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Khelo India Winter Games 2026: पहियों से आइस तक का सफर, आरुष और हिया ने पेश की मिसाल

Aarush Tiwari And Hiya Adlakha: लद्दाख की जमा देने वाली ठंड और कम ऑक्सीजन के बीच जब आरुष तिवारी और हिया अदलखा आइस रिंक पर उतरते हैं, तो उनकी स्केटिंग में सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि भविष्य के सपने दिखाई देते हैं। खेलो इंडिया विंटर गेम्स (KIYG) 2026 में हरियाणा की हिया ने 'नोविस गर्ल्स' वर्ग में स्वर्ण और दिल्ली के आरुष ने 'नोविस बॉयज़' वर्ग में कांस्य पदक जीतकर यह साबित कर दिया है कि भारत में फिगर स्केटिंग का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

आरुष तिवारी: पहियों से बर्फ तक का सफर (Aarush Tiwari And Hiya Adlakha)

दिल्ली के 14 वर्षीय आरुष तिवारी की कहानी बदलाव की मिसाल है। महज दो साल की उम्र में रोलर स्केट्स पहनने वाले आरुष ने जब आइस स्केटिंग की ओर रुख किया, तो उन्हें अपनी पूरी तकनीक को शून्य से दोबारा सीखना पड़ा। उनका यह अनुभव इतना गहरा था कि उन्होंने इस पर 'व्हील्स टू आइस, बोर्न टू राइज' नामक किताब भी लिख डाली।

Aarush Tiwari 1

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी छोड़ी अपनी छाप

देहरादून के आइस हिमाद्री रिंक में कोच जे.एस. साहनी से प्रशिक्षण लेने वाले आरुष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी है। साल 2025 में फिलीपींस में हुए एशियन ओपन में कांस्य पदक जीतना उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ रहा। आरुष का मानना है कि लेह जैसी ऊंचाई पर खेलना शारीरिक से ज्यादा मानसिक मजबूती की परीक्षा है।

हिया अदलखा के रगों में बसा है खेल

15 वर्षीय हिया अदलखा के रगों में खेल बसा है। उनकी मां सपना गुप्ता अंतरराष्ट्रीय रिदमिक जिम्नास्टिक्स जज हैं और बड़ी बहन लाइफ अदलखा ने भी देश का प्रतिनिधित्व किया है। हिया के लिए फिगर स्केटिंग एक पूर्णकालिक साधना है। देश में कोचों की कमी के कारण वे अक्सर खुद अपने वीडियो देखकर तकनीक सुधारती हैं।

हिया की मेहनत का फल जून 2025 में मिला जब उन्होंने अपना पहला राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता। वे अमेरिकी स्केटर एलिसा ल्यू और अपनी बहन की जुझारू प्रवृत्ति से प्रेरणा लेती हैं। हिया का मानना है कि फिगर स्केटिंग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है और चीन के हार्बिन में हुए अंतरराष्ट्रीय शिविर ने उनके वैश्विक दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है।

इन दोनों युवा एथलीटों के लिए चीन के हार्बिन में आयोजित ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया का ट्रेनिंग कैंप टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। वहां उन्होंने न केवल स्केटिंग की बारीकियां सीखीं, बल्कि एंटी-डोपिंग और पेशेवर आचरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जानकारी हासिल की।

भारत में अब लद्दाख और देहरादून जैसे स्थानों पर कृत्रिम आइस रिंक की उपलब्धता ने इन खिलाड़ियों की राह आसान की है। खेलो इंडिया जैसे मंचों ने फिगर स्केटिंग को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है, जिससे अब इन किशोरों के लिए ओलंपिक जैसे बड़े मंचों का सपना हकीकत के करीब लगने लगा है।

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