दिमाग की कोशिकाओं की मौत का रहस्य सुलझा

अब तक रिसर्चरों को दिमाग की एमीलॉयड और टाउ प्रोटीन के बीच संबंध के बारे में नहीं पता था

दुनिया मेंडिमेंशिया से पीड़ित 5.5 करोड़ लोगों में एक बड़ी संख्या अल्झाइमर के रोगियों की है. डिमेंशिया से पीड़ित दो तिहाई लोग विकासशील देशों में रहते हैं. दुनिया की आबादी जिस तरीके से बूढ़ी हो रही है उससे अनुमान है कि 2050 तक डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 13.9 करोड़ तक पहुंच जाएगी. इससे चीन, भारत, लातिन अमेरिका और उप सहारा अफ्रीका के देशों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.

रिसर्चर अल्जाइमर के इलाज के लिए कई दशकों से काम कर रहे हैं लेकिन उन्हें अब तक सीमित सफलता ही मिल सकी है. अब इस दिशा में एक नई उम्मीद जगी है. एक्टिव एजेंट लेकानेमाब की खोज के बाद खासतौर से रिसर्चर बहुत उत्साहित हैं. इस दवा को अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने मंजूरी दे दी है. इस दवा से ऐसे संकेत मिले हैं कि यह अल्जाइमर के शुरूआती दौर में उसके विकास को धीमा कर देती है.

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दिमाग में जटिल प्रक्रियाएं

अल्जाइमर को रोकने के लिए दवा विकसित करना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि रिसर्चर अभी तक यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि बीमारी की चपेट में आने के बाद दिमाग में क्या होता है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिमाग की कोशिकाएं मरती क्यों हैं?

रिसर्चर यह जानते हैं कि एमिलॉयड और टाउ प्रोटीन दिमाग में विकसित होते हैं हालांकि हाल तक वो यह नहीं जानते थे कि ये दोनों साथ में कैसे काम करते हैं या कोशिकाओं की मौत पर असर डालते हैं. बेल्जियम और ब्रिटेन के रिसर्चरों का कहना है कि वो यह समझा सकते हैं कि अब क्या हो रहा है?

कोशिकाओं की मौत का रहस्य सुलझा

साइंस जर्नल में छपी रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्चरों का कहना है कि इन असामान्य प्रोटीनों एमिलॉयड और टाउ के बीच एक सीधा संबंध है जिसे नेक्रोप्टोसिस या कोशिका की मौत कहा जाता है.

कोशिका की मौत आमतौर पर किसी संक्रमण या फिर सूजन के जवाब में प्रतिरक्षा है और यह शरीर को अवांछित कोशिकाओं से मुक्ति दिलाती है. इसकी वजह से शरीर में फिर स्वस्थ कोशिकाओं का विकास होता है. जब पोषक तत्वों की आपूर्ति रुक जाती है तो कोशिकाएं फूलने लगती हैं और प्लाज्मा झिल्ली नष्ट हो जाती है. कोशिकाएं फूल कर मर जाती हैं.

अल्जाइमर के मरीजों में असामान्य एमीलॉयड प्रोटीन दिमाग की कोशिकाओं की अंदरूनी हिस्सों में जमा हो जाते हैं

रिसर्चरों का कहना है कि अल्जाइमर के मरीज की कोशिकाएं दिमाग के न्यूरॉन्स में एमिलॉयड प्रोटीन के जाने से सूज जाती हैं. इसकी वजह से कोशिकाओं में आंतरिक रसायनों के गुण बदल जाते हैं. एमिलॉयड तथाकथित प्लेक के साथ झुंड बना लेते हैं और फाइबर जैसी टाउ प्रोटीन अपने बंडल बना लेते हैं जिन्हें टाउ टैंगल कहा जाता है.

अल्जाइमर के इलाज में एक और दवा को बड़ी कामयाबी

जब ये दो चीजें होती हैं तो दिमाग की कोशिकाएं एक मॉलिक्यूल बनाती हैं जिसे एमईजी3 कहा जाता है. रिसर्चरों ने एमईजी3 को बनने से रोका और उनका कहना है कि जब वो उसे रोक सके तो दिमाग की कोशिकाएं जिंदा बच गईं.

यह काम करने के लिए रिसर्चरों ने इंसान के दिमाग की कोशिकाओं को जेनेटिकली मोडिफाइड चूहों के दिमाग में डाला जो बड़ी मात्रा में एमिलॉयड बनाते हैं.

ब्रिटेन की डिमेंशिया रिसर्च इंस्टिट्यूट के रिसर्चर ने बताया कि तीन चार दशकों में पहली बार अल्जाइमर के मरीजों में कोशिकाओं की मौत के संभावित कारण को समझने में सफलता मिली है.

नई दवाओं के लिए उम्मीद

बेल्जियम के केयू लॉयवेन और ब्रिटेन के डिमेंशिया रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के रिसर्चरों का कहना है कि उन्हें इस नई खोज से अल्जाइमर के मरीजों के लिए नई दवाओं और इलाज के विकास में मदद मिलने की उम्मीद है.

उनकी उम्मीद बेमानी नहीं है. लेकानेमैब दवा खासतौर से प्रोटीन एमिलॉयड को निशाना बनाती है. अगर एमईजी3 मॉलिक्यूल को बनने से रोका जा सका तो यह दवा दिमाग में कोशिकाओं की मौत को रोकने में सफल होगी.

Source: DW

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