बांस की छड़ी से की शुरुआत, पिता अब भी करते हैं मजदूरी, अरशद नदीम के संघर्ष की कहानी भावुक कर देगी

Arshad Nadeem Life Story: पेरिस ओलंपिक के जैवलिन थ्रो मुकाबले में पाकिस्तान के अरशद नदीम ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। रशद नदीम ने नया ओलंपिक रिकॉर्ड भी बना लिया है और अरशद ने 92.97 मीटर का थ्रो फेंका था। इसके बाद से पाकिस्तानी खिलाड़ी अरशद नदीम की जिंदगी और संघर्ष की कहानी जानने को लेकर लोगों में उत्सुकता है।

भारतवासियों में भी अरशद नदीम की जिंदगी से जुड़ी बातों को जानने की इच्छा है क्योंकि अरशद नदीम ने भारत के गोल्डन ब्वॉय नीरज चोपड़ा से स्वर्ण पदक छीना है। जिसकी वजह से नीरज चोपड़ा पेरिस ओलंपिक में सिल्वर मेडल ले पाए हैं। अब अरशद नदीम के पिता ने अपने बेटे के संघर्ष की कहानी खुद बयां की है।

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अरशद नदीम के पिता बोले- सोचा नहीं था बेटा, दुनिया के सबसे बड़े खेल में गोल्ड लाएगा

अरशद नदीम का परिवार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मियां चानू गांव में रहता है। अरशद नदीम के पिता मुहम्मद अशरफ ने बताया कि बेटे का मैच देखने के लिए हमारे तीन कमरों वाले घर में एलसीडी टेलीविजन लगाया गया। अरशद नदीम के पिता मुहम्मद अशरफ गांव में राजमिस्त्री का काम करते हैं। जिस दिन उनके बेटे अरशद नदीम को पेरिस ओलंपिक के भाला फेंक के फाइनल में भाग लेना है, उस दिन सुबह अशरफ के पिता अपने हर दिन के काम में लगे हुए थे।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मुहम्मद अशरफ ने कहा था, ''आज मेरा बेटा ओलंपिक में भाग ले रहा है। लोग कहते हैं कि ये दुनिया के सबसे बड़े खेल है। अगर वह ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतता है तो तो यह मियां चानू के साथ-साथ पूरे पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी बात होगी।''

मुहम्मद अशरफ ने जब ये बात कही थी कि तो उन्हें पता था कि उनका कहा हुआ सच हो जाएगा और उनका बेटा गोल्ड मेडल जीतेगा। नदीम 92.97 मीटर की थ्रो के साथ ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले पाकिस्तानी ट्रैक और फील्ड एथलीट बन गए, जिससे उन्हें गोल्ड मेडल मिला।

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अरशद नदीम के संघर्ष की कहानी, पिता मुहम्मद अशरफ की जुबानी

पिता मुहम्मद अशरफ ने याद करते हुए कहा,

''अपनी युवावस्था से लेकर अब तक, मैंने राजमिस्त्री का काम किया है और अरशद अक्सर मेरे साथ काम पर जाता था, इसके अलावा गांव में नेजा बाजी (टेंट पेगिंग) भी देखता था। 2010 के आसपास, उसने मुझसे उसके लिए क्रिकेट बैट और बॉल लाने को कहा। गांव के मैदान में ही अरशद ने क्रिकेट खेलना शुरू किया था, उसके बाद उसके दो भाइयों ने उसे एथलेटिक्स में शामिल होने के लिए राजी कर लिया। अरशद ने गांव के स्कूल में शॉट पुट, डिस्कस थ्रो के साथ-साथ हैमर थ्रो और लॉन्ग जंप में भी हाथ आजमाया।''

पिता ने कहा,

"मेरे बेटे को मियां चन्नू शहर में एक नया घर मिला है जो पूरी तरह से सुसज्जित है। मैंने अपनी पूरी जिंदगी एक मजदूर के रूप में काम किया है, लेकिन देखिए मेरा बेटा कितनी दूर चला गया है।"

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अरशद नदीम हमेशा से क्रिकेटर बनना चाहते थे

अरशद ने रोहा नदीम द्वारा होस्ट किए गए यूट्यूब शो बियॉन्ड द थ्रो में बताया था,

"मैं हमेशा से ही क्रिकेटर बनना चाहता था। लेकिन मेरे भाई मुझे एथलेटिक्स शुरू करने के लिए कहते थे क्योंकि यह एक व्यक्तिगत खेल है। 2012 में, मैंने स्कूल में दौड़ के अलावा डिस्कस थ्रो, भाला फेंक जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। मुझे याद है कि स्कूल में केवल दो एथलीट हुआ करते थे, जो डिवीजनल स्तर पर आयोजित कराए जाते थे।"

