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World Test Championship Final: लाल गेंद से ही क्यों खेला जाता है टेस्ट क्रिकेट

WTC Final in hindi: टेस्ट क्रिकेट में लाल गेंद का इस्तेमाल क्यों होता है? भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल मुकाबले के अवसर पर आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण क्या है।

Why Test cricket is played only with red ball

Test Cricket Red Ball: भारत और ऑस्ट्रेलिया (IND vs AUS) के बीच टेस्ट मैचों का सबसे बड़ा मुकाबला कल यानी 7 जून को इंग्लैंड के ओवल में शुरू होगा। इस मैच को जीतने वाली टीम मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) साइकिल की विजेता बन जाएगी और अगले 2 सालों के लिए टेस्ट चैंपियन कहलाएगी।

फिलहाल मौजूदा चैंपियन न्यूजीलैंड है और 1 सप्ताह के अंदर आपको नए टेस्ट विजेता का दीदार भी हो जाएगा। टेस्ट मैचों के इस फेस्टिवल के मौके पर आइए जानते हैं कि यह फॉर्मेट दिन के मैचों में केवल लाल गेंद से ही क्यों खेला जाता है।

लाल रंग की विजिबिलिटी-

  • हालांकि टेस्ट मैचों में अब गुलाबी गेंद का इस्तेमाल भी होता है लेकिन डे नाइट मैच मैचों की संख्या आज भी बहुत कम है। इसलिए बहुतायत में टेस्ट क्रिकेट रेड बॉल से ही खेला जाता है और इसका सबसे बड़ा कारण विजिबिलिटी है। विजिबिलिटी यानी दृश्यता, यानी गेंद को देखने की क्षमता।

  • लाल गेंद दिन में बहुत बेहतर दिखती है और खिलाड़ियों की सफेद जर्सी पहनकर टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों को इसे देखने में कोई दिक्कत नहीं होती। अगर यहां सफेद गेंद का इस्तेमाल होता तो वह सफेद जर्सी के रंग के साथ मिलान करती और खिलाड़ियों को इसे देखने में दिक्कत होती।

  • सफेद गेंद कुछ समय बाद मैली हो जाती है। मिट्टी लगने से इसका रंग धीरे-धीरे ब्राउन होने लगता है जिससे दिन के समय ब्राउन पिच पर इसकी विजिबिलिटी प्रभावित होती है। लाल गेंद के साथ ऐसी कोई चीज देखने के लिए नहीं मिलती। अब तो वनडे क्रिकेट में दोनों छोरों पर सफेद गेंद का इस्तेमाल होता है।
  • दोनों गेंदों में बड़ा फर्क है-

    • लाल गेंद और सफेद गेंद में काफी अंतर होता है। लाल गेंद की सिलाई काफी पास-पास होती है और मैटेरियल भी अलग होता है। सफेद गेंद की सिलाई थोड़ी वाइड होती है। लाल गेंद लंबे समय तक अपनी शेप को बरकरार रखती है जिसके चलते टेस्ट क्रिकेट के लंबे-लंबे सेशन में यही गेंद प्रभावी होती है।

    • सफेद गेंद कुछ समय बाद सॉफ्ट हो जाती है। रेड बॉल सफेद गेंद की तुलना में बहुत ज्यादा चिकनी और चमकीली नहीं होती। रेड बॉल थोड़ी सख्त बनी रहती है। बहुत चिकनी होने के चलते सफेद गेंद जल्द ही अपनी चमक भी खो देती है। इसलिए सफेद गेंद क्रिकेट में आपको शुरुआती तौर पर तो अधिक स्विंग देखने के लिए मिलती है, लेकिन बहुत तेजी से ये गायब भी हो जाती है।

      टेस्ट के उतार-चढ़ाव में योगदान

      रेड बॉल शुरुआती स्तर पर भले ही सफेद गेंद की जितनी स्विंग ना करें, लेकिन उसकी स्विंग देर तक बरकरार रहती है और जब वह गेंद पुरानी हो जाती है तो रिवर्स स्विंग भी बड़ी शानदार देखने के लिए मिलती है। कुल मिलाकर रेड बॉल सफेद बॉल की तुलना में बहुत ज्यादा 'हरकत' करती है। लाल गेंद की यह विशेषता टेस्ट मैचों के उतार-चढ़ाव में चार-चांद लगा देती है।

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