क्यों कबड्डी को नहीं किया गया ओलम्पिक में शामिल? जानिए इसके पीछे के कुछ बड़े कारण
Kabaddi in Olympics: जब इंटरनेशनल ओलम्पिक संघ ने घोषणा करते हुए कहा था कि कुछ नए खेलों को शामिल किया जाएगा, उस समय काफी उत्साह देखने को मिला था कि इन नए खेलों में कबड्डी का नाम भी हो सकता है। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और सवाल फिर से वही रह गया।
कबड्डी में भारतीय टीम धाकड़ है और गोल्ड मेडल जीतने की क्षमता रखती है। टीम इंडिया ने तीन बार वर्ल्ड कप में खिताब हासिल किया है। पुराना खेल होने के बाद भी कबड्डी को ओलम्पिक में शामिल नहीं किया जा रहा है। हालांकि प्रयास चल रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिली है।

क्यों कबड्डी को ओलम्पिक में शामिल नहीं किया जा रहा है, इसके पीछे भी कुछ कारण है। यह कबड्डी ही नहीं बल्कि अन्य खेलों के लिए भी लागू होते हैं। किसी खेल को ओलम्पिक में शामिल करने के लिए कुछ योग्यताएं होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर उस खेल को ओलम्पिक में शामिल नहीं किया जाता है।
अगर किसी खेल की पुरुष टीम को ओलम्पिक में शामिल किया जाना है, तो वह खेल कम से कम 75 देशों में खेला जाना चाहिए। इसके अलावा महिला कैटेगरी में हो तो 40 देशो में खेला जाना चाहिए। इतने देशों में उस खेल का वजूद होने से ही ओलम्पिक में शामिल होने के योग्य माना जाता है।
इसके अलावा एक शर्त यह भी है कि खेल शारीरिक होना चाहिए। इसमें किसी मशीन और उपकरण की मदद नहीं लेनी चाहिए। इस शर्त की योग्यता तो कबड्डी रखता है। चेस और कार रेसिंग जैसे खेलों पर यह नियम लागू हो जाता है। इसके अलावा ओलम्पिक सेशन की मंजूरी भी होनी चाहिए, जो किसी नए खेल को शामिल करने के लिए ओलम्पिक कार्यकारी बोर्ड समिति की सिफारिश के आधार पर होती है।
हालांकि कबड्डी में वर्ल्ड कप होता है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई लोकप्रियता नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार 17 देश ही कबड्डी रैंकिंग में शामिल हैं। पॉइंट्स के आधार पर यह रैंकिंग बनी है। सिर्फ 25 देशों ने ही कबड्डी में महिला और पुरुष टीमों का रजिस्ट्रेशन कराया है।
भारत की तरफ से कबड्डी को ओलम्पिक में लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए एक समय निर्धारित किया गया है। भारत ने 2036 में ओलम्पिक खेलों का आयोजन कराने का लक्ष्य रखा है। उसमें कबड्डी को शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा।












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