भारत के लाल ने थाईलैंड में किया कमाल, मनीष राघव इंटरनेशनल चैंपियन बन रचा इतिहास
Manish Raghav became international champion: भारतीय मुक्केबाज़ी के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। गुरुग्राम जिले के भोंडसी गांव के युवा बॉक्सर मनीष राघव (Manish Raghav) ने बैंकॉक थाईलैंड में खेले गए UBO (यूनिवर्सल बॉक्सिंग ऑर्गेनाइजेशन) मिडलवेट इंटरनेशनल टाइटल जीतकर देश का नाम रोशन किया।
इस टूर्नामेंट में सात देशों के दिग्गज मुक्केबाज़ शामिल हुए थे, लेकिन सभी की नज़रें मुख्य मुकाबले पर थीं - भारत के मनीष राघव बनाम थाईलैंड के अनुभवी बॉक्सर तनावत फोन्नाकु। खास बात यह थी कि फोन्नाकु के नाम पहले से ही 32 प्रोफेशनल जीतें दर्ज हैं और वह 2022 के विश्व चैंपियन रह चुके हैं। ऐसे में यह मुकाबला बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था।

शुरुआत से ही मुकाबला कांटे का रहा। दोनों बॉक्सर ने आक्रामक रुख अपनाया और पहले चार राउंड तक दर्शकों को सांसें रोक देने वाला खेल देखने को मिला। मनीष ने शानदार फुटवर्क, तेज़ पंच और बेहतरीन डिफेंस से विरोधी को कड़ी टक्कर दी। पाँचवें राउंड की शुरुआत में ही माहौल बदल गया। मनीष ने सही समय पर करारा पंच जड़ा, जिससे फोन्नाकु सीधे ज़मीन पर जा गिरे। रेफरी ने नॉकआउट का ऐलान किया और इसी के साथ मनीष राघव ने शानदार जीत दर्ज कर ली।
यह जीत सिर्फ एक खिताब नहीं, बल्कि भारतीय मुक्केबाज़ी के लिए ऐतिहासिक पल है। मनीष की इस उपलब्धि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग के मंच पर मज़बूती से स्थापित कर दिया है। भोंडसी गाँव के लोग ही नहीं, पूरा गुरुग्राम और देशवासी गर्व से झूम उठे।
मनीष राघव की यह सफलता उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो छोटे कस्बों और गाँवों से बड़े सपने लेकर खेल की दुनिया में कदम रखते हैं। मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने साबित किया है कि चाहे विरोधी कितना भी अनुभवी क्यों न हो, जीत उसी की होती है जो आखिरी तक पूरी ताकत से लड़ता है।












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