World Cup: केशव बने महाराज.... जिन्होने साउथ अफ्रीका से हटाया चोकर्स का टैग

Keshav Maharaj: वर्ल्डकप का मैच इससे ज़्यादा रोमांचक नहीं हो सकता। आखिरी ओवर, आखिरी विकेट और आखिरी रन लेकिन जीत आखिर में दक्षिण अफ्रीका की हुई। अफ्रीका की ओर से गेंदबाजी में शम्सी और बैटिंग में शतक से चूकने वाले मर्करम का जलवा रहा लेकिन भारत में हो रहे विश्वकप में महफिल लूट ले गए भारतवंशी केशव महाराज।

दक्षिण अफ्रिका के लिए खेल रहे लेफ्ट आर्म स्पिनर केशव महाराज को गेंदबाजी में एक भी विकेट नहीं मिले, तुर्रा उनके नौ ओवरों में पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने जमकर 56 रन कूटे और फिर बल्लेबाजी में महज 33 की कमजोर औसत से 21 गेंदों में केवल 7 रन बनाकर भी महाराज बन गए जीत के हीरो और पाकिस्तान को लगभग नॉक-आउट कर, साउथ अफ्रिका पर लगे चोकर टैग को हटा दिया। इस जीत के बाद साउथ अफ्रीका पहली बार वर्ल्डकप की अंकतालिका में टेबल-टॉपर बनी है। अभी टुर्नामेंट में अफ्रीका का सफर आगे भी है लेकिन देखते हैं कौन हैं केशव महाराज और कैसे बने इस मैच के नायक।

keshav maharaj

कैसा रहा मैच

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी कर रही पाकिस्तान की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहला विकेट 20 और दूसरा 38 रन पर गिरने के बाद कप्तान बाबर आज़म ने मोर्चा संभाला और शृंखला में दूसरा अर्धशतक लगाते हुए टोटल 141 रन तक ले गए लेकिन तब तक पाकिस्तान के 5 विकेट गिर चुके थे। निम्न मध्यक्रम में शादाब, शकील और साउद खान ने भी अपने हाथ खोले और क्रमश: 52 और 42 रन बना सके। शम्सी के चार और यानसेन के 3 विकेट की बदौलत दक्षिण अफ्रीका पाकिस्तानी टीम को 270 पर रोकने में कामयाब रही। तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि यह मोडरेट टोटल इतना कठिन लक्ष्य होगा और मैच इस कदर रोमांचक होगा।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी प्रोटियाज की शुरुआत तेज लेकिन जोखिम भरी रही। पिछले मैच के हीरो क्विंटन डिकॉक 14 गेंद में 24 रन बनाकर आउट हो गए। उनके पीछे वापसी कर रहे कप्तान बवूमा भी चलते बने। एडेन मर्करम एक तरफ जमे हुए थे लेकिन दूसरे छोर से विकेटों का पतन जारी था। 98 रन पर मार्करम के आउट होते ही सबको एकबारगी लगा कि साउथ अफ्रीका फिर से चोक करेगी। कहते हैं कि अवसर पर खरा उतरना ही साधारण इंसान को असाधारण बनाती है। यही अवसर कल केशव महाराज के कैरियर में था।

केशव बने महाराज

टेल-एंडर केशव महाराज बल्लेबाजी के लिए नहीं जाने जाते हैं, उस पर तुर्रा पाकिस्तानी पेस अटैक। जब मार्करम और और उसी स्कोर पर गेराल्ड कोज़ी आउट हुए तो दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए 9 ओवर और 4 गेंद में चाहिए थे केवल 21 रन लेकिन संकट यह था कि उनके पास अब केवल दो विकेट थे जिनमें से कोई सिद्धहस्त बल्लेबाज नहीं बचा था। फिर अफ्रीका के स्कोर में केवल 10 रन जुड़ते ही लुंगी एनग़ीडी भी आउट हो गए। अब अफ्रीका का स्कोर था 260, हाथ में एक विकेट और ओवर बचे थे साढे पांच।

पाकिस्तानी गेंदबाजों ने शानदार वापसी करी थी। एक-एक गेंद पर महाराज और उनके साथी शम्सी की कड़ी परीक्षा लेने लगे। स्विंग, बाउंस और पेस का धैर्यपूर्वक सामना करते हुए महाराज ने स्नायु पर नियंत्रण बनाए रखा और 20 गेंद खेलते हुए एक चौके की मदद से 6 रन पर पहुंचे। अब ओवर था 48वां और सामने थे नवाज। पहली गेंद पर शम्सी ने सिंगल लिया और इसी के साथ यह सुनिश्चित हो गया कि अब अफ्रीका मैच हारेगी नहीं और फिर अगली ही गेंद पर केशव ने पुल लगाकर चौका हासिल किया और बन गए मैच के वास्तविक महाराज।

