Sania Mirza: सानिए मिर्जा इस बार कहां और किसके साथ मनाएंगी 'ईद'?

Sania Mirza: भारत की मशहूर टेनिस प्लेयर सानिया मिर्जा भले ही विश्वस्तरीय खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाई हों लेकिन उनकी जड़ें आज भी अपने मूल्यों और परंपराओं से जुड़ी हुई हैं। कामयाबी के आकाश पर मेहनत के पंखों से उड़ने वाली सानिया मिर्जा देश का गौरव और लाखों लोगों के लिए प्रेरणाश्रोत हैं लेकिन इतनी कामयाबी के बावजूद वो अपने कल्चर, धर्म की पूरी इज्जत करती हैं और उसके महत्व को बखूबी समझती भी हैं।

पर्सनल लाइफ में, आज वो सिंगल हैं, पति शोएब मलिक से अलग होने के बाद भी, वो खुशी-खुशी अपनी बेटे की परवरिश में लगी हैं। साल 2024 में उन्होंने अपनी बहन अनम के घर पर अपने पूरे परिवार संग ईद मनाई थी, इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि वो इस बार भी ईद पर अपने पूरी फैमिली के साथ होंगी।

Sania Mirza

कुछ वक्त पहले टाइम्सऑफ इंडिया से बात करते हुए सानिया ने रमजान और ईद के बारे में खुलकर बातें की थीं। उन्होंने कहा था कि 'रमजान का महीना पाक होने के बाद हमें आपस में जोड़ने का काम करता है, ये समाज में प्यार बांटने और सौहार्द बढ़ाने का काम करता है।'

'मैं पाक महीने या ईद पर परिवार के साथ रहूं' (Sania Mirza)

'मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा इजहान भी इसबात को समझे। मैं पूरी कोशिश करती हूं कि मैं पाक महीने या ईद पर परिवार के साथ रहूं, हालांकि मुझे खेल की वजह से काफी यात्रा करनी पड़ती है लेकिन मेरा पूरा प्रयास होता है कि मैं रोजा रखूं।'

हम सभी भाई-बहन फिर घर आकर अपनी-अपनी ईदी गिनते थे (Sania Mirza)

अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए सानिया ने कहा था कि 'जब हम छोटे थे तो हमें ईदी मिलती थी। वो हमारे लिए बड़ा उपहार होता था। हम सभी भाई-बहन घर वापस आकर अपनी-अपनी ईदी गिनते थे और फिर देखते थे कि किसे ज्यादा मिली? फिर उन्होंने हंसते हुए कहा था कि 'अब मुझे ईदी कम मिलती है क्योंकि मैं बड़ी हो गई हूं।'

रमजान का महत्व (Ramzaan)

इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना रमजान बेहद पाक माह माना जाता है। इसमें मुस्लिम भाई-बहन रोजे रखते हैं। ये आत्मसंयम, इबादत और नेकी का महीना कहा जाता है। कहते हैं कि रमज़ान में ही पैगंबर मोहम्मद साहब पर पवित्र कुरान का अवतरण हुआ था, ये खुदा से साक्षात्कार करने का मंथ है।

'रमज़ान की आखिरी दस रातों में से एक रात 'शबे क़द्र' कहलाती है'

रोज रखने के नियम काफी कठिन होते हैं। रमज़ान की आखिरी दस रातों में से एक रात 'शबे क़द्र' कहलाती है, जो सबसे पवित्र रात मानी जाती है तो वहीं रोजे के अंत पर ईद का पर्व मनाया जाता है। लोग इस दिन मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं और एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं। इस दिन घरों में सेवईं बनती है इसी वजह से इसे 'मीठी ईद' का भी पर्व कहते हैं।

पुरस्कार और मान्यता (Sania Mirza Award)

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