Budget 2026: खेल मंत्रालय के बजट में ₹2800 करोड़ की बढ़ोतरी, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर सरकार का बड़ा दांव
Sports Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने आज संसद में अपना 9वां केंद्रीय बजट पेश करते हुए खेल जगत के लिए एक बड़े बदलाव की घोषणा की है। सरकार ने मौजूदा खेलो इंडिया कार्यक्रम को आने वाले समय में 'खेलो इंडिया मिशन' (Khelo India Mission) में बदलने का प्रस्ताव रखा है। यह मिशन अगले 10 वर्षों के लिए भारत के खेल ढांचे, एथलीट विकास और इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को पुनर्जीवित करने का काम करेगा।
'खेलो इंडिया मिशन' शुरू करने का रखा प्रस्ताव (Sports Budget 2026)
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में खेल क्षेत्र को केवल एक प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के एक अहम स्तंभ के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि खेल क्षेत्र रोजगार, कौशल विकास और नौकरी के अवसरों के कई साधन प्रदान करता है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से शुरू हुए टैलेंट हंट को आगे बढ़ाते हुए, मैं अगले दशक में खेल क्षेत्र को बदलने के लिए 'खेलो इंडिया मिशन' शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं।

2,800 करोड़ की बढ़ोतरी
भारत के खेल और युवा मामलों के मंत्रालय के लिए बजट 2026-27 एक नए अध्याय की शुरुआत लेकर आया है। संसद में पेश दस्तावेजों के अनुसार मंत्रालय का कुल आवंटन अब 45,482 करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष (2025-26) में खेल मंत्रालय का आवंटन लगभग 42,692 करोड़ था, जिसमें इस साल करीब 2,800 करोड़ की स्पष्ट बढ़ोतरी देखी गई है।
100वें राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी
बजट में इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा 'पूंजीगत व्यय' के लिए रखा गया है। इसके पीछे दो बड़े लक्ष्य हैं। भारत 2030 में 100वें राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। भारत की ओलंपिक 2036 मेजबानी की दावेदारी को मजबूती देने के लिए विश्व स्तरीय स्टेडियम, ट्रेनिंग सेंटर और एथलीट हाउसिंग का निर्माण प्राथमिकता है।
हाल ही में घोषित 'खेलो इंडिया मिशन' के 10 वर्षीय रोडमैप को भी इसी बजट से गति मिलेगी, जिससे देश भर में बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया जा सकेगा। बजट 2026 का एक मुख्य पहलू खेलों को रोजगार सृजन से जोड़ना है। सरकार अब खेल क्षेत्र को कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, इवेंट मैनेजमेंट और मैन्युफैक्चरिंग जैसे विविध क्षेत्रों में नौकरी देने वाले एक बड़े 'मल्टी-सेक्टर एंप्लॉयर' के रूप में देख रही है। यह निवेश केवल पदक तालिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य 'स्पोर्ट्स इकोनॉमी' को बढ़ावा देना है।












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