WPL 2023: जेवलिन थ्रो की Gold Medalist अब क्रिकेट के मैदान में बरपा रही कहर

महिला प्रीमियर लीग में हेली मैथ्यूज मुंबई इंडियंस के लिए खेल रही हैं, आरसीबी के खिलाफ उन्होंने धमाकेदार खेल का प्रदर्शन किया।

hayley matthews

WPL 2023 : क्या गजब की लड़की है ? एक सम्पूर्ण एथलीट है। लंबी और कद-काठी से मजबूत। जेवलिन थ्रो की गोल्डमेडलिस्ट है। भाला फेंक ने कंधे और बाहों को फौलाद की तरह मजबूत बना दिया। अब ये ताकत क्रिकेट के मैदान में तहलका मचा रही है। इस लड़की ने अपनी तूफानी बैटिंग से वीमेंस प्रीमियर लीग में समा बांध दिया है। वह लड़की जरूर है लेकिन उसके खेल में विवियन रिचर्ड्स की झलक है। बहुमुखी प्रतिभा की इस लड़की का नाम है हेली मैथ्यूज। वह मुम्बई इंडियंस की सलामी बल्लेबाज है। बारबाडोस (वेस्टइंडीज) की इस खिलाड़ी ने डब्ल्यूपीएल में अभी दो ही मैच खेले हैं लेकिन हर तरफ उसकी विस्फोटक बैटिंग ही चर्चा हो रही है। मैथ्यूज ने पहले मैच में गुजरात जाएंट्स के खिलाफ 31 गेंदों पर 3 चौकों और 4 छक्कों की मदद से 47 से रन बनाये थे। दूसरे मैच में आरसीबी के खिलाफ केवल 38 गेंदों पर 77 रन ठोक दिये जिसमें 13 चौके और एक छक्का शामिल था।

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क्रिकेट भी, जेवलिन थ्रो भी

हेली मैथ्यूज की उम्र अभी 24 साल है। विलक्षण प्रतिभा वाली खिलाड़ी हैं। वे वेस्टइंडीज द्वीप समूह के बारबाडोस की रहने वाली हैं। उनके घर में क्रिकेट का माहौल था। पिता बारबाडोस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेल चुके थे। बड़ा भाई भी क्रिकेटर था। पिता के कहने पर मैथ्यूज क्रिकेट को अपनाया लेकिन उनकी अन्य खेलों में भी रुचि थी। क्रिकेट के अलावा वे जेवलिन थ्रो की भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी थीं। उनकी मजबूत शारीरिक बनावट इस खेल के अनुरूप थी। कैरिबियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन नाम की संस्था हर साल वेस्टइंडीज द्वीप समूह के देशों के बीच एक एथेलेटिक्स की प्रतियोगिता आयोजित करती है जिसका नाम CARIFTA GAMES है।

जेवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल

हेली मैथ्यूज ने 2015 के CARIFTA GAMES में जेवलिन थ्रो का गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने अंडर-18 कैटेगरी की स्पर्धा में भाग लिया था। इसके पहले 2013 और 2014 में उन्होंने इस प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता था। इतना ही नहीं उन्होंने 2014 में आयोजित सेंट्रल अमेरिका एंड कैरिबियन जूनियर एथेलेटिक्स चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। यानी हेली मैथ्यूज जेवलिन थ्रो की एक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी थीं और इस खेल में भी वे बड़ा मुकाम बना सकती थीं। लेकिन एथेलेटिक्स को छोड़ कर उन्होंने क्रिकेट को अपनाया।

एक लड़की जो बनी लड़कों की टीम की कप्तान

कैरिबियन देशों के निवासी नैसर्गिक रूप से साहसी होते हैं। हेली मैथ्यूज बचपन में टॉम ब्वॉय थीं। जब वे केवल 8-9 साल की थीं तब एक दिन वे अपने स्कूल के ब्वॉज क्रिकेट टीम के कोच के पास गयीं और पूछा, क्या आप मुझे इस टीम में खेलने का मौका देंगे ? यह सवाल सुन कर कोच पहले तो सकपकाये लेकिन फिर कुछ सोच कर हामी भर दी। सोचा, आगे देखेंगे कि लड़की कैसा खेलती है। लेकिन 9 साल की ये लड़की जब मैदान पर उतरी तो उसने अपने खेल से लड़कों की छुट्टी कर दी। दो साल बाद हेली मैथ्यूज लड़कों की टीम कप्तान बन गयीं। फिर वे सबको चौंकाते हुए ब्वॉज अंडर-13 टीम की कप्तान बन गयीं। 16 साल की उम्र में उन्होंने वेस्टइंडीज की राष्ट्रीय महिला टीम में जगह बना ली थी।

शाई होप के साथ खेल चुकी हैं हेली मैथ्यूज

यह एक असामान्य बात थी कि एक लड़की, लड़कों की टीम का कप्तान बन गयी थी। वह खास थी। इसलिए ऐसा हुआ। उसकी बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग में इतनी धार थी कि उसे ये ओहदा देना पड़ा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हेली कितनी प्रतिभाशाली क्रिकेटर हैं। इतना ही नहीं 18 की उम्र तक वे पुरुषों की फर्स्ट डिविजन लीग में थीं। तब वे मेंस लीग में खेलने वाली अकेली लड़की थीं। वेस्टइंडीज पुरुष टीम के टेस्ट क्रिकेटर शाई होप और हेली मैथ्यूज पिकविक क्लब के लिए एक साथ खेलते थे। यहीं उन्होंने वेस्टइंडीज के पुरुष तेज गेंदबाजों पर चौका और छक्का लगाने की क्षमता हासिल की थी।

वे तो MI के रोहित और सूर्या की तरह शॉट लगाती हैं

हेली मैथ्यूज अगर WPL में चौके -छक्के बरसा रहीं तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं। वे तो पुरुष टीम के सीनियर खिलाड़ियों के साथ लड़-भिड़ कर क्रिकेटर बनी हैं। उन्होंने 82 टी-20 मैचों में एक शतक और 7 अर्धशतक लगाये हैं। इसके अलावा अपनी ऑफब्रेक गेंदबाजी से 78 विकट भी लिये हैं। वे एक हार्ड हिटर बल्लेबाज हैं, प्रभावशाली स्पिन गेंदबाज हैं और एक जबर्दस्त फील्डर भी। अभी वे वीमेंस प्रीमियर लीग में धमाकेदार प्रदर्शन कर रही हैं। पहले मैच में उन्होंने गुजरात जाएंट्स के खिलाफ अपनी धमक का आगाज कर दिया था। इस मैच में पिकअक शॉट पर लगाया गया उनका छक्का देखने लायक था। ऐसा लग रहा था कि मुम्बई इंडियंस के लिए रोहित शर्मा या सूर्य कुमार यादव ने यह शॉट लगाया है। दूसरे मैच में आरसीबी के खिलाफ पांचवें ओवर उन्होंने बैकफुट पर जा कर कवर के ऊपर से कट शॉट मार कर चौका लगाया था। क्रिकेट में इस शॉट को काफी कठिन माना जाता है। लेकिन मैथ्यूज ने इसे बहुत इत्मिनान से खेला था। उनकी कवर ड्राइव भी शानदार थी। 77 रनों की पारी में उन्होंने जितने भी शॉट्स लगाये वे किसी बड़े पुरुष खिलाड़ी की तरह दर्शनीय थे।

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