उम्मीदों पर खरा उतरना इतना आसान नहीं, IOA ने की गोल्ड मेडलिस्ट मीराबाई चानू की तारीफ
नई दिल्ली, 31 जुलाई: भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू टोक्यो ओलंपिक्स में कमाल करने के बाद कॉमनवेल्थ गेम में भी पूरी तरह तिरंगे का परचम लहरा चुकी है। चानू ने गोल्ड मेडल जीता है और 49 किलोग्राम भार वर्ग में एक बार फिर भारत की सबसे बड़ी उम्मीद साबित हुईं हैं।

चानू इस खेल में इतनी बड़ी महारथी हैं कि उन्होंने यह बात सार्वजनिक तौर पर स्वीकार की है कि कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके लिए आसान ही थे। चानू की असली तैयारी 2 साल बाद पेरिस में होने वाले ओलंपिक को लेकर है। फिलहाल यह समय कॉमनवेल्थ खेलों में भारतीय वेटलिफ्टर की सुनहरी गाथा लिखने का है।
इस अवसर पर इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने मीराबाई चानू को बधाई दी है जिन्होंने बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन यह उपलब्धि हासिल की थी।
आईओ के एक्टिंग प्रेसिडेंट अनिल खन्ना ने एक बयान में कहा कि मीराबाई चानू एक पदक को हासिल करने की सबसे बड़ी दावेदार थी और उन्होंने उम्मीदों पर खरा उतर कर दिखाया है जो आसान नहीं था। लेकिन इतने बेहतरीन तरीके से उन्होंने यह काम करके दिखाया और हम उनके लिए बहुत खुश हैं। उनको जो सहयोग दिया गया है उसका फल आज फिर मिल गया है।
"उन्होंने 90 किलोग्राम की लिफ्ट में खुद को चैलेंज किया। हालांकि वह नतीजा नहीं आया जो वे चाहतीं थीं लेकिन अपनी सीमाओं को लगातार विस्तारित करना मीराबाई चानू की प्रतिबद्धता है और वे भारत की वन ऑफ द बेस्ट एथलीट है। हम उनको और बाकी पदक हासिल करने वाले वेटलिफ्टरों को बधाई देते हैं जिनमें संकेत, गुरुराजा पुजारी और बिंदियारानी देवी शामिल हैं। इन्होंने अपनी अपनी कैटेगरी में अच्छा काम किया।"
भारत ने दूसरे दिन मीराबाई के स्वर्ण सहित कुल चार पदक जीते। साथी भारोत्तोलक संकेत सरगर (पुरुषों के 55 किग्रा में रजत), गुरुराजा पुजारी (पुरुषों के 61 किग्रा में कांस्य) और बिंदियारानी देवी (महिलाओं के 55 किग्रा में रजत) ने दूसरे दिन भारत की पदक तालिका पूरी की।
तीसरे दिन उम्मीद है कि भारत और अधिक पदक जोड़ सकता है, जिसमें जेरेमी लालरिनुंगा (पुरुषों की 67 किग्रा श्रेणी) और पोपी हजारिका (महिलाओं की 59 किग्रा श्रेणी) शामिल हैं।












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