गुलामी की जंज़ीर से आज़ादी की उड़ान तक: मेजर ने ठुकराई थी हिटलर की पेशकश, अभी कोई पुलिस में DSP तो कोई रेलवे में!
देश की आजादी से पहले एक खेल सबसे ज्यादा लोकप्रिय था और उसका नाम हॉकी है। जादूगर उसे कहा जाता है, जिसके पास पलक झपकते ही कुछ असाधारण करने की क्षमता हो। मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर इसलिए कहा गया था और भारत को ओलंपिक में उन्होंने कई गोल्ड मेडल दिलाए थे।
आजादी से पहले और बाद की हॉकी में भी काफी फर्क देखने को मिला है। अपने जीवन में 1000 से भी ज्यादा गोल दागने वाले ध्यानचंद के स्टिक से गेंद चिपक जाया करती थी। ग्रास ट्रेक पर इस तरह का खिलाड़ी वर्ल्ड में कोई नहीं हुआ। सिंथेटिक ट्रेक काफी बाद में आए।

हॉकी में जादुई प्रदर्शन के कारण ध्यानचंद को 1927 में लांस नायक बनाया गया। इसके बाद उनका कद और ऊपर होता चला गया। वह लेफ्टिनेंट कर्नल से होते हुए सूबेदार बने। अंत में उनको मेजर की उपाधि मिली और मेजर ध्यानचंद के नाम से जाना जाने लगा। उनके खेल का प्रभाव ही था कि जर्मनी के शासक हिटलर ने उनको अपने देश से खेलने का निमंत्रण दिया था।
हिटलर ने दिया मेजर को ऑफ़र
बात 1936 के बर्लिन ओलंपिक की है, भारत और जर्मनी का मुकाबला देखने के लिए हिटलर आया था और ध्यानचंद का गेम देखकर हिटलर दंग रह गया। भारत ने इस मुकाबले में जर्मनी को मौका ही नहीं दिया और 8-1 के बड़े अंतर से जीत दर्ज के। हिटलर को लगा कि इस जादूगर खिलाड़ी को अपनी टीम में होना चाहिए। हिटलर का ऑफ़र मिलने के बाद ध्यानचंद ने इसे ठुकरा दिया और देशप्रेम की सच्ची मिशाल पेश की।
आजादी से पहले भी जीते गोल्ड मेडल
भारतीय हॉकी का इतिहास आजादी से पहले और बाद में काफी सुनहरा रहा है। 1928 में एम्सटर्डम ओलंपिक में गोल्ड जीतने के बाद भारत ने 1932 के लॉस एंजिल्स और 1936 के बर्लिन के ओलंपिक में गोल्ड जीता। देश आजाद होने के बाद 1948 में भारत ने लंदन ओलंपिक में हॉकी का गोल्ड जीता और यह सिलसिला चलता था।
देश आजाद होने के बाद प्रदर्शन
भारतीय टीम ने 1952, 1956, 1964 और 1980 के ओलंपिक में गोल्ड जीता। इसके बाद मेडल आने बंद हो गए और भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन में निरतंर गिरावट आते चली गई जो अगले 40 सालों तक ऐसे ही रही। हालांकि प्लेयर्स को इस दौरान सरकार ने पुलिस और अन्य विभागों में नौकरी दी, जैसे ध्यानचंद को सेना में पद मिला था। कुछ प्लेयर्स ऐसे भी हैं जो सेना का हिस्सा भी रहे।
40 साल के बाद मिली ख़ुशी
हॉकी में भारत को मेडल नहीं मिलने का अकाल खत्म साल 2020 के टोक्यो ओलंपिक में हुआ। इस बार भारत ने एक नया इतिहास रचते हुए कांस्य पदक मैच में जर्मनी को हराते हुए मेडल अपने नाम कर लिया। इसके बाद लगातार दूसरी बार पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत ने एक बार फिर से पिछला प्रदर्शन दोहराते हुए कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। इस बार भारत ने स्पेन को पराजित कर दिया।
आज खिलाड़ी हैं बड़े पदों पर अफसर
भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी इस समय पुलिस और अन्य विभागों में अफसर हैं। कप्तान हरमनप्रीत सिंह पंजाब पुलिस में डीएसपी हैं और मनप्रीत सिंह के पास भी यही पद है। मनदीप सिंह, शमशेर सिंह आदि खिलाड़ी भी पंजाब पुलिस में डीएसपी के पद पर पोस्टेड हैं। सुखजीत सिंह पंजाब नेशनल बैंक में हैं। उनके अलावा जरमनप्रीत आयकर विभाग में कार्यरत हैं। गुरजीत और हार्दिक पीसीएस अधिकारी हैं। अमित रोहिदास रेलवे में अफसर हैं और उनकी टीम से खेलते भी हैं।
पुलिस के अलावा सेना में भी अफसर
उत्तर प्रदेश सरकार में ललित उपाध्याय को पुलिस विभाग में विशेष कार्याधिकारी बनाया गया था। टोक्यो ओलंपिक के बाद ऐसा किया गया था। विवेक सागर मध्य प्रदेश पुलिस में डीएसपी हैं। जहाँ तक सेना से खेलने वाले प्लेयर्स की बात है, तो कैप्टन संदीप सिंह भारत के लिए हॉकी खेले हैं, उनको आर्मी में कैप्टन बनाया गया था। मनदीप सिंह भी खेलने के बाद आर्मी में सेवाएं दे चुके हैं।












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