Paris Olympics: मेडल विजेता भारतीय एथलीट इकोनमी क्लास में कर रहे सफर, जीतने के बाद बर्ताव शर्मनाक
पेरिस ओलंपिक में भारत को मिले एक-एक मेडल की ख़ुशी में पूरा देश झूम रहा था और हर कोई इन एथलीटों की तारीफ कर रहा था। अब भी एयरपोर्ट पर आते ही इन एथलीटों का स्वागत किया जा रहा है। सरकार के पदाधिकारी और कैबिनेट मंत्री इन मेडल विजेताओं से मुलाक़ात कर रहे हैं।
इन सबके बीच कुछ ऐसा भी देखने को मिला है जिसे शर्मनाक कहें, तो भी कम ही होगा। इस बारे में कोई चर्चा भी नहीं कर रहा है। पेरिस से वापस भारत लौट रहे मेडल विजेताओं के लिए फ्लाईट सुविधाएँ सरकारी व्यवस्था की कलई खोलने वाली हैं।

मेडल जीतने के बाद देश आने वाले विजेता खिलाड़ियों को इकोनमी क्लास की यात्रा करनी पड़ रही है। इस तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं है। मेडल जीतने वाले खिलाड़ी इतने ज्यादा भी नहीं थे कि इनको बिजनेस क्लास में यात्रा का टिकट उपलब्ध नहीं कराया जा सके।
एक तरफ जहाँ अलग-अलग स्पोर्ट्स फेडरेशन के कई पदाधिकारी और राज्य संघों के लोग वहां गए हैं। उनका खर्चा भी फेडरेशनों ने ही उठाया है। दूसरी तरफ मेडल जीतकर आने वाले प्लेयर्स की सुध लेने वाला कोई नहीं है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के जितने भी पदाधिकारी पेरिस गए हैं, सभी सरकार के खर्चे पर गए हैं। उन पर इतने पैसे खर्च किये जा सकते हैं तो एक मेडल विजेता को बिजनेस क्लास का टिकट क्यों नहीं दिया जा सकता?
हर खेल बॉडी पर सरकारी तंत्र इस तरह हावी है कि प्लेयर्स की तरफ ध्यान देने वाला कोई नहीं है। हाल ही में हॉकी टीम का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें टीम एयर इंडिया की फ्लाईट से इंडिया आ रही थी और इनकोमी क्लास की टिकट से ही प्लेयर्स आए थे। हॉकी प्लेयर्स अमित रोहिदास और श्रीजेश आज ही इकोनमी क्लास से आये हैं।
भारत आने के बाद मेडल विजेताओं से केन्द्रीय मंत्री मुलाकातें कर रहे हैं, उनको माला पहना रहे हैं और मीडिया के सामने आकर गुणगान कर रहे हैं लेकिन व्यवस्थाओं के नाम पर कोई ध्यान नहीं है। पीएम मोदी खुद मेडल जीतने वाले हर खिलाड़ी से फोन पर बात कर चुके हैं।
नीरज चोपड़ा वापस नहीं आए और वहां से ही जर्मनी चले गए हैं। उनके अलावा हॉकी टीम, मनु भाकर, सरबजोत, स्वप्निल कुसाले और अमन सहरावत ही बचे थे जिनको बिजनेस क्लास में लाया जा सकता था। भारत ने चीन या यूएस की तरह सैकड़ों मेडल भी नहीं जीते थे कि बिजनेस क्लास का बोझ ज्यादा आ रहा था।
बीसीसीआई एक प्राइवेट संस्था होने के बाद भी अपने प्लेयर्स को बिजनेस क्लास की यात्रा कराती है और ओलंपिक में मेडल लाने वाले प्लेयर्स के पीछे देश की पूरी सरकार खड़ी होने के बाद भी ट्रेवल इकोनमी क्लास का मिल रहा है, इस शर्मनाक प्रथा को बदलना होगा।












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