मेडल लाने वाली उम्र में उठी अर्थी! होस्टल में 2 लड़कियों ने लगाई फांसी, खेल जगत में शोक की लहर
Kerala SAI Hostel Tragedy: केरल के कोल्लम से एक ऐसी खबर आई है जिसने भारतीय खेल जगत को सुन्न कर दिया है। यहां भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के हॉस्टल में दो उभरती हुई एथलीटों के शव मिलने से हड़कंप मच गया। सपनों को उड़ान देने की उम्र में इन दो बेटियों ने मौत को गले लगा लिया, जिससे पूरे देश में शोक की लहर है। यह दिल दहला देने वाली घटना गुरुवार सुबह की है।
16 और 18 साल की महिला खिलाड़ी ने ली जान (Kerala SAI Hostel Tragedy)
कोल्लम स्थित साई (SAI) ट्रेनिंग सेंटर में जब 16 और 18 साल की दो खिलाड़ी अपनी नियमित मॉर्निंग ट्रेनिंग के लिए मैदान पर नहीं पहुंचीं तो उनके साथियों को चिंता हुई। इनमें से एक कबड्डी खिलाड़ी थी और दूसरी एथलीट। जब साथ पढ़ने वाली लड़कियां उनके कमरे की तलाश में पहुंचीं तो कमरा अंदर से बंद था। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब कोई हलचल नहीं हुई तो दरवाजा तोड़ दिया गया। अंदर का नजारा खौफनाक था। दोनों लड़कियां कमरे में सीलिंग फैन से लटकी पाई गईं।

सुसाइड नोट में मांगी माफी
पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिस पर दोनों लड़कियों के हस्ताक्षर हैं। कोल्लम ईस्ट पुलिस के मुताबिक, इस नोट में उन्होंने अपने माता-पिता से इतना बड़ा कदम उठाने के लिए माफी मांगी है। हालांकि, पुलिस अभी इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी जिसने इन होनहार खिलाड़ियों को जान देने पर मजबूर कर दिया।
जांच में जुटी पुलिस
कोल्लम ईस्ट पुलिस स्टेशन के एसएचओ पुष्पकुमार जी ने बताया कि फिलहाल अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच की जाएगी। शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार दोनों लड़कियों को अलग-अलग कमरे दिए गए थे। लेकिन घटना वाले दिन एक लड़की दूसरी के कमरे में गई और वहां पहले से मौजूद अन्य रूममेट्स को बाहर जाने के लिए कहा।
सवालों के घेरे में सिस्टम
कोल्लम के इस साई सेंटर में कुल 40 लड़कियां एथलेटिक्स, हॉकी और कबड्डी की कोचिंग लेती हैं। सेंटर के इंचार्ज राजीव थॉमस ने इस घटना पर फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब किसी स्पोर्ट्स हॉस्टल से ऐसी खबर आई हो। यह घटना एक बार फिर एथलीटों के मानसिक स्वास्थ्य, उन पर जीत के दबाव और हॉस्टल के माहौल पर गंभीर सवाल खड़े करती है।












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