विस्थापित कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए उठाए जाएं प्रभावी कदम- उपराज्यपाल मनोज सिन्हा
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को विस्थापित कश्मीरी पंडितों की राज्य में वापसी को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
श्रीनगर, 18 जुलाई। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को विस्थापित कश्मीरी पंडितों की राज्य में वापसी को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को कश्मीरी पंडितों की घर वापसी को लेकर सक्रिय कदम उठाने का निर्देश दिया। मीटिंग में उन्होंने कहा कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और देश-विदेश के अन्य हिस्सों में कई परिवार ऐसे हैं जो घर लौटने या अपना पंजीकरण कराने के इच्छुक हैं। संचार के उचित माध्यमों के माध्यम से उन तक पहुंचने के लिए एक व्यापक अभ्यास शुरू किया जाना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन कश्मीर में प्रवासी पंडितों के लिए 6,000 ट्रांजिट फ्लैट स्थापित कर रहा है, जिसमें दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में 208 और मध्य कश्मीर के बडगाम में 96 फैल्ट शामिल हैं। इसके अलावा गांदरबल, शोपियां, बांदीपोरा और उत्तरी कश्मीर के बारामूला और कुपवाड़ा जिलों में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए 1,200 ट्रांजिट आवास तैयार किये जा रहे हैं। इसके अलावा अन्य 2,744 फ्लैटों के निर्माण के लिए सात स्थानों पर भूमि की पहचान की गई है।
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बैठक में उन्होंने कहा कि, 'सबसे पहले हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कश्मीरी प्रवासियों की पूरी आबादी जम्मू-कश्मीर के साथ पंजीकृत हो।' उन्होंने कहा कि बहुत से लोग अपनी मातृभूमि की वापसी के लिए तरस रहे हैं, उनकी वापसी के लिए हमें तत्काल प्रवाभी कदम उठाने चाहिए। हजारों लोगों के सपने को हकीकत में बदलना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
1990 में सैकड़ों कश्मीरी पंडितों को कर दिया गया था बाहर
जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद का सामना कर रहे सैकड़ों कश्मीरी पंडितों ने 1990 के दशक में घाटी छोड़ दी थी और देश के विभिन्न हिसों में बस गए थे।
प्रवासियों के लिए आवास निर्माण की समय सीमा तक
प्रवासी कश्मीरियों के लिए बनाए जा रहे फ्लैटों के निर्माण की समय सीमा तय कर दी गई है। शोपियां में निर्माण कार्य मार्च, 2022 तक और उत्तरी कश्मीर के बारामूला और बांदीपोरा में नवंबर, 2020 तक पूरा कर लिया जाएगा। मीटिंग में उपराज्यपाल ने कहा कि हमें कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करने की आवश्यकता है।












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