1947 में आज ही के दिन कश्मीर में पहुंची थी सेना

हालांकि, रविवार का दिन होने के चलते सरकारी कार्यालय, शिक्षण संस्थान, बैंक, डाक घर और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। लेकिन अलगाववादी संगठनों के इस बंद के चलते शहर और घाटी के अन्य हिस्सों में सार्वजनिक और निजी परिवहन प्रभावित हुए हैं।
शहर की सड़कों पर निजी वाहनों की आवाजाही कम है, वहीं सार्वजनिक वाहन भी नदारद हैं। अलगाववादी नेताओं द्वारा आहूत इस बंद को मुज्जफराबाद के हिजबुल मुजाहिदीन आतंकवादी संगठन के सर्वोच्च कमांडर सैयद सलाहुद्दीन ने भी अपना समर्थन दिया है।
बता दें कि तत्कालीन डोगरा महाराज हरि सिंह द्वारा भारतीय संघ के साथ जम्मू एवं कश्मीर रियासत के विलय पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, भारतीय सेना ने वर्ष 1947 में आज ही के दिन यहां से कबायली आक्रमणकारियों को खदेड़ने के लिए अपने सैनिकों को भेजा था।
रविवार के बंद को देखते हुए यहां और कश्मीर घाटी के अन्य संवेदनशील हिस्सों में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को तैनात किया गया है। इसके अलावा श्रीनगर शहर में अधिकारियों ने सैयद अली गिलानी और मुहम्मद यासीन मलिक सहित कई वरिष्ठ अलगाववादी नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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