ये तो कमाल का गोलकीपर है, अकेले ही टीम को पहुंचा दिया सेमीफाइनल में

ब्राजील अगर विश्वकप प्रतियोगिता से बाहर हो गया तो यह लिवाकोविच की वजह से मुमकिन हुआ। उन्होंने पेनल्टी शूटआउट के दौरान ब्राजील के रोड्रिगो सिल्वा के शॉट को गोल में जाने से बचा लिया।

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डोमिनिक लिवाकोविच- विश्वकप फुटबॉल प्रतियोगिता के एक ऐसे खिलाड़ी जिन्होंने केवल अपने दम पर टीम को पहुंचा दिया सेमीफाइनल में। ये नाम है क्रोएशिया के गोलकीपर का। प्री क्वार्टर फाइनल में उन्होंने जापान के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में तीन गोल बचाये थे। फिर इसके बाद उन्होंने क्वार्टर फाइनल में दुनिया की नम्बर एक टीम ब्राजील के खिलाफ यादगार प्रदर्शन किया। ब्राजील अगर विश्वकप प्रतियोगिता से बाहर हो गया तो यह लिवाकोविच की वजह से मुमकिन हुआ। उन्होंने पेनल्टी शूटआउट के दौरान ब्राजील के रोड्रिगो सिल्वा के शॉट को गोल में जाने से बचा लिया। जब कि मार्किनोस उनके सामने नर्वस हो गये अपना शॉट गोल के पोल पर मार बैठे। लिवाकोविच ने ब्राजील के खिलाफ न केवल पेनल्टी बचायी बल्कि 7 फील्ड गोल भी बचाये। कुल मिला कर उन्होंने 11 बचाव किये। इनमें से अगर वे एक बार भी चूक गये होते तो ब्राजील 3-2 या 4-2 से जीत सकता था। लेकिन डोमिनिक लिवाकोविच क्रोएशिया के गोलपोस्ट पर दीवार की तरह जमे रहे जिससे ब्राजील के मंसूबे पूरे नहीं हुए।

क्रोएशिया के नये हीरो

लिवाकोविच अब अपने देश के लिए हीरो बन गये हैं। 40 लाख की आबादी वाला क्रोएशिया अपने इस गोलकीपर पर फूले नहीं समा रहा है। राजधानी जगरेब में क्रिसमस से पहले ही उत्सव का माहौल बन गया है। खुश होना लाजिमी है। मध्य यूरोप का यह छोटा सा देश लगातार दूसरी बार विश्वकप फुटबॉल के सेमीफाइनल में जो पहुंचा है। वैसे तो इस कामयाबी में टीम के सभी खिलाड़ियों का योगदान है। लेकिन इनमें सबसे खास योगदान लिवाकोविच का है। अगर उन्होंने शानदार गोल बचाव नहीं किये होते तो टीम यहां तक नहीं पहुंच सकती थी। पेनल्टी शूटआउट किसी मैच का वह निर्मम पल होता है जब एक गोलकीपर को तलवार की धार पर चलना पड़ता है। चूके नहीं कि काम तमाम। उसे किक लेने वाले खिलाड़ी का मनोविज्ञान समझना होता है। पूर्वानुमान लगाना होता है। ये कोई आसान काम नहीं। लिवाकोविच ने मौजूदा विश्वकप में अभी तक 5 पेनल्टी बचाये हैं जो एक दुर्लभ प्रदर्शन है।

जब एक खिलाड़ी पर टिक जाता है मैच

नौकआउट दौर में अगर फुलटाइम (90 मिनट) में मैच बराबर रहा तो फैसले के लिए 30मिनट का अतिरिक्त समय मिलता है। अगर 120 मिनट में भी मैच का नतीजा तय नहीं हो पाता तब पेनल्टी शूटआउट का सहारा लिया जाता है। इसके पहले 120 मिनट में क्या हुआ, टीम के बाकी 10 खिलाड़ियों ने कैसा खेल दिखाया, इसकी कोई अमियत नहीं रहती। यह पांच मिनट ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता जब पेनल्टी शूटआउट लिया जाता है। इस मोड़ पर जीत और हार की सारी जिम्मेदारी एक अकेले खिलाड़ी (गोलकीपर) के कंधों पर आ जाती है। आमतौर पर पेनल्टी को शर्तिया गोल माना जाता है। अगर कोई गोलकीपर पेनल्टी का भी बचाव कर ले तो उसकी जयजयकार होनी ही चाहिए। लिवाकोविच ने एक बार नहीं बल्कि लगातार दो बार ये कारनामा दिखाया।

मजबूत गोलकीपिंग क्रोएशिया की खासियत

डोमिनिक लिवाकोविच 2019 के बाद से क्रोएशिया के नियमित गोलकीपर बने हैं। क्रोएशियाई फुटबॉल की एक सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह फॉरवर्ड और बैक से अधिक गोलकीपर के खेल को निखारने में मेहनत करता है। लिवाकोविच से पहले डेनियल सुबासिच क्रोएशिया के गोलकीपर थे। उन्होंने ने भी 2018 के विश्वकप में हैरतअंगेज प्रदर्शन किया था। प्री क्वार्टर फाइनल में डेनमार्क के खिलाफ जब पेनल्टी शूटआउट हुआ तो उन्होंने तीन गोल बचाये थे। फिर इसके बाद डेनियल ने क्वार्टर फाइनल में रूस के खिलाफ भी पेनल्टी शूटआउट में दो गोल के बचाव किये। यानी 2018 में भी क्रोएशिया अपने गोलकीपर के कारण ही सेमीफाइनल में पहुंचा था। 2022 में भी ऐसा ही हुआ। यानी कोएशिया की टीम में हमेशा से मजबूत गोलकीपर रहे हैं।

लिवाकोविच विश्वकप के श्रेष्ठ गोलकीपर

पेनल्टी को इसलिए शर्तिया गोल माना जाता है क्यों कि वह गोलपोस्ट से केवल 12 गज दूर से लिया जाता है। आमतौर पर पेनल्टी किक की रफ्तार 112 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है। (मौके के हिसाब से गेंद की रफ्तार कम भी हो सकती है) जब 12 गज की दूरी से कोई तेज शॉट गोल में आता है तो गोलकीपर का रिएक्शन टाइम बहुत कम हो जाता है। ऐसे में पेनल्टी को बचाना गोलकीपर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है। लिवाकोविच दुनिया के तीसरे ऐसे गोलकीपर हैं जिन्होंने विश्वकप के किसी एक मैच में चार में से तीन पेनल्टी बचा लिये। इसके पहले पुर्तगाल के गोलकीपर रिकार्डो ने 2006 के विश्वकप में इंग्लैंड के खिलाफ और क्रोएशिया के डेनियल ने 2018 में डेनमार्क के खिलाफ ये कारनामा किया था। लिवाकोविच 27 साल के हैं और किसी जिमनास्ट की तरह लचीले हैं। उनकी डाइविंग और जम्पिंग की टाइमिंग कमाल की है। अधिकतर मौकों पर उनका पूर्वानुमान भी सटीक होता है। तनाव के समय वे बिल्कुल शांत रहते हैं इसलिए उनकी एकाग्रता बनी रहती है। फुटबॉल में पेनल्टी को बचाना, हारी हुई बाजी जीतने की तरह है।

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