कौन हैं केशव महाराज

दक्षिण अफ्रिका पर लगे चोकर्स के टैग को हटाने वाले केशव आत्मानंद महाराज का भारत से खास रिश्ता है। उनका परिवार कभी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में रहता था। 1874 में उनके पूर्वज अफ्रीका चले गए थे। वे अफ्रीका के डरबन में रहते हैं। केशव महाराज के पिता आत्मानंद महाराज भी बतौर विकेट-कीपर बल्लेबाज अफ्रीका के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके हैं। अफ्रीका पर लगे प्रतिबंध के कारण क्रिकेट कैरियर आगे नहीं बढता देख वे फैमिली बिजनेस में लग गए। केशव महाराज के परिवार में पिता आत्मानंद, मां कंचनमाला के अतिरिक्त एक बहन तरिश्मा भी है जिसकी शादी श्रीलंका में हुई है।

कौन हैं केशव महाराज के गुरु

क्रिकेट में कैरियर न बना पाने की कसक आत्मानंद महाराज को हमेशा रही। जब बेटा केशव बड़ा हुआ तो उन्होनें उसे क्रिकेटर बनाने का सपना देखा। शुरुआत में केशव महाराज के पिता ही उनके क्रिकेट कोच थे। बाद में डॉल्फिन स्क़्वाड के कोच मोर्गन ने केशव महाराज के कैरियर को संवारने में मदद की। केशव के साथ नॉटआउट रहे शम्सी इसी क्लब में पहली बार मिले थे और अब तक दोस्त हैं। केशव महाराज लेफ्ट ऑर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिन गेंदबाजी के साथ साथ निचले क्रम में बल्लेबाजी भी करते हैं।

महाराज का आश्चर्यजनक करियर

केशव महाराज का छोटा सा कैरियर आश्चर्य से भरा हुआ है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि टी-20 इंटरनेशनल में पदार्पण से पहले ही केशव महाराज को श्रीलंका दौरे के लिये साउथ अफ्रीका की टी-20 टीम का कप्तान बना दिया गया था। विश्व क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि बतौर प्लेयर और बतौर कप्तान डेब्यू कर रहे महाराज ने श्रीलंका को उसके घर में मात देते हुए प्रोटियाज को सीरीज जिता दिया था। हालांकि साल भर पूर्व महाराज खतरनाक एक्सिडेंट के शिकार हो गए थे लेकिन जीजिविषा और संघर्ष के धनी केशव कठिन परिश्रम कर मैदान पर शानदार वापसी कर दक्षिण अफ्रीकी टीम में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कितनी संपत्ति के मालिक हैं महाराज, कहां से आते हैं पैसे

भारतीय क्रिकेटरों की तरह दक्षिण अफ्रिका में क्रिकटरों का भारी-भरकम भरकम अनुबंध नहीं होता। दक्षिण अफ्रिका के अतिरिक्त महाराज इंगलैंड के काउंटी क्रिकेट व आईपीएल समेत अनेक विदेशी लीग में खेलते हैं। इसके अलावा वे कई प्रोडक्ट का एंडोर्समेंट भी करते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार केशव महाराज की निजी संपत्ति 2023 मार्च तक 50 लाख अमेरिकी डॉलर बताई गई है।

केशव महराज की पत्नी देती है बॉलीवुड सुंदरियों को भी मात

केशव महाराज के कैरियर की तरह उनकी लव-लाइफ भी दिलचस्प है। उनकी पत्नी लेरिशा भी भारतीय मूल की हैं। विवाह बंधन में बंधने से पूर्व दोनों ने लंबे समय तक एक-दूसरे को डेट किया था। महाराज ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे लेरिशा से एक कॉमन फ्रेंड के माध्यम से मिले थे। महाराज की पत्नी लेरिशा हैं भी बहुत खूबसूरत है और जीती हैं महारानी जैसी लाइफ। उनकी सुंदरता के आगे सच में बॉलीवुड की अभिनेत्रियां पानी मांगती नज़र आएंगी।

हनुमानभक्त हैं केशव महाराज

केशव महाराज हनुमान जी के पक्के भक्त हैं। उनकी हनुमानभक्ति बहुधा उनके सोशल-मीडिया पोस्ट में झलकती भी है। हिंदू त्यौहारों और मंदिर भ्रमण की तस्वीरें वे शेयर करते रहते हैं। पोस्ट में जय श्रीराम, जय हनुमान लिखकर अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा निवेदित करते रहते हैं। केशव अपने हिंदू पहचान और अपनी धार्मिक आस्था पर गर्व करते हैं। उनके बल्ले पर भी ॐ लिखा हुआ है और कल इसी ॐ वाले बल्ले से महाराज ने पाकिस्तान को धूल चटायी थी।

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