WTC Final: इंग्लैंड के ओवल में फास्ट बॉलर भी चले और स्पिनर भी

इंग्लैंड के द ओवल में तेज गेंदबाज सफल रहे हैं लेकिन स्पिनर भी कम नहीं हैं। कुछ ऐसे मैच रहे हैं जहाँ स्पिनरों ने कमाल किया है।

The Oval

WTC Final: विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भारत चार तेज गेंदबाज और एक स्पिनर के साथ उतरा है। इस बात पर बहुत दिनों तक बहस चली कि ओवल की पिच पर फास्ट बॉलर चलेंगे या स्पिनर ? इसका जवाब मैच के दिन और मौसम पर निर्भर करता है। इस पिच पर तेज गेंदबाजों ने अगर कमाल किया है तो स्पिनर भी पीछे नहीं हैं।

तेज गेंदबाज भी चले और स्पिनर भी

इंग्लैंड के तेज गेंदबाज डेवोन मैलकम ने 1994 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरी पारी में 57 रन दे कर 9 विकेट लिये थे। इस टेस्ट में इंग्लैंड ने दक्षिण अफ्रीका को 8 विकेट से हराया था। इसी तरह श्रीलंका के यशस्वी स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने 1998 में इग्लैंड के खिलाफ दूसरी पारी में 65 रन दे कर 9 विकेट लिये थे। सोने पे सुहागा ये कि मुरलीधरन ने पहली पारी में भी 7 विकेट लिये थे। यानी उन्होंने इस मैच में 16 विकेट लेकर अकेले दम पर इंग्लैंड को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। श्रीलंका ने इस टेस्ट में इंग्लैंड को 10 विकेट से हराया था। ओवल में भारत की तरफ से सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का रिकॉर्ड स्पिनर के नाम पर ही दर्ज हैं। 1971 में भारत के महान स्पिनर भगवत चंद्रशेखर ने इंग्लैंड के खिलाफ 6 विकेट भारत को ऐतिहासिक जीत दिलायी थी। यानी इस विकेट पर फास्ट बॉलर और स्पिनर, दोनों कमाल कर सकते हैं।

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माइकल होल्डिंग- ओवल में खौफनाक फास्ट बॉलिंग

आधुनिक दौर में डेवोन मैलकम, माइकल होल्डिंग, डेनिस लिली, रिचर्ड हैडली, वसीम अकरम, इयान बॉथम, मैलकम मार्शल जैसे तेज गेंदबाज ओवल में अपनी गेंदबाजी का सिक्का जमा चुके हैं। माइकल होल्डिंग ने 1976 में इंग्लैंड के खिलाफ पहली पारी में 8 विकेट लिये थे। दूसरी पारी में भी उन्होंने 6 विकेट लिये थे। होल्डिंग ने इस मैच में अपनी फास्ट बॉलिंग से खौफ पैदा कर दिया था। पहले चार दिन खूब रन बने। लेकिन पांचवें दिन पिच का मिजाज एकदम से बदल गया। अंतिम दिन इंग्लैंड को जीतने के लिए 392 रन बनाने थे। लेकिन ये पिच वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों के लिए स्वर्ग बन चुकी थी। इंग्लैंड के डेनिस एमिस ने पहली पारी में दोहरा शतक बनाया था। लेकिन दूसरी पारी में उन्हें होल्डिंग ने 16 रनों पर आउट कर दिया। इंग्लैंड की पूरी टीम केवल 203 रनों पर आउट हो गयी। इस तरह इंग्लैंड 231 रनों से यह टेस्ट मैच हार गया। माइकल होल्डिंग ने ओवल की पिच पर कुल 14 विकेट लिये थे।

1971- ओवल में भारत के स्पिनर

ओवल में भारत के सबसे सफल गेंदबाज भगवत चंद्रशेखर हैं। गुगली के शंहशाह चंद्रशेखर ने अपनी बेहतरीन गेंदाबाजी से इतिहास रच दिया था। उन्होंने न केवल भारत को इंग्लैंड में पहली टेस्ट विजय दिलायी थी बल्कि इंग्लैंड में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने में अहम भूमिका निभायी थी। 19 अगस्त 1971 को ओवल में भारत और इंग्लैंड के बीच तीसरा टेस्ट मैच खेला गया था। पहली पारी में इंग्लैंड ने 355 रन बनाये। मध्यम तेज गेंदबाज एकनाथ सोल्कर को 3, भगवत चंद्रशेखर, बिशन सिंह बेदी और एस वैंकटराघवन को को 2-2 विकेट मिले थे। जवाब में भारत ने 284 रन बनाये।

ओवल- चंद्रशेखर के 6 विकेट

इंग्लैंड की दूसरी पारी शुरू हुई तो चंद्रशेखर की गुगली पर इंग्लैंड के बल्लेबाज नाचने लगे। 24 रन पर ही इंग्लैंड के 3 विकेट गिर गये। तीनों विकेट में चंद्रशेखर का हाथ रहा। एक को रन आउट किया और दो विकेट उन्होंने अपनी गेंद पर झटके। इंग्लैंड के धाकड़ बल्लेबाज जॉन एड्रिच, कीथ फ्लेचर, रे इलिंग्वर्थ (कप्तान) चंद्रशेखर की घुमती गेंदों को समझ नहीं पाये। एड्रिच और फ्लेचर खाता भी नहीं खोल सके जब कि इलिंग्वर्थ सिर्फ चार रन बना पाये। चंद्रशेखर ने कुल मिला कर 6 विकेट लिये। वैंकटराघवन को 2 और एक बेदी को एक विकेट मिला। इंग्लैंड की टीम 101 रनों पर ढेर हो गयी। अब भारत को जीत के लिए चौथी पारी में 173 रन बनाने थे।

भारत की जीत

173 रनों के लक्ष्य के लिए मैदान पर भारत की टीम उतरी। सुनील गावस्कर और अशोक मांकड़ ने पारी शुरू की। 2 रन के स्कोर पर ही गावस्कर 0 पर आउट हो गये। ये जोरदार झटका था। लेकिन भारत इस झटके से उबर गया। कप्तान अजीत वाडेकर के 45, दिलीप सरदेसाई के 40, विश्वनाथ के 33 रन से भारत मैच में वापस आ गया। इसके बाद विकेटकीपर फारुख इंजीनियर ने भारत के लिए मैच जिताऊ पारी खेली वे 28 रनों पर नाबाद रहे। उनके साथ सैयद आबिद अली भी 4 रनों पर नॉटआउट रहे। भारत ने यह टेस्ट मैच 4 विकेट से जीत लिया था। चंद्रशेखर ने इस मैच में कुल 8 विकेट लिये थे और जीत की आधारशिला रखी थी।

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