में है। फायर एंड फ्यूरी कोर पर चीन से सटे एलएसी और पाकिस्तान से सटी सीमा के अलावा सियाचिन ग्लेशियर की रक्षा का भी जिम्मा है और इसलिए कैप्टन शिवा को कुमार पोस्ट पर ड्यूटी दी गई है। यह कोर अपनी वीरता के लिए इस कदर विख्यात है कि गलवान की घटना के बाद जब पीएम नरेंद्र मोदी लद्दाख पहुंच थे तो इसके बारे में कहा था, 'भारत मां के दुश्मनों ने आपकी आग और प्रकोप को देखा है।'
माइनस 30 डिग्री तापमान में जोश देखिए
मंगलवार को ही फायर एंड फ्यूरी कोर ने अपने ट्विटर हैंडल से जवानों की चुनौती वाला एक वीडियो भी शेयर किया है। इसके साथ ही इसमें लिखा गया है, 'कुछ घोड़े आपकी परीक्षा लेंगे, कुछ आपको सिखाएंगे और कुछ आपमें से कुछ बेहतर खोज निकालेंगे' इसमें आगे लिखा है, 'पटियाला ब्रिगेड के घुड़सवार, टांगें फैलाए जांस्कर टट्टू,बर्फ से जमे हुए रेगिस्तान में उनके साथियों ने माइनस 30 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में 2023 नववर्ष में प्रवेश किया....'












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