केरल की आयरन लेडी केआर गौरी का निधन, राहुल गांधी ने जताया दुख

केरल की राजनीति में आयरन लेडी के नाम से मशहूर के.आर. गौरी का मंगलवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।

तिरुवनंतपुरम, 11 मई। केरल की राजनीति में आयरन लेडी के नाम से मशहूर के.आर. गौरी का मंगलवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके परिवारजनों ने यह जानकारी दी। 102 वर्षीय गौरी कुछ समय से बीमार चल रही थीं, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दुख प्रकट किया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, 'के आर गौरी अम्मा जी के परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। केरल की राजनीति में एक लंबी उपस्थिति, वह कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। उनकी शानदार जीवन यात्रा के लिए उन्हें श्रद्धांजलि।'

 KR Gowri

गौरी के नाम दर्ज विशेष रिकॉर्ड
केआर गौरी दुनिया की पहली लोकतांत्रिक रुप से चुनी हुई कम्युनिस्ट सरकार की कैबिनेट सदस्य रहीं, जिसका नेतृत्व 1957 में दिग्गज कम्युनिस्ट ई.एम.एस. नंबूदरीपाद ने किया। वह पहली कम्युनिस्ट सरकार में राजस्व मंत्री रहीं। इसके अलावा उनकी गिनती राज्य में कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्यों में होती है। केरल की पहली विधायिका में वह 1977 तक विधायक रहीं। इसके बाद वे एक बार चुनाव हारीं, लेकिन अगले ही चुनाव में उन्होंने शानदार जीत दर्ज की और 2006 तक विधायक रहीं।

केरल में की भूमि सुधार बिल की शुरुआत

पहली कम्युनिस्ट सरकार में केरल में भूमि सुधार विधेयक की शुरूआत करना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। अपने पूरे राजनीतिक जीवन में वह कम्युनिस्ट और कांग्रेस दोनों के 6 मंत्रिमंडलों में 16 साल तक राज्य मंत्री रहीं।

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साल 1994 में उन्होंने सीपीआईएम को अलविदा कह दिया और खुद की पार्टी जेएसएस बनाई। जेएसएस साल 2006 तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ के साथ गठबंधन में रही। इसके बाद पार्टी को विभाजन का सामना करना पड़ा और धीरे-धीरे पार्टी का पतन हो गया।

उनका जन्म अरुमुरी परम्बिल पार्वटी अम्मा और कलाथिलपरम्बिल रमन के यहां 14 जुलाई 1919 को अलाप्पुझा जिले के चेरथला के पट्टानक्कड़ में हुआ था। उन्होंने तिरुवनंतपुरम में सरकारी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की।

त्रावनकोर-कोचीन विधानसभा क्षेत्र से 1952-1954 में चुनाव लड़कर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1957 में वह केरल विधानसभा के लिए चुनी गईं और पहले कम्युनिस्ट मंत्रालय में राजस्व मंत्री बनीं। उसी साल उन्होंने प्रसिद्ध राजनेता और ईएमएस सरकार में मंत्री टी.वी. थॉमस से शादी कर ली।

उन्होंने विभिन्न सरकारों में बतौर मंत्री काम किया। 1987 वह साल था जब वह केरल की पहली महिला मुख्यमंत्री बन सकती थी, लेकिन राजनीतिक खेलों के कारण ऐसा हो न सका। उन्होंने आखिरी बार 2011 में चुनाव लड़ा लेकिन इस बार वह हार गईं। उनके निधन पर केरल सरकार उन्हें सम्मानजनक रूप से अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रही है। केरल के कई राजनेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

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