'सात-आठ महीनों से खुद को,' स्वप्निल कुसाले की सफलता का क्या है राज? भारतीय शूटर ने बताया कैसे जीता मेडल
Paris Olympics 2024, Swapnil Kusale: पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद स्वप्निल कुसाले घर लौटने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने न केवल कांस्य पदक जीता बल्कि चुनौतीपूर्ण 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन इवेंट में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय भी बन गए। इस जीत ने न केवल उन्हें पहचान दिलाई बल्कि निशानेबाजी की दुनिया में भारत की उपस्थिति को फिर से स्थापित किया।
आसान नहीं रहा स्वप्निल का सफर
भारतीय निशानेबाज स्वप्निल कुसाले अपनी हालिया उपलब्धियों से चर्चा में हैं। कुसाले का सफ़र आसान नहीं रहा। उन्हें कई चुनौतियों और असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका दृढ़ संकल्प कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि, 'मुझे नहीं लगता कि मैंने अपने जीवन में कभी इतनी मेहनत की है।' 'पिछले सात-आठ महीनों से मेरा पूरा ध्यान अपनी ट्रेनिंग पर था।'

इससे पहले उनकी लगन का नतीजा तब देखने को मिला जब उन्होंने 2023 में आयोजित हांग्जो 2022 एशियाई खेलों में पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। कुसाले ने बाकू, अजरबैजान में 2023 विश्व कप में तीन मेडल- एक गोल्ड दो सिल्वर मेडल भी जीते हैं। यह जीत उनके अथक प्रयास और खेल के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। कुसाले ने कहा, 'मैच कठिन था, लेकिन मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया।'
कुसाले की सफलता में तैयारी की अहम भूमिका
पेरिस ओलंपिक में कुसाले की सफलता में तैयारी ने अहम भूमिका निभाई। वह अपनी उपलब्धियों के लिए अपने कठोर प्रशिक्षण कार्यक्रम और अपने प्रशिक्षक के सहयोग को श्रेय देते हैं। उन्होंने कहा कि, 'इतने बड़े टूर्नामेंट की तैयारी के लिए बहुत मेहनत की जरूरत होती है।' 'मेरे प्रशिक्षक और मैंने अथक परिश्रम किया, हर चीज पर ध्यान दिया।'
टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम से मिला सपोर्ट
कुसाले की यात्रा में टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने बताया, 'TOPS ने हमें आवश्यक सहायता प्रदान की है।' 'कोटा हासिल करने से लेकर गियर उपलब्ध कराने तक, उनकी सहायता काफी अहम रही है।'
घर लौटने पर कुसाले का एक हीरो की तरह स्वागत किया गया। भारतीय निशानेबाजों ने उनकी जीत का जश्न मनाया, उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को मान्यता दी, जिसके कारण उन्हें सफलता मिली। इस जीत ने देश भर के कई युवा निशानेबाज़ों को प्रेरित किया है।
कुसाले की उपलब्धि सिर्फ़ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय खेलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह वैश्विक मंच पर भारतीय एथलीटों की क्षमता को उजागर करता है और भावी पीढ़ियों को दृढ़ संकल्प के साथ अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
इस जीत के साथ, कुसाले अब अपनी नज़रें आगामी ओलंपिक सहित भविष्य की प्रतियोगिताओं पर टिकाए हुए हैं। उनकी हालिया सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है, और वे भारत के लिए और अधिक सम्मान लाने के लिए पहले से कहीं अधिक प्रेरित हैं।
सात-आठ महीनों से खुद को सोशल मीडिया से रखा दूर
स्वप्निल कुसाले ने अपनी यात्रा और जीत पर अपने विचार शेयर करते हुए आगे कहा कि, 'मुझे नहीं पता कि मीडिया में क्या कहा जा रहा था या लोग शूटिंग टीम के लिए क्या कह रहे थे, क्योंकि मैंने पिछले सात-आठ महीनों से खुद को सोशल मीडिया से अलग कर लिया है।' 'मेरे मनोवैज्ञानिक ने सुझाव दिया कि मुझे ऐसी आदतों को कम करना चाहिए और अपने प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।'
भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं स्वप्निल
उन्होंने कहा कि, 'इस पदक को जीतने से मुझे और भी प्रेरणा मिली है।' 'मैं भविष्य में कड़ी मेहनत करने और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए दृढ़ संकल्पित हूं।'
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कुसाले की कहानी दृढ़ता और समर्पण की कहानी है। यह उन कई महत्वाकांक्षी एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो बाधाओं के बावजूद महानता हासिल करने का सपना देखते हैं। जैसे-जैसे कुसाले आगामी चुनौतियों के लिए प्रशिक्षण और तैयारी जारी रखते हैं, राष्ट्र उनके पीछे खड़ा है और हर कदम पर उनका उत्साहवर्धन कर रहा है।












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