36 साल बाद गोल्ड दिलाने वाले Avinash Sable की Net Worth कितनी है? जानिए दौड़ से दौलत तक का सफर
Asian Athletics Championships 2025: एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में भारत ने जबरदस्त प्रदर्शन किया, जहां अविनाश साबले (Avinash Sable ) ने मेंस की 3000 मीटर स्टीपलचेज में गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया, तो वहीं ज्योति याराजी (Jyothi Yarraji) ने महिलाओं की 100 मीटर हर्डल में नया चैम्पियनशिप रिकॉर्ड बनाते हुए अपनी जीत से भारत की चमक और बढ़ा दी।
अविनाश साबले ने 36 साल बाद भारत के लिए मेंस की 3000 मीटर स्टीपलचेज में गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रच दिया। साबले से पहले एशियाई चैंपियनशिप के इस इवेंट में दिना राम ने गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने 1989 में मेंस स्टीपलचेज में गोल्ड अपने नाम किया था। हर्बल सिंह पहले भारतीय एथलीट हैं जिन्होंने 1975 में स्टीपलचेज में भारत को गोल्ड दिलाया था।

ऐसे में अब यह उपलब्धि न केवल अविनाश साबले के खेल करियर की बुलंदी है, बल्कि उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता (Financial stability) और सामाजिक पहचान का भी नया अध्याय खोलती है। आइए अविनाश की नेटवर्थ उनकी कमाई के सोर्स और करियर की चुनौतियों पर एक नजर डालते हैं।
अविनाश साबले: सफलता की कहानी
अविनाश ने 2019 में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था, लेकिन 2025 में उन्होंने 8:20.92 के अपने सर्वश्रेष्ठ सीजन टाइमिंग के साथ गोल्ड अपने नाम किया। 36 साल के लंबे इंतजार के बाद यह भारत का पहला स्टीपलचेज गोल्ड था, जो अविनाश की कड़ी मेहनत, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है।
करियर के दौरान आर्थिक संघर्ष
अविनाश साबले का करियर शुरुआत में आर्थिक चुनौतियों से भरा था। एक मिडिल क्लास फैमिली से आने वाले अविनाश को अपने सपनों को पूरा करने के लिए कई बार आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। खेल में सफलता के साथ-साथ उन्हें अपने फाइनैंशियल रिसोर्सेस को भी मजबूत करना था। शुरुआत के दिनों में स्पॉन्सरशिप और सरकारी सहायता सीमित थी, जिससे उनकी ट्रेनिंग और जरूरी सुविधाओं पर असर पड़ा।
कमाई के सोर्स और नेटवर्थ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 तक अविनाश साबले की नेटवर्थ का अनुमान लगभग 3 से 5 करोड़ रुपए के बीच है। उनकी कमाई के सोर्स में सैलरी और बोनस, स्पॉन्सरशिप एग्रीमेंट्स, प्राइवेट इवेंट्स और मैराथन शामिल हैं।
दौड़ से दौलत तक का सफर
अविनाश साबले का सफर केवल खेल में सफलता तक सीमित नहीं रहा। उनके परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा भी बहुत महत्वपूर्ण रही। अविनाश महाराष्ट्र के बीड जिले के मांडवा गांव से आते हैं। उनका जन्म 13 सितम्बर 1994 को हुआ था।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अविनाश साबले की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कठिनाइयों के बावजूद लगातार मेहनत और समर्पण से उन्होंने देश के लिए इतिहास रचा और खुद का जीवन स्तर बेहतर किया।












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