अरशद के पुराने दिन: कहा- एक वक्त था, जब मैं बांस की छड़ी से भाला बनवाता था

अरशद ने पंजाब में अलग-अलग प्रतियोगिताओं में भाग लेने से पहले गांव के मैदान में युवा खिलाड़ी को सबसे पहले कोच राशिद अहमद साकी ने ट्रेनिंग दी थी। 2014 में ही अरशद पहली बार पंजाब यूथ फेस्टिवल में भाग लेने के लिए लाहौर गए थे, उसके बाद एक दोस्त ने उन्हें पाकिस्तान वाटर एंड पावर डेवलपमेंट अथॉरिटी ट्रायल में शामिल होने के लिए कहा।

शो में अरशद ने याद करते हुए कहा,

"एक समय था जब मैं गांव के कारीगर के पास बांस की छड़ी लेकर जाता था और उसे भाले का आकार देने के लिए कहा था। उसी से मैं जमीन पर अभ्यास करता था। साकी साहब (सबसे पहले कोच) मुझे घंटों बताते थे कि कैसे अपनी कोहनी का इस्तेमाल करके भाला फेंकना है और यह मेरी पहली यादें हैं जब मैंने भाला फेंकने के खेल को गंभीरता से लिया।"

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जब अरशद ने खुद को महीनेभर में साबित कर दिखाया था

पांच बार के पाकिस्तान के राष्ट्रीय चैंपियन और कोच सैयद हुसैन बुखारी ने पहली बार WAPDA ट्रायल में अरशद को देखा था। जिसके बाद उन्हें फिर से ट्रायल के लिए बुलाया गया। लेकिन 60 मीटर से कम फेंकने के कारण,अरशद को पहले ट्रायल में नहीं चुना गया और फिर उन्होंने आगे सुधार करने के लिए एक महीने का समय मांगा।

अरशद ने कहा,

"एक एथलीट ने 60 मीटर का थ्रो किया था, लेकिन मैं अड़ा था कि मैं खाली हाथ घर नहीं जाऊंगा। मैंने अधिकारियों से एक महीने का समय देने का अनुरोध किया और बुखारी सर के साथ ट्रेनिंद के बाद, मैं 65 मीटर का थ्रो करने में सक्षम था, जिसके बाद मुझे WAPDA अनुबंध मिला।"

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जब कोच ये देखकर हैरान थे कि अरशद नदीम कम उम्र में कोहनी से कितनी ताकते लगाते हैं

कोच बुखारी ने कहा कि, 'मैंने ट्रायल के दौरान अरशद ने पहली बार स्टेडियम में देखा था। उसने मेरे ऊपर अपनी छाप छोड़ी थी। मैं इस बात से प्रभावित था कि वह इतनी कम उम्र में अपनी कोहनी से कितनी ताकत पैदा कर सकता था। वह कच्चा था और पंजाब के एक आम गांव के युवक की तरह दिखता था। मैं उसे जो भी सिखाता था, वह उसे जल्दी समझ लेता था और जब उसने WAPDA में शामिल होने के चार महीने के भीतर 70 मीटर का आंकड़ा पार कर लिया, तो मुझे पता चल गया कि वह और आगे जा सकता है।"

2015 के राष्ट्रीय खेलों में 70.46 मीटर के थ्रो के बाद अरशद ने 2016 में गुवाहाटी में SAFF खेलों में 78.33 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता। पिछले आठ सालों में अरशद ने 85 मीटर के निशान को नौ बार पार किया है, जिसमें 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में 90.18 मीटर का थ्रो भी शामिल है।

2016 से ही नीरज चोपड़ा को चुनौती दे रहे हैं अरशद नदीम

2022 में कोहनी की चोट और उसके बाद की छोटी-मोटी तकलीफों ने उन्हें 2023 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 87.82 मीटर की थ्रो के साथ रजत पदक जीतने से नहीं रोका। अरशद 2016 से ही नीरज चोपड़ा के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं।

अरशद ने कहा, "हम दोनों अपना सर्वश्रेष्ठ देने का लक्ष्य बना रहे हैं। हमारी दोस्ती 2016 से बरकरार है और मैं चाहता हूं कि यह और मजबूत हो।"

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