Paris Olympics: घंटों पसीना बहा रहा है गोल्ड का दावेदार! खास बातचीत में भारत के रोअर बलराज ने खोले कई राज
भारत के बलराज पंवार पेरिस ओलंपिक में डेब्यू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पदक जीतने की उम्मीदें उन पर टिकी हैं क्योंकि वे आगामी शोपीस इवेंट में एकमात्र भारतीय रोअर हैं। 24 वर्षीय पंवार पेरिस ओलंपिक पहुंच गए हैं और कोच बजरंग लाल ताखर के साथ उन्होंने अपनी तैयारी शुरू कर दी, जो ग्वांगझू में एशियाई खेलों 2010 के दौरान रोइंग में भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता बने थे। जब हमने बलराम से उनकी तैयारी के बारे में जाना तो उन्होंने बेबाक तरीके से हर सवाल का जवाब दिया।
हर दिन 10-12 घंटे पसीना बहा रहे बलराज
वनइंडिया स्पोर्ट्स टीम ने जब बलराज से उनकी तैयारी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि, 'मेरी तैयारी अच्छी चल रही है, अभी मैं नेशनल कैंप में प्रैक्टिस कर रहा हूं। यहां पर मुझे इंटरनेशनल लेवल की सुविधाएं मिल रही हैं। मैं दिन में 10-12 घंटे अभ्यास कर रहा हूं।'

पत्नी और मां संभाल रहीं घर की जिम्मेदारी
बलराज से जब उनके गांव और परिवार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसका विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने बताया कि 'मैं हरियाणा के जिला करनाल का रहने वाला हूं। मेरे परिवार में चार बहन और दो भाई हैं। मेरे पिताजी का देहांत साल 2011 में हो गया था। इसके बाद से मेरे परिवार का पालन पोषण मेरी माताजी ने ही किया। मेरी शादी 2021 में हुई और मेरी एक दो साल की बेटी है। पिछले 6 महीने में ट्रेनिंग में व्यस्त होने के कारण 7 दिन के लिए ही घर जा पाया हूं। इस दौरान घर की सारी जिम्मेदारी मेरी पत्नी और माता जी के ऊपर आ गई है।'
रोईंग में कैसा रहा आपका अबतक का सफर?
मैं साल 2018 में बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर में बतौर सैपर भर्ती हुआ था। आर्मी ज्वाइन करने से पहले मुझे रोईंग के बारे में नहीं पता था। रोईंग की शुरुआत आर्मी ट्रेनिंग के दौरान हुई और मेहनत करता गया। इसके बाद मेरा चयन आर्मी रोईंग बोर्ड सी. एम. ई पुणे में हो गया था। मैंने अपना पहला गोल्ड मेडल 40वीं नेशनल रोईंग चैंपियनशिप में जीता।
उन्होंने आगे बताया कि, 'इसके बाद मेरा चयन नेशनल कोचिंग कैंप हैदराबाद के लिए हुआ। एशियन गेम्स 2023 में चौथा स्थान हासिल किया। फिर हमारा कैंप ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए FRI और SAI द्वारा दिसंबर 2013 में हैदराबाद और पुणे में लगाया गया और हमें 20 दिन की ट्रेनिंग के लिए चीन भेजा गया, जहां एशियन गेम्स के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट को हराते हुए ओलंपिक क्वालिफिकेशन के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट को हराते हुए ओलंपिक क्वालिफिकेशन रेगाटा (दौड़ की प्रतियोगिता) में तीसरा स्थान हासिल किया।
सरकार आपकी किस प्रकार सहायता कर सकती हैं?
मुझे इस साल ट्रेनिंग और कंपटीशन के लिए काफी फॉरेन एक्सपोजर (Foreign Exposure) दिए गये, जिसके कारण मेरे प्रदर्शन में काफी सुधार हुआ। आने वाले सालों में मुझे ऐसे ही फॉरेन एक्सपोजर मिलते रहे तो प्रदर्शन में और सुधार हो जाएगा।
रोईंग में आने के बाद किन-किन खाने की चीजों को छोड़ना पड़ा?
हरियाणा से होने के कारण मुझे बचपन से ही मीठा खाने का ज्यादा शौक था, जिसमें गुलाब जामुन, काजू कतली, लड्डू खानें का शौक था, जोकि रोईंग के बाद छोड़ना पड़ा। अब मैं सिर्फ फल जूस, ड्राई फ्रूट्स ही खाता हूं।
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बलराज पर सरकार ने अब तक कितना पैसा खर्च किया?
यहां आपको बताते चलें कि बलराज पंवार पर वित्तीय सहायता के रूप में सरकार अब तक शीर्ष के अंतर्गत: 1,53,190 रुपये खर्च कर चुकी है, जबकि प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए वार्षिक कैलेंडर (ACT) के अंतर्गत 35,95,524/ रुपये खर्च कर चुकी है।












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