Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

जब विनोद कांबली डेढ़ घंटे तक कप्तान को देते रहे थे गालियां

विनोद कांबली पर घरेलू हिंसा के आरोप लगे हैं। उनपर अपनी पत्नी को शराब के नशे में पीटने का आरोप लगा है।

Vinod Kambli

पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली एक स्प्वायल्ड जीनियस (बर्बाद प्रतिभा) हैं। उनमें महान क्रिकेटर बनने की जन्मजात प्रतिभा थी। लेकिन अपने दुर्गुणों के चलते आज वे बदनामी और बदहाली का जीवन जी रहे हैं। इस बर्बादी के लिए कोई और नहीं बल्कि वे खुद जिम्मेदार हैं। उन्होंने अपने जीवन के पहले 7 टेस्ट मैचों में चार सेंचुरी मार कर तहलका मचा दिया था। इसमें से दो डबल सेंचुरी थी। उस समय वे सचिन तेंदुलकर से ज्यादा सफल थे। लेकिन वे शोहरत और दौलत को पचा नहीं पाये। वे गलत रास्ते पर चल पड़े। शराब और अफेयर ने उनका खेल जीवन खत्म कर दिया।

कांबली ने खुद अपना जीवन बर्बाद किया

ईश्वर कुछ लोगों को जन्मजात प्रतिभावान बनाते हैं। अब यह उस व्यक्ति पर निर्भर है कि वह अपनी प्रतिभा का कितना सदुपयोग करता है। प्रतिभा जब तक सदाचार के दायरे में रहती है तब तक वह फलदायी होती है। लेकिन जब प्रतिभावान व्यक्ति पथभ्रष्ट हो जाता है तो उसके पतन में देर नहीं लगती। क्रिकेट में सचिन और कांबली का उत्कर्ष एक साथ हुआ था। दोनों की प्रतिभा और योग्यता एक जैसी थी। सदाचार और अनुशासन का पालन करने वाले सचिन क्रिकेट के भगवान बन गये जब कि कांबली अपने दुर्गुणों के कारण खलनायक बन गये। विनोद कांबली दुर्लभ प्रतिभा वाले क्रिकेटर थे। उनकी गलतियों के बावजूद कुछ वरिष्ठ क्रिकेटर उन्हें बचाना चाहते थे। लेकिन उनके बढ़ते दुर्व्यवहार के कारण ये शुभचिंतक भी चाह कर भी कुछ नहीं कर सके।

जब कांबली को टीम से ड्रॉप किया गया

1996 में आइ एस बिंद्रा बीसीसीआइ के अध्यक्ष थे। वे आइएएस अधिकारी थे और सख्त प्रशासक माने जाते थे। 1996 में विनोद कांबली को टीम से ड्रॉप कर दिया गया। इसके बाद मीडिया में कांबली को टीम में लेने की मांग होने लगी। उस समय अजीत वाडेकर भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर थे। वे मुम्बई के ही थे और कांबली की बैटिंग के प्रशंसक थे। आम लोग ये बात नहीं जानते थे कि कांबली को किस वजह से टीम से बाहर किया गया है। लेकिन बीसीसीआइ कांबली की हरकतों से नाराज थी। इस मुद्दे पर शिमला में क्रिकेट बोर्ड की खास बैठक बुलायी गयी। वाडेकर ने बैठक में कांबली का पक्ष लिया तो बोर्ड के अध्यक्ष आइएस बिंद्रा भड़क गये।

कांबली के गलत आचरण का खुलासा

बिंद्रा ने वाडेकर की बात पर नाराजगी से कहा, शुक्र मनाइए कि उन्हें (कांबली) टीम से बाहर ही किया गया है। उनको ड्रॉप कर के एक तरह से बोर्ड ने उनकी मदद ही की है। अगर अनुशासन तोड़ने के आरोप में उन पर कार्रवाई होती तो वे दो साल के लिए प्रतिबंधित हो जाते। उनकी गलती माफी के काबिल नहीं है। इसकी सजा तो निलंबन है। लेकिन हमें भी उनके करियर की चिंता है। इसलिए समझाने के ख्याल से उन्हें फिलहाल बाहर किया गया है। वाडेकर ने फिर कांबली का बचाव किया। उन्होंने कहा, ये हार्ड एक्शन है, कुछ खिलाड़ी और थे जो कांबली की तरह बर्ताव कर रहे थे। फिर अकेले कांबली पर एक्शन क्यों ? इतना सुनना था कि बिंद्रा का गुस्सा और तेज हो गया।

होटल के कमरे में शराब पी कर मंगेतर से झगड़ा

तब आइएस बिंद्रा ने कठोरता से कहा, ये तो और बुरी बात है। आप टीम के मैनेजर थे। अगर समय रहते इन हरकतों पर नियंत्रण लगा देते तो आज ये नौबत नहीं आती। कई खिलाड़ी बुरा बर्ताव करते रहे और चुप रहे ? लेकिन कांबली के खिलाफ एक नहीं बल्कि कई शिकायतें मिली हैं जिन्हें माफ नहीं किया जा सकता। उस समय जगमोहन डालमिया भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव थे। वे क्रिकेट के कुशल प्रबंधकर्ता थे। बैठक में उन्होंने कांबली की कारगुजारियों का एक-एक कर खुलासा कर दिया। उन्होंने कहा, 1994 में लखनऊ में श्रीलंका के खिलाफ मैच था। मैच से एक दिन पहले की रात कांबली ने होटल के अपने रूम में शराब पी कर अपनी मंगेतर से झगड़ा कर लिया। टीम के प्रमुख खिलाड़ी का शराब पीना अपनी होने वाली पत्नी से झगड़ा करना असभ्यता की पराकाष्ठा थी। ये बात होटल में फैल गयी जिससे पूरी भारतीय टीम की बदनामी हुई। इस घटना के बाद सभी खिलाड़ी असहज हो गये। बड़ी मुश्किल से उन्हें हौसला दिया गया। इस मैच में कांबली 5 रन बना कर रनआउट हो गये थे जब कि सचिन और सिद्धू ने शतक लगाया था।

कप्तान को गाली बकने का आरोप

बैठक में जगमोहन डालमिया ने कांबली की दूसरी बदसलूकी का जिक्र किया। 1994 में भारतीय टीम शारजाह में मैच खेल रही थी। पाकिस्तान के साथ मुकाबला चल रहा था। भारतीय टीम के मैनेजर अजीत वाडेकर को दिल का दौरा पड़ा तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। लेकिन अस्पताल जाने से पहले वाडेकर ने कप्तान अजहरुद्दीन के पास एक संदेश भेजा कि हार्डहिटर अतुल बेदादे को विनोद कांबली से पहले बैटिंग के लिए भेजा जाए। अजहर ने ऐसा ही किया। बेदादे पाचवें नम्बर पर बैटिंग के लिए गये। लेकिन दुर्भाग्य से वे 0 पर आउट हो गये। इसके बाद छठे नम्बर पर विनोद कांबली आये। वे सिर्फ 10 बना सके। कांबली ने अपनी नाकामी का ठीकरा अजहर के माथे पर फोड़ दिया। वे नाराज थे कि उन्हें बाद में क्यों भेजा गया। गुस्से से लाल -पीले कांबली ड्रेसिंग रूम में पहुंचे और कप्तान अजहरुद्दीन को गालियां बकने लगे। करीब डेढ़ घंटे तक वे अनाप-शनाप बोलते रहे और अपशब्दों का इस्तेमाल करते रहे। इसके बाद अजहर भी आपे से बाहर हो गये। तब उन्होंने शर्त रख दि अब टीम में या तो वे रहेंगे या फिर कांबली। बात बढ़ गयी। इस घटना के बाद सभी खिलाड़ियों का मनोबल गिर गया था।

जब तेंदुलकर ने किया था कांबली का बचाव

कांबली के गाली गलौज की घटना से बीसीसीआइ के अधिकारी स्तब्ध रह गये। अपमानित अजहर टीम छोड़ने की जिद पर अड़े थे। तब आइएस बिंद्रा और जगमोहन डालमिया ने फोन पर कांबली, अजहर और टीम के अन्य खिलाड़ियों से बात की। इसके बाद बोर्ड ने फैसला किया कि कांबली को टीम से हटा कर शारजाह से वापस बुला लिया जाय। तभी कांबली के जिगरी दोस्त सचिन तेंदुलकर ने इस मामले में हस्तक्षेप कर दिया। उन्होंने बोर्ड से अनुरोध किया कि वे कांबली को फिर गलती नहीं करने के लिए समझाएंगे, कृपया उन्हें एक मौका और दिया जाए। अगर कांबली को अनुशासनहीनता के आरोप में दौरे से वापस बुलाया जाएगा तो उनके करियर पर एक कलंक लग जाएगा। कांबली ने इस घटना के लिए लिखित माफी मांगी थी और वादा किया था कि वे फिर ऐसी गलती नहीं करेंगे। बैठक में डालमिया ने फिर ये स्पष्ट किया, इस माफी के बाद कांबली को सुधर जाना चाहिए था। लेकिन वे सुधरने की बजाय गलत रास्ते पर ही चलते गये। दौरे के समय होटल के कमरे में रात दो-तीन बजे लौटना उनकी आदत बन गयी थी। वे शराब पी कर कभी हंगामा करते तो कभी जोर-जोर से रोने लगते थे। इससे पूरी टीम परेशान थी। आखिरकार उन्हें टीम से हटाना पड़ा